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राम के अयोध्या न लौटने की सूचना पर प्राण त्याग गए राजा दशरथ
पीलीभीत
Updated Mon, 25 Sep 2017 12:10 AM IST
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रामलीला
- फोटो : उमर उजाला
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बीसलपुर। ऐतिहासिक रामलीला मेले में रविवार को दशरथ प्राण त्याग और भरत मिलाप लीला का मंचन हुआ। जिसको देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ी।
रविवार की लीला का शुभारंभ उस समय होता है, जब राम, लक्ष्मण और सीता के वन गमन की जानकारी होने पर राजा दशरथ बेहोश हो जाते हैं। इससे पहले राजा दशरथ ने अपने मंत्री सुमंत को राम को वापस अयोध्या बुलाकर लाने का आदेश भी दिया था लेकिन राम सुमंत के कहने से अयोध्या वापस नहीं लौटे। जिसके बाद राजा दशरथ ने प्राण त्याग दिए। राजा दशरथ के पार्थिव शरीर का गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया जाता है। बाद में भरत गुरू वशिष्ठ से मंत्रण करने के बाद राम को वापस लाने के लिए भरत चित्रकूट रवाना होते हैं। चित्रकूट पहुंचने के बाद भरत-राम के चरणों में गिर पड़ते हैं। वापस लौटने की गुहार लगाते है, जिस पर राम उन्हें उठाकर सीने से लगा लेते हैं। बताते हैं कि वह पिता दशरथ के वचन को पूरा कर ही वापस आएंगे। राम के आदेश पर भरत अयोध्या की राजगद्दी पर राम के खड़ाऊं रख देते हैं। इस मौके पर प्रबंधक गोपाल कृष्ण अग्रवाल, मनोज त्रिपाठी, उपेंद्र शंखधार और अवधेश भट्ट ने चौपाईयां दोहे पढ़े ।
रविवार की लीला का शुभारंभ उस समय होता है, जब राम, लक्ष्मण और सीता के वन गमन की जानकारी होने पर राजा दशरथ बेहोश हो जाते हैं। इससे पहले राजा दशरथ ने अपने मंत्री सुमंत को राम को वापस अयोध्या बुलाकर लाने का आदेश भी दिया था लेकिन राम सुमंत के कहने से अयोध्या वापस नहीं लौटे। जिसके बाद राजा दशरथ ने प्राण त्याग दिए। राजा दशरथ के पार्थिव शरीर का गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया जाता है। बाद में भरत गुरू वशिष्ठ से मंत्रण करने के बाद राम को वापस लाने के लिए भरत चित्रकूट रवाना होते हैं। चित्रकूट पहुंचने के बाद भरत-राम के चरणों में गिर पड़ते हैं। वापस लौटने की गुहार लगाते है, जिस पर राम उन्हें उठाकर सीने से लगा लेते हैं। बताते हैं कि वह पिता दशरथ के वचन को पूरा कर ही वापस आएंगे। राम के आदेश पर भरत अयोध्या की राजगद्दी पर राम के खड़ाऊं रख देते हैं। इस मौके पर प्रबंधक गोपाल कृष्ण अग्रवाल, मनोज त्रिपाठी, उपेंद्र शंखधार और अवधेश भट्ट ने चौपाईयां दोहे पढ़े ।