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योगी जी ! यहां तो ढाई गुना दाम पर कोरोना किट खरीदने की फाइल ही दब गई
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पीलीभीत। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने हाल ही में कोरोना किट घोटाले के संबंध में जांच के लिए सीबीआई को पत्र लिखा था। उसके बाद शासन से दो जनपदों में डीपीआरओ को कोरोना किट खरीद अनियमितताओं में निलंबित किया जा चुका है। सीबीआई को पत्र लिखने के बाद कोरोना किट घपले पर घमासान मचा है। पीलीभीत में भी एक बड़े अफसर के लिखित आदेश पर कोरोना किट लखनऊ की एक निजी फर्म से 47.21 लाख रुपये में खरीदी गई थी। ग्राम पंचायतों को 2800 रुपये वाली किट 6558 रुपये में दी गई। किट खरीद में लाखों रुपये का गोलमाल किया गया। अफसर और कर्मचारी कोरोना किट खरीद की घपले वाली फाइल ही दबा गए।
कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ की पहल पर सभी जिले में ये किटें खरीदी गईं। पीलीभीत में सभी 721 ग्राम पंचायतों में थर्मल स्कैनर, पल्स ऑक्सीमीटर और इंफ्रारेड थर्मामीटर युक्त कोरोना किट खरीदने के निर्देश जारी किए थे। यह कोरोना किट प्रत्येक ग्राम पंचायत को अपने स्तर से 2800 रुपये की लागत से खरीदनी थी। मगर, उस समय प्रशासन के एक बड़े अफसर ने अपने लिखित आदेश पर लखनऊ की एक निजी फर्म के जरिये कोरोना किट 2800 रुपये की जगह 6558 रुपये की खरीदी। कोरोना किट खरीद का वह पत्र भी उस अफसर ने अपने हस्ताक्षर से जारी किया था। तमाम ग्राम पंचायतों में कोरोना किट पहुंची भी नहीं। जहां पहुंची, उन ग्राम पंचायतों को दो से ढाई गुने रेट पर किट के दाम चुकाने पड़े।
अब तक तमाम ग्राम पंचायतों में निगरानी समितियों को वह किट अब तक नहीं मिल पाई। कोरोना किट के इस घपले में तत्कालीन प्रशासन से लेकर शासन तक के अफसर-कर्मचारी शामिल थे। ग्राम पंचायत सचिवों को सीधे किट खरीद के भुगतान के लिए 6558 रुपये के बिल थमा दिए गए। फिर उन पर भुगतान का दबाव डाला जाने लगा। अब तक किन ग्राम पंचायतों ने कोरोना किट का कितना भुगतान किया, किन ग्राम पंचायतों ने नहीं, इसका विवरण अब तक उपलब्ध नहीं कराया गया। नए डीएम के आने के बाद कोरोना किट खरीद से जुड़े अफसर-कर्मचारी वह फाइल दबाने पर जोर दे रहे हैं। हालांकि गाजीपुर समेत दो जनपदों में गड़बड़ी मिलने पर शासन स्तर से हुई कार्रवाई के बाद कोरोना किट घपले मामले में खलबली मच गई है। नवागत डीएम ने भी इसे लेकर जांच कराने के निर्देश दिए हैं। अगर गहनता से जांच की गई तो इस घपले में कई बड़े अफसरों की गर्दन भी फंसना तय है।
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बिना टेंडर हुई थी फर्म से 47.21 लाख के उपकरणों की खरीद
चिकित्सा उपकरणों की खरीद राज्य वित्त और केंद्रीय वित्त आयोग की धनराशि से खरीदकर उन्हें निगरानी समिति को सौंपा जाना था। मगर, जनपद में बड़े अफसरों के संरक्षण में कोरोना किट खरीद में गड़बड़ी की गई थी। इसलिए चिकित्सा उपकरण आनन फानन में ब्लॉकों के माध्यम से ग्राम पंचायतों में सप्लाई करवा दिए गए। ग्राम पंचायतों को लखनऊ की फर्म को भुगतान कराने के लिए 6558 रुपये का बिल और एक बैंक खाता नंबर थमा दिया गया। सभी ग्राम पंचायतों में एक ही कंपनी द्वारा कोरोना किट की सप्लाई की गई थी। 47.21 लाख रुपये के चिकित्सीय उपकरण खरीद की कोई टेंडर प्रक्रिया तक नहीं अपनाई गई। अपर मुख्य सचिव पंचायती राज मनोज कुमार सिंह ने थर्मल स्कैनर और पल्स ऑक्सीमीटर के दाम जब 2800 रुपये निर्धारित होना बताया तो पंचायत राज विभाग में खलबली मची। मगर, उस समय बड़े अफसरों की शह पर मामला दबा दिया गया। अब पूरे प्रदेश में कोरोना किटों के खरीद की प्रक्रिया की जांच चल रही है। गाजीपुर समेत दो जनपदों के पंचायत राज अधिकारियों पर कार्रवाई भी हो चुकी है। मगर, पीलीभीत में लाखों रुपये की कोरोना किट खरीद के घपले पर संबंधित अफसर और कर्मचारी परदा डाले हुए हैं।
डीपीआरओ बोले..पंचायतों से मांगी है रिपोर्ट
पल्स ऑक्सीमीटर और थर्मल स्कैनर की खरीद ग्राम पंचायत स्तर पर हुई थी। किस ग्राम पंचायत में किट खरीद में कितने रुपये का पेमेंट किया गया, इसका डाटा मांगा गया है। विस्तृत ब्योरा मिलने के बाद अगर गड़बड़ी निकली तो कार्रवाई कराएंगे। - राजकुमार, डीपीआरओ
