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गन्ना राज्यमंत्री के जिले में ही नहीं हो रहा क्रय अधिनियम का पालन
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पीलीभीत। राज्यमंत्री संजय सिंह गंगवार के अपने जिले में गन्ना क्रय अधिनियम का पालन नहीं हो रहा है। तीन चीनी मिलें किसानों के 341 करोड़ रुपये दबाए बैठी हैं। किसानों का कहना है कि उन्हें गन्ना विकास एवं चीनी मिल राज्यमंत्री से काफी उम्मीदें हैं। अगर वह भाजपा के संकल्पपत्र पर अमल कराते हैं तो चीनी मिलों को बकाया भुगतान करना ही पड़ेगा।
जिले में चार चीनी मिलें हैं लेकिन एचएल शुगर मिल समय पर भुगतान कर रही है। तीन चीनी मिलें भुगतान में पीछे हैं। इन चीनी मिलों से समय पर भुगतान न मिलने की वजह से किसान अपने जरूरी काम पूरे नहीं कर पा रहे हैं। जिला गन्ना अधिकारी जितेंद्र मिश्र से जब पूछा गया तो उन्होंने बताया कि एचएल शुगर मिल 14 दिन में भुगतान कर रही है लेकिन बाकी तीनों चीनी मिलें समय पर भुगतान नहीं दे पा रही हैं। इसलिए गन्ना विभाग लगातार दबाव बनाए हुए है।
जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि भुगतान मिल सके। वहीं, बीसलपुर स्थित किसान सहकारी चीनी मिल के प्रधान प्रबंधक एसएल पाल ने बताया कि रुपये का बंदोबस्त न हो पाने के कारण किसानों का कुछ भुगतान बाकी है। बंदोबस्त होते ही अवशेष सारा भुगतान कर दिया जाएगा। बजाज हिंदुस्तान चीनी मिल मकसूदापुर के मुख्य गन्ना प्रबंधक आरके सिंह ने बताया कि गन्ना मूल्य भुगतान के मद में रुपये नहीं हैं। चीनी मिल भुगतान का इंतजाम कर रही है।
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चीनी मिल का नाम-- बकाया भुगतान
बरखेड़ा चीनी मिल- 254 करोड़ 39 लाख 56 हजार
बीसलपुर चीनी मिल-48 करोड़ 14 लाख
पूरनपुर चीनी मिल-38 करोड़ 63 लाख 53 हजार
कुल बकाया-341 करोड़ 17 लाख 09 हजार रुपये
मैं पहली अप्रैल को पीलीभीत पहुंच रहा हूं। विभागीय मीटिंग करूंगा। किस चीनी मिल पर कितना बकाया है। क्यों नहीं भुगतान हो रहा है.. इस पर बातचीत होगी। इसके बाद भुगतान के लिए भाजपा के संकल्पपत्र पर अमल किया जाएगा।
- संजय गंगवार, गन्ना विकास एवं चीनी मिल राज्यमंत्री, उत्तर प्रदेश
चुनाव के समय किसानों को 14 दिन में भुगतान का भरोसा दिया गया था। अब इसे पूरा करें। फिलहाल तो गन्ना बेचने के बाद महीनों भुगतान के लिए इंतजार करना पड़ता है।
रघुविन्दर सिंह, निवासी पिपरियाकरम
पूरनपुर चीनी मिल ने अभी तक जनवरी की शुरूआत तक का भुगतान किया है, जबकि सरकार ने गन्ना खरीद के 14 दिनों में भुगतान का आदेश दिया है। अब हमें देखना यह है कि अपनी बात पर सरकार कितना खरा उतरती है।
रणजोध सिंह, निवासी पिपरियाकरम
चीनी मिल बरखेड़ा पर लगभग 10 लाख रुपये गन्ना मूल्य भुगतान बकाया है। भुगतान न मिलने से सारी व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
हजारी लाल, गन्ना कृषक गांव रंभोजा
किसान सहकारी चीनी मिल बीसलपुर पर लगभग एक लाख रुपये गन्ना मूल्य भुगतान बकाया है। भुगतान न मिलने से होली का पर्व फीका रहा। आगे के काम भी प्रभावित हो रहे हैं।
अवनीश कुमार, गन्ना कृषक गांव चठिया सेवाराम
यह है गन्ना क्रय अधिनियम का नियम- गन्ना क्रय अधिनियम के तहत मिल में गन्ना सप्लाई करने के 14 दिनों के अवधि में गन्ना मूल्य भुगतान किसान के खाते में पहुंच जाना चाहिए। अगर इसके बाद कोई चीनी मिल भुगतान करती है तो मिल को 15 फीसदी की दर से बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज देना होगा, लेकिन किसानों को न तो समय पर गन्ना मूल्य प्राप्त होता है और न ही बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज मिल रहा है।
