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शरीयत में सियासत बर्दाश्त नहीं: अमीन मियां

Mon, 31 Oct 2016 11:01 PM IST
ब्यूरो /पीलीभीत
ब्यूरो /पीलीभीत Updated Mon, 31 Oct 2016 11:01 PM IST
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Political tolerance in Sharia: Ameen Mian
शरीयत में सियासत बर्दाश्त नहीं: अमीन मियां - फोटो : पीलीभ्‍ाीत/उत्‍ततर प्रदेश्‍ा
दरगाहे आलिया बरकातिया मारहरा शरीफ के सज्जादा नशीन हुजूर अमीने मिल्लत अल्लामा डॉ.शाह मोहम्मद अमीन मियां कादरी बरकाती ने कहा कि शरीयत में सियासत को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर शरीयत की हिफाजत के लिए जान तक की बाजी लगा दी जाएगी। वह यहां मोहल्ला हिदायतनगर स्थित सर चश्म-ए-हिदायत अल-जामे अतुल रजविया मदीनतुल इस्लाम में आयोजित ऑल इंडिया हुजूर मुफ्ती आजमे हिंद कांफ्रेंस व जश्ने दस्तारे फजीलत, उर्से आला हजरत, उर्से शमसुल फ्यूज हाजी मोहम्मद हिदायत रसूल, व उर्से मुहद्दिसे पीलीभीत मुफ्ती करामत रसूल के मौके पर आयोजित विशाल जलसे को संबोधित कर रहे थे। 
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कारी अमानत रसूल की सदारत में हुए इस जलसे को खिताब करते हुए उन्होंने कहा कि इस्लाम दहशतगर्दी की शिक्षा नहीं देता। बल्कि कुरआन कहता है कि अगर किसी ने बेगुनाह इंसान का कत्ल किया तो कुरान की नजर में उसने दुनिया के तमाम लोगों (इंसानियत) का कत्ल किया। आईएसआई, और जैसे मोहम्मद समेत कई आतंकी संगठनों का नाम लेते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे आतंकी संगठनों के लोगों का इस्लाम से कोई वास्ता नहीं है। दहशतगर्दों का कोई धर्म और मजहब नहीं होता। दहशतगर्द कभी मुसलमान नहीं हो सकता। इन संगठनों की जितनी निंदा की जाए कम है। उन्होंने कहा कि दीन में जबरदस्ती नहीं है। तलवार की बुनियाद पर किसी को इस्लाम कबूल करने पर मजबूर करना नाजायज है।
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मौलाना कारी अमानत रसूल ने तलाक के मुद्दे पर देश के सियासी हालातों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस्लाम में शुरू से ही औरतों को बराबरी का दर्जा दिया गया है।  इस्लाम ही एक ऐसा मजहब है जिसने पिता की प्रापर्टी में लड़की का हक रखा है। इस्लाम ही ऐसा मजहब है जिसने महर की शक्ल में औरत को मुकम्मल मालिक बनाया है। उन्होंने तलाक के मुद्दे पर चल रही सियासत व उसे तूल देने वाले मीडिया के लोगों की भी मंच से निंदा की।
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इसके अलावा अल्लामा मुफ्ती इमरान हंफी मुरादाबादी, अल्लामा हसन रजा पटना, मौ. सय्यद बलागत रसूल मुंबई, मौलाना नसीम मिस्वाही, मौलाना जाकिर हुसैन नईमी, सईद अख्तर भोजपुरी, मौ. मुकीमुर्रहमान नूरी, कारी गुलाम नबी रामपुरी, डा. जीशान अमानती कासगंज, अजीन अमानती बहेड़वी, शाहिद रजा पीलीभीती, नदीम रजा लखीमपुर खीरी, हामिद अमानती, हस्सान रजा, मजहर इलाहाबादी ने अपने खुतबात व नगमात पेश करते हुए दीनी व दुनियाबी तालीम हासिल करने पर जोर दिया। सभी ने तालीमाते आला हजरत पर पाबंदी के साथ जिंदगी गुजारने की ताकीद भी की। रात नौ बजे शुरू हुई कांफ्रेंस सुबह पांच बजे तक चली। सलातो सलाम के बाद कांफ्रेंस व जामिया मदीनतुल इस्लाम हिदायत नगर के सदर खलीफा-ए-हुजूर मुफ्ती-ए-आजमे हिंद अल्लामा कारी मोहम्मद अमानत रसूल कादरी बरकाती रजवी ने मुल्को मिल्लत में अमनो अमान की दुआ की। कांफ्रेंस में भारी संख्या में दूर दराज से आए जायरीन मौजूद रहे।


तबर्रुक की कराई जियारत
कांफ्रेंस के अंत में हुजूर सल्लाहु अलैहि वसल्लम व इमामे हसन-हुसैन, हुजूर गौसे पाक के मुबारिक तबर्रुकात (दाढ़ी के बाल, छड़ी आदि) की जियारत कराई गई।
अमानत रसूल को दिया मुफ्ती-ए-आजमे हिंद अवार्ड
कांफ्रेंस में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे दरगाहे आलिया बरकातिया मारहरा शरीफ के सज्जादा नशीन डा. सैय्यद शाह मोहम्मद अमीन मियां कादरी बरकाती ने कांफ्रेंस की सदारत कर रहे मौलाना कारी अमानत रसूल द्वारा लिखी किताब 15 वीं सदी का मुजब्बिर की खुले कंठ से सराहना की। उन्होंने बताया कि इस किताब में शहजादे आला हजरत हुजूर मुफ्ती-ए-आजमे हिंद को 15 वीं सदी का मुजब्बिर बताया गया है। जिसकी तस्दीक 10 मुल्कों के 500 उलमाओं ने फरमाई है। इस पुस्तक के लिए अमीन मियां ने मौलाना कारी अमानत रसूल को मुफ्ती-ए-आजमे हिंद अवार्ड से नवाजते हुए उन्हें 66 तोला चांदी से बना हुआ गुंबदे रजा पेश किया।
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