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ट्रैफिक नियमों का पालन कराने में पुलिस नाकाम
वैभव शुक्ला पीलीभीत।
Updated Tue, 04 Oct 2016 11:25 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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डीजीपी ने स्वीकारा जिला स्तर पर लगाया जा रहा निर्देशों को पलीता
मासिक अभियान में दिया सुधार का मौका, लापरवाही अब भी जारी
सड़क हादसों में मौतों का ग्राफ लगातार बढ़ने से साफ है कि यातायात नियमों का पालन नहीं हो रहा है। डीजीपी भी यह स्वीकार कर चुके हैं कि शासन स्तर से की जा रही कवायद को जिला स्तर पर पलीता लगाया जा रहा है। उन्होंने माना है कि जिले के अफसर ट्रैफिक नियमों का पालन कराने में लापरवाही बरत रहे हैं। नतीजतन हादसों की संख्या में कमी नहीं हो पा रही है। मासिक अभियान चलाकर अक्तूबर में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन तीन दिन बीतने के बाद भी उसका असर सड़कों पर नहीं दिखाई दे रहा है। डीजीपी का ये फरमान भी जिले के अधिकारियों की लापरवाही की भेंट चढ़ता दिखाई दे रहा है।
वैसे तो जिले की यातायात व्यवस्था की हालत किसी से छिपी नहीं है। नियमों का पालन कराने में पुलिस महकमा किस कदर पस्त है, इसकी हकीकत सड़कों पर यमदूत बनकर दौड़ रहे वाहनों को देखकर लगाया जा सकता है। खास बात यह है कि इसके सुधार के लिए जिले के अफसर हरसंभव प्रयास करने के दावे करते है। जबकि खुद डीजीपी इससे इत्तेफाक नहीं रखते। पुलिस अधीक्षक को भेजे पत्र में डीजीपी जावीद अहमद ने स्वीकार किया है कि जिला स्तर पर कोई प्रभावी कदम हादसों को रोकने के लिए नहीं उठाए गए। यही कारण है कि हादसों में मरने वालों का आंकड़ा उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक है। सुधार के लिए एक अक्तूबर से मासिक अभियान चलाकर ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करने वालों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इस पर अधिकारी कार्रवाई कराने की बात तो कर रहे है, लेकिन सिर्फ अभिलेख दुरुस्त कर वाहवाही लूटने का प्रयास किया जा रहा है। सड़कों पर हालात बदतर बने हुए है।
इन नियमों की अनदेखी पर सख्ती के दिए निर्देश
डीजीपी जावीद अहमद की ओर से भेजे गए पत्र में मुख्य रूप से 11 ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें रॉंग साइड वाहन चलाना, हेलमेट की अनदेखी, तेज गति से वाहन चलाना, बिना ड्राइविंग लाइसेंस वाहन चलाना, चार पहिया वाहनों में सीट वैल्ट का प्रयोग न करना, नशे में वाहन चलाना, बिना बीमा के वाहन चलाना, वाहन पर नंबर प्लेट न होना, वाहन चलाते वक्त मोबाइल का प्रयोग करना, दुपहिया वाहन पर ट्रिपल राइडिंग करने वालों पर सख्ती के निर्देश दिए हैं।
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मॉनीटरिंग से दूरी बनाते हैं अफसर
जिले की बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था के पीछे एक अहम कारण अफसरों की अनदेखी भी है। ट्रैफिक पुलिस के पास स्टाफ की कमी है। न तो स्टाफ की कमी को दूर करने के प्रयास किए गए और न ही कभी पुलिस की ओर से की जा रही कार्रवाई की मॉनीटरिंग की गई। सिर्फ दफ्तरों में बैठकर ही अधिकारियों ने ट्रैफिक सुधार के लिए किए गए प्रयासों को अमलीजामा पहना दिया। मुख्य चौराहों पर भी पुलिस की मौजूदगी नहीं दिखाई दी।
बयानबाजी में सिमट कर रह गए अभियान
ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन को लेकर स्कूली बच्चों की चेकिंग के लिए पिछले दिनों काफी जोरशोर दिखाकर अभियान चलाने की बात कही गई। प्रेस विज्ञप्ति जारी कर ट्रैफिक पुलिस ने इसका प्रचार भी करा दिया, लेकिन आज तक न तो स्कूली बच्चों को चेक किया गया, न ही वाहनों को। स्कूली बच्चों को नियमों की सीख देने के लिए चलाया जाने वाला अभियान अफसरों की बयानबाजी में ही सिमट गया।
डीजीपी का पत्र प्राप्त हुआ है। इसके आधार पर मