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खुशखबरी : पीटीआर में दिखी दुर्लभ प्रजाति की पीली गोह
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पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व की जैव विविधता और बेहतर जलवायु बाघों के साथ अब सरीसृप वर्ग के वन्यप्राणियों को भी खासी रास आने लगी है। इसमें मॉनिटर लिजर्ड (गोह) की प्रजातियां देखी जा रही है। पीटीआर समेत जंगल से सटे इलाकों में इनकी तादाद खासी बढ़ती दिखाई दे रही है। अच्छी खबर यह है कि दुर्लभ प्रजाति की पीली गोह भी देखने को मिली है। भारत में पाई जाने वाली चार प्रजाति में से अभी तक पीटीआर में गोह की दो प्रजातियां चिह्नित की जा चुकी है।
पीटीआर का 73 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में फैले विशाल जंगल में वन्यजीवों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। वर्तमान में यहां 65 से अधिक बाघ मौजूद हैं। बाघों की संख्या के मामले में पीटीआर गत वर्ष अंतरराष्ट्रीय ग्लोबल अवार्ड भी जीत चुका है। इधर अब पीटीआर की आबोहवा सरीसृप वर्ग के जीवों को भी अपनी ओर आकर्षित करने लगी है। पीटीआर में सांपों की 16 प्रजातियां चिह्नित की जा चुकी हैं। वहीं वन्यजीव संरक्षण पर काम करने वाली संस्था टरक्वाइज वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन सोसायटी (टीडब्ल्यूसीएस) के अध्यक्ष मोहम्मद अख्तर मियां के मुताबिक पीटीआर और इससे सटे इलाके में दुर्लभ प्रजाति के मॉनिटर लिजर्ड की संख्या में खासी बढ़ोतरी देखी जा रही है। यह मांसाहारी होती है। पीटीआर में इसकी सर्वाधिक संख्या दियोरिया रेंज, हरीपुर रेंज का दक्षिण-पश्चिम भाग, पीटीआर में शामिल हुआ खुटार वन क्षेत्र और शारदा सागर डैम के उत्तरी किनारे पर पाई जाती है। विशालकाय छिपकली के रूप में दिखने वाले मॉनिटर लिजर्ड लगभग सभी प्रकार की जलवायु में पाई जाती है। खास बात यह है कि यह भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की उस श्रेणी में शामिल है जिसमें शेर, बाघ शामिल हैं। इसे मारने पर कड़ी सजा का प्रावधान है। लोग इसे बेहद जहरीला मानते हुए अमूमन इसे मार देते हैं जबकि हकीकत यह है कि यह बिल्कुल भी जहरीली नहीं होती है।
ये प्रजातियां पाई जाती हैं
भारत में डेजर्ड, वाटर, लार्ज बंगाल और पीला गोह पाया जाता है। इनमें से पीटीआर और इससे सटे इलाके में दो प्रजातियां चिह्नित की जा चुकी है। टीडब्ल्यूसीएस के मुताबिक इसमें एक आमतौर पर दिखने वाली लार्ज बंगाल मॉनिटर लिजर्ड हैं। इसे स्थानीय स्तर पर लोग गोह के नाम से जानते हैं, जबकि दूसरी यॅलो मॉनिटर लिजर्ड शामिल है। पीला गोह को स्थानीय स्तर पर विष खोपरा के नाम से जाना जाता है। यह दोनों प्रजातियां अकसर कम घने वन क्षेत्रों और झाड़ीयुक्त ऊंचाई वाले स्थानों पर रहती हैं। कई बार यह घरों और खेतों में देखी जाती है।
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सर्वाधिक मौतें सड़क हादसों में
टीडब्ल्यूसीएस के मुताबिक मॉनिटर लिजर्ड का वर्तमान में प्रजननकाल चल रहा है और इनके द्वारा अंडे दिए जा रहे हैं। पिछले कुछ सालों से इनकी सर्वाधिक मौतें वाहनों से कुचलकर हो रही है। इसकी वजह यह है कि यह धीमी गति से सड़क को पार करती है।
बेहद शांत स्वभाव की होती है मॉनीटर लिजर्ड
मॉनिटर लिजर्ड की दो प्रजातियां अभी तक चिह्नित की गई है। शेड्यूल वन का प्राणी होने के पश्चात भी लोगों में इसके प्रति जागरूकता नाममात्र को नहीं है। मैंने अध्ययन के दौरान पाया कि यह बेहद शात स्वभाव का प्राणी है। - मोहम्मद अख्तर मियां, अध्यक्ष, टरक्वाइज वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन सोसायटी