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जिले में चार चीनी मिलें हैं लेकिन एचएल शुगर मिल समय पर भुगतान कर रही है। तीन चीनी मिलें भुगतान में पीछे हैं। इन चीनी मिलों से समय पर भुगतान न मिलने की वजह से किसान अपने जरूरी काम पूरे नहीं कर पा रहे हैं। जिला गन्ना अधिकारी जितेंद्र मिश्र से जब पूछा गया तो उन्होंने बताया कि एचएल शुगर मिल 14 दिन में भुगतान कर रही है लेकिन बाकी तीनों चीनी मिलें समय पर भुगतान नहीं दे पा रही हैं। इसलिए गन्ना विभाग लगातार दबाव बनाए हुए है।
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जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि भुगतान मिल सके। वहीं, बीसलपुर स्थित किसान सहकारी चीनी मिल के प्रधान प्रबंधक एसएल पाल ने बताया कि रुपये का बंदोबस्त न हो पाने के कारण किसानों का कुछ भुगतान बाकी है। बंदोबस्त होते ही अवशेष सारा भुगतान कर दिया जाएगा। बजाज हिंदुस्तान चीनी मिल मकसूदापुर के मुख्य गन्ना प्रबंधक आरके सिंह ने बताया कि गन्ना मूल्य भुगतान के मद में रुपये नहीं हैं। चीनी मिल भुगतान का इंतजाम कर रही है।
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चीनी मिल का नाम-- बकाया भुगतान
बरखेड़ा चीनी मिल- 254 करोड़ 39 लाख 56 हजार
बीसलपुर चीनी मिल-48 करोड़ 14 लाख
पूरनपुर चीनी मिल-38 करोड़ 63 लाख 53 हजार
कुल बकाया-341 करोड़ 17 लाख 09 हजार रुपये
मैं पहली अप्रैल को पीलीभीत पहुंच रहा हूं। विभागीय मीटिंग करूंगा। किस चीनी मिल पर कितना बकाया है। क्यों नहीं भुगतान हो रहा है.. इस पर बातचीत होगी। इसके बाद भुगतान के लिए भाजपा के संकल्पपत्र पर अमल किया जाएगा।
- संजय गंगवार, गन्ना विकास एवं चीनी मिल राज्यमंत्री, उत्तर प्रदेश
चुनाव के समय किसानों को 14 दिन में भुगतान का भरोसा दिया गया था। अब इसे पूरा करें। फिलहाल तो गन्ना बेचने के बाद महीनों भुगतान के लिए इंतजार करना पड़ता है।
रघुविन्दर सिंह, निवासी पिपरियाकरम
पूरनपुर चीनी मिल ने अभी तक जनवरी की शुरूआत तक का भुगतान किया है, जबकि सरकार ने गन्ना खरीद के 14 दिनों में भुगतान का आदेश दिया है। अब हमें देखना यह है कि अपनी बात पर सरकार कितना खरा उतरती है।
रणजोध सिंह, निवासी पिपरियाकरम
चीनी मिल बरखेड़ा पर लगभग 10 लाख रुपये गन्ना मूल्य भुगतान बकाया है। भुगतान न मिलने से सारी व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
हजारी लाल, गन्ना कृषक गांव रंभोजा
किसान सहकारी चीनी मिल बीसलपुर पर लगभग एक लाख रुपये गन्ना मूल्य भुगतान बकाया है। भुगतान न मिलने से होली का पर्व फीका रहा। आगे के काम भी प्रभावित हो रहे हैं।
अवनीश कुमार, गन्ना कृषक गांव चठिया सेवाराम
यह है गन्ना क्रय अधिनियम का नियम- गन्ना क्रय अधिनियम के तहत मिल में गन्ना सप्लाई करने के 14 दिनों के अवधि में गन्ना मूल्य भुगतान किसान के खाते में पहुंच जाना चाहिए। अगर इसके बाद कोई चीनी मिल भुगतान करती है तो मिल को 15 फीसदी की दर से बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज देना होगा, लेकिन किसानों को न तो समय पर गन्ना मूल्य प्राप्त होता है और न ही बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज मिल रहा है।