बीसलपुर। नगर के ऐतिहासिक रामलीला मेले में शनिवार को शबरी लीला, सुग्रीव मित्रता एवं बालि वध लीला का मंचन हुआ।
लीला मंचन के दौरान जब राम और लक्ष्मण जंगल में शबरी के आश्रम पर पहुंचते हैं तो शबरी अपने आश्रम पर राम और लक्ष्मण को देखकर भाव विभोर हो जाती है। वह उनके खाने के लिए बेर लाती है। राम के पास कहीं खट्टे बेर न पहुंच जाएं, इसलिए शबरी बेरों को पहले चखती है। जो बेर मीठे होते हैं, वही बेर राम को देती है। वहां से राम किष्किंधा जाते हैं जहां नरेश बालि के भाई सुग्रीव से मित्रता होती है। सुग्रीव राम को अपने भाई बालि द्वारा अपने ऊपर किए गए अत्याचारों के बारे में बताते हैं। इसके बाद राम द्वारा बनाई गई रणनीति के तहत सुग्रीव अपने भाई बालि को दरवाजे पर जाकर ललकारते हैं। तभी बालि उसका पीछा करने लगता है। सुग्रीव बालि को उस स्थान तक ले जाते हैं, जहां राम और लक्ष्मण पेड़ के पीछे छिपे होते हैं। इसके बाद बालि और सुग्रीव का युद्ध होने लगता है। तभी राम ने बाण मारकर बालि का वध कर दिया। लीला का समापन यहीं पर हो जाता है। मेला कमेटी के लीला प्रबंधक गोपाल कृष्ण अग्रवाल के निर्देशन में हुई लीला का संचालन मनोज त्रिपाठी, अवधेश भट्ट और उपेंद्र शंखधार ने रामायण की चौपाईयां, छंद और दोहे पढ़कर किया। लीला देखने काफी बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे थे।