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गुरुदेव का आशीर्वाद लेकर श्रीराम ने तोड़ा शिव धनुष
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शिव धनुष तोड़ते श्रीराम। संवाद
- फोटो : PILIBHIT
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बीसलपुर। नगर के ऐतिहासिक रामलीला मेले में मंगलवार को धनुष यज्ञ लीला का मंचन हुआ। जिसे देखने भारी संख्या में भक्त उमड़ पड़े थे। कलाकारों ने धनुष यज्ञ लीला का जीवंत मंचन किया।
मेला मैदान में धनुष यज्ञ लीला अपराह्न चार बजे शुरू हुई। लीला का शुभारंभ उस समय होता है, जब राजा जनक घोषणा करते हैं कि उनके दरबार में रखा भगवान शिव का धनुष जो राजा उठाकर तोड़ देगा उसी राजा के गले में सीता वर माला डाल देगी। राजा जनक के द्वारा इस घोषणा के करते ही सीता स्वयंवर में आए तमाम राजाओं ने भगवान शिव के धनुष को उठाने का प्रयास किया लेकिन कोई हिला भी नहीं सका। भगवान राम और लक्ष्मण भी अपने गुरु विश्वामित्र के साथ स्वयंवर में आए हुए थे। जब कोई भी राजा भगवान शिव का धनुष नहीं उठा सका, तभी राजा जनक निराश होकर बोले- लगता है कि पृथ्वी वीरों से खाली हो गई है। राजा जनक की यह बात सुनकर लक्ष्मण क्रोध में आए और बोले कि भइया राम कह देे तो जरा सी देर में वह यह धनुष उठाकर तोड़ देंगे। गुरु विश्वामित्र ने लक्ष्मण को समझाकर भगवान राम को धनुष तोड़ने का इशारा किया। गुरुदेव का इशारा मिलते ही भगवान राम ने एक क्षण में भगवान शिव का धनुष उठाकर तोड़ दिया, जिसे देखकर स्वयंवर में आए राजा दंग रह गए। उसके बाद राजा जनक का चेहरा खुशी से खिल उठा। उनके इशारे पर सीताजी ने भगवान राम के गले में वरमाला डाल दी। भगवान शिव के धनुष के टूटने की आवाज से क्रोधित होकर परशुराम स्वयंवर स्थल पर आए और धनुष तोड़ने को लेकर नाराज होने लगे। इस पर परशुराम और लक्ष्मण के बीच काफी तीखा संवाद भी हुआ। बाद में जब परशुराम को पता चला कि धनुष तोड़ने वाले भगवान राम है, तभी वह भगवान राम को अभिवादन कर चले गए। यहीं पर लीला का समापन हो जाता है। मेला कमेटी के लीला संचालक गोपाल कृष्ण अग्रवाल के निर्देशन में हुई लीला का संचालन अवधेश भट्ट, मनोज त्रिपाठी और उपेंद्र शंखधार ने रामायण की चौपाइयां, छंद और दोहे पढ़कर किया। इस मौके पर मेला कमेटी के अधिकांश लोग मौजूद थे। लीला देखने वालों की भीड़ दिनों दिन बढ़ती जा रही है।
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मेला मैदान में धनुष यज्ञ लीला अपराह्न चार बजे शुरू हुई। लीला का शुभारंभ उस समय होता है, जब राजा जनक घोषणा करते हैं कि उनके दरबार में रखा भगवान शिव का धनुष जो राजा उठाकर तोड़ देगा उसी राजा के गले में सीता वर माला डाल देगी। राजा जनक के द्वारा इस घोषणा के करते ही सीता स्वयंवर में आए तमाम राजाओं ने भगवान शिव के धनुष को उठाने का प्रयास किया लेकिन कोई हिला भी नहीं सका। भगवान राम और लक्ष्मण भी अपने गुरु विश्वामित्र के साथ स्वयंवर में आए हुए थे। जब कोई भी राजा भगवान शिव का धनुष नहीं उठा सका, तभी राजा जनक निराश होकर बोले- लगता है कि पृथ्वी वीरों से खाली हो गई है। राजा जनक की यह बात सुनकर लक्ष्मण क्रोध में आए और बोले कि भइया राम कह देे तो जरा सी देर में वह यह धनुष उठाकर तोड़ देंगे। गुरु विश्वामित्र ने लक्ष्मण को समझाकर भगवान राम को धनुष तोड़ने का इशारा किया। गुरुदेव का इशारा मिलते ही भगवान राम ने एक क्षण में भगवान शिव का धनुष उठाकर तोड़ दिया, जिसे देखकर स्वयंवर में आए राजा दंग रह गए। उसके बाद राजा जनक का चेहरा खुशी से खिल उठा। उनके इशारे पर सीताजी ने भगवान राम के गले में वरमाला डाल दी। भगवान शिव के धनुष के टूटने की आवाज से क्रोधित होकर परशुराम स्वयंवर स्थल पर आए और धनुष तोड़ने को लेकर नाराज होने लगे। इस पर परशुराम और लक्ष्मण के बीच काफी तीखा संवाद भी हुआ। बाद में जब परशुराम को पता चला कि धनुष तोड़ने वाले भगवान राम है, तभी वह भगवान राम को अभिवादन कर चले गए। यहीं पर लीला का समापन हो जाता है। मेला कमेटी के लीला संचालक गोपाल कृष्ण अग्रवाल के निर्देशन में हुई लीला का संचालन अवधेश भट्ट, मनोज त्रिपाठी और उपेंद्र शंखधार ने रामायण की चौपाइयां, छंद और दोहे पढ़कर किया। इस मौके पर मेला कमेटी के अधिकांश लोग मौजूद थे। लीला देखने वालों की भीड़ दिनों दिन बढ़ती जा रही है।
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