डीएम बोले..पता लगाकर कराएंगे कार्रवाई
जिलाधिकारी पुलकित खरे का कहना है कि कोराना किट की खरीद पूरे प्रदेश में ग्राम पंचायत स्तर पर की गई। उसी तरह से यहां पर भी किट की खरीद कराई गई होगी। अगर ढाई गुने रेट पर कोरोना किट की खरीद हुई है तो उसकी अभी जानकारी नहीं मिली है। पूरे मामले का पता लगाकर दोषियों पर कार्रवाई कराई जाएगी।
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कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ की पहल पर सभी जिले में ये किटें खरीदी गईं। पीलीभीत में सभी 721 ग्राम पंचायतों में थर्मल स्कैनर, पल्स ऑक्सीमीटर और इंफ्रारेड थर्मामीटर युक्त कोरोना किट खरीदने के निर्देश जारी किए थे। यह कोरोना किट प्रत्येक ग्राम पंचायत को अपने स्तर से 2800 रुपये की लागत से खरीदनी थी। मगर, उस समय प्रशासन के एक बड़े अफसर ने अपने लिखित आदेश पर लखनऊ की एक निजी फर्म के जरिये कोरोना किट 2800 रुपये की जगह 6558 रुपये की खरीदी। कोरोना किट खरीद का वह पत्र भी उस अफसर ने अपने हस्ताक्षर से जारी किया था। तमाम ग्राम पंचायतों में कोरोना किट पहुंची भी नहीं। जहां पहुंची, उन ग्राम पंचायतों को दो से ढाई गुने रेट पर किट के दाम चुकाने पड़े।
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अब तक तमाम ग्राम पंचायतों में निगरानी समितियों को वह किट अब तक नहीं मिल पाई। कोरोना किट के इस घपले में तत्कालीन प्रशासन से लेकर शासन तक के अफसर-कर्मचारी शामिल थे। ग्राम पंचायत सचिवों को सीधे किट खरीद के भुगतान के लिए 6558 रुपये के बिल थमा दिए गए। फिर उन पर भुगतान का दबाव डाला जाने लगा। अब तक किन ग्राम पंचायतों ने कोरोना किट का कितना भुगतान किया, किन ग्राम पंचायतों ने नहीं, इसका विवरण अब तक उपलब्ध नहीं कराया गया। नए डीएम के आने के बाद कोरोना किट खरीद से जुड़े अफसर-कर्मचारी वह फाइल दबाने पर जोर दे रहे हैं। हालांकि गाजीपुर समेत दो जनपदों में गड़बड़ी मिलने पर शासन स्तर से हुई कार्रवाई के बाद कोरोना किट घपले मामले में खलबली मच गई है। नवागत डीएम ने भी इसे लेकर जांच कराने के निर्देश दिए हैं। अगर गहनता से जांच की गई तो इस घपले में कई बड़े अफसरों की गर्दन भी फंसना तय है।
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बिना टेंडर हुई थी फर्म से 47.21 लाख के उपकरणों की खरीद
चिकित्सा उपकरणों की खरीद राज्य वित्त और केंद्रीय वित्त आयोग की धनराशि से खरीदकर उन्हें निगरानी समिति को सौंपा जाना था। मगर, जनपद में बड़े अफसरों के संरक्षण में कोरोना किट खरीद में गड़बड़ी की गई थी। इसलिए चिकित्सा उपकरण आनन फानन में ब्लॉकों के माध्यम से ग्राम पंचायतों में सप्लाई करवा दिए गए। ग्राम पंचायतों को लखनऊ की फर्म को भुगतान कराने के लिए 6558 रुपये का बिल और एक बैंक खाता नंबर थमा दिया गया। सभी ग्राम पंचायतों में एक ही कंपनी द्वारा कोरोना किट की सप्लाई की गई थी। 47.21 लाख रुपये के चिकित्सीय उपकरण खरीद की कोई टेंडर प्रक्रिया तक नहीं अपनाई गई। अपर मुख्य सचिव पंचायती राज मनोज कुमार सिंह ने थर्मल स्कैनर और पल्स ऑक्सीमीटर के दाम जब 2800 रुपये निर्धारित होना बताया तो पंचायत राज विभाग में खलबली मची। मगर, उस समय बड़े अफसरों की शह पर मामला दबा दिया गया। अब पूरे प्रदेश में कोरोना किटों के खरीद की प्रक्रिया की जांच चल रही है। गाजीपुर समेत दो जनपदों के पंचायत राज अधिकारियों पर कार्रवाई भी हो चुकी है। मगर, पीलीभीत में लाखों रुपये की कोरोना किट खरीद के घपले पर संबंधित अफसर और कर्मचारी परदा डाले हुए हैं।
डीपीआरओ बोले..पंचायतों से मांगी है रिपोर्ट
पल्स ऑक्सीमीटर और थर्मल स्कैनर की खरीद ग्राम पंचायत स्तर पर हुई थी। किस ग्राम पंचायत में किट खरीद में कितने रुपये का पेमेंट किया गया, इसका डाटा मांगा गया है। विस्तृत ब्योरा मिलने के बाद अगर गड़बड़ी निकली तो कार्रवाई कराएंगे। - राजकुमार, डीपीआरओ
डीएम बोले..पता लगाकर कराएंगे कार्रवाई
जिलाधिकारी पुलकित खरे का कहना है कि कोराना किट की खरीद पूरे प्रदेश में ग्राम पंचायत स्तर पर की गई। उसी तरह से यहां पर भी किट की खरीद कराई गई होगी। अगर ढाई गुने रेट पर कोरोना किट की खरीद हुई है तो उसकी अभी जानकारी नहीं मिली है। पूरे मामले का पता लगाकर दोषियों पर कार्रवाई कराई जाएगी।