पीटीआर की जैव विविधता और बेहतर जलवायु के कारण यहां अधिकांश वर्गों के वन्यप्राणी पाए जाते हैं। मॉनीटर लिजर्ड की भी खासी संख्या है। शेड्यूल वन का प्राणी होने के चलते इस पर निगाह रखी जाती है, मगर अलग से संरक्षण से कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। - नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, पीलीभीत टाइगर रिजर्व
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पीटीआर का 73 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में फैले विशाल जंगल में वन्यजीवों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। वर्तमान में यहां 65 से अधिक बाघ मौजूद हैं। बाघों की संख्या के मामले में पीटीआर गत वर्ष अंतरराष्ट्रीय ग्लोबल अवार्ड भी जीत चुका है। इधर अब पीटीआर की आबोहवा सरीसृप वर्ग के जीवों को भी अपनी ओर आकर्षित करने लगी है। पीटीआर में सांपों की 16 प्रजातियां चिह्नित की जा चुकी हैं। वहीं वन्यजीव संरक्षण पर काम करने वाली संस्था टरक्वाइज वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन सोसायटी (टीडब्ल्यूसीएस) के अध्यक्ष मोहम्मद अख्तर मियां के मुताबिक पीटीआर और इससे सटे इलाके में दुर्लभ प्रजाति के मॉनिटर लिजर्ड की संख्या में खासी बढ़ोतरी देखी जा रही है। यह मांसाहारी होती है। पीटीआर में इसकी सर्वाधिक संख्या दियोरिया रेंज, हरीपुर रेंज का दक्षिण-पश्चिम भाग, पीटीआर में शामिल हुआ खुटार वन क्षेत्र और शारदा सागर डैम के उत्तरी किनारे पर पाई जाती है। विशालकाय छिपकली के रूप में दिखने वाले मॉनिटर लिजर्ड लगभग सभी प्रकार की जलवायु में पाई जाती है। खास बात यह है कि यह भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की उस श्रेणी में शामिल है जिसमें शेर, बाघ शामिल हैं। इसे मारने पर कड़ी सजा का प्रावधान है। लोग इसे बेहद जहरीला मानते हुए अमूमन इसे मार देते हैं जबकि हकीकत यह है कि यह बिल्कुल भी जहरीली नहीं होती है।
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ये प्रजातियां पाई जाती हैं
भारत में डेजर्ड, वाटर, लार्ज बंगाल और पीला गोह पाया जाता है। इनमें से पीटीआर और इससे सटे इलाके में दो प्रजातियां चिह्नित की जा चुकी है। टीडब्ल्यूसीएस के मुताबिक इसमें एक आमतौर पर दिखने वाली लार्ज बंगाल मॉनिटर लिजर्ड हैं। इसे स्थानीय स्तर पर लोग गोह के नाम से जानते हैं, जबकि दूसरी यॅलो मॉनिटर लिजर्ड शामिल है। पीला गोह को स्थानीय स्तर पर विष खोपरा के नाम से जाना जाता है। यह दोनों प्रजातियां अकसर कम घने वन क्षेत्रों और झाड़ीयुक्त ऊंचाई वाले स्थानों पर रहती हैं। कई बार यह घरों और खेतों में देखी जाती है।
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सर्वाधिक मौतें सड़क हादसों में
टीडब्ल्यूसीएस के मुताबिक मॉनिटर लिजर्ड का वर्तमान में प्रजननकाल चल रहा है और इनके द्वारा अंडे दिए जा रहे हैं। पिछले कुछ सालों से इनकी सर्वाधिक मौतें वाहनों से कुचलकर हो रही है। इसकी वजह यह है कि यह धीमी गति से सड़क को पार करती है।
बेहद शांत स्वभाव की होती है मॉनीटर लिजर्ड
मॉनिटर लिजर्ड की दो प्रजातियां अभी तक चिह्नित की गई है। शेड्यूल वन का प्राणी होने के पश्चात भी लोगों में इसके प्रति जागरूकता नाममात्र को नहीं है। मैंने अध्ययन के दौरान पाया कि यह बेहद शात स्वभाव का प्राणी है। - मोहम्मद अख्तर मियां, अध्यक्ष, टरक्वाइज वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन सोसायटी
पीटीआर की जैव विविधता और बेहतर जलवायु के कारण यहां अधिकांश वर्गों के वन्यप्राणी पाए जाते हैं। मॉनीटर लिजर्ड की भी खासी संख्या है। शेड्यूल वन का प्राणी होने के चलते इस पर निगाह रखी जाती है, मगर अलग से संरक्षण से कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। - नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, पीलीभीत टाइगर रिजर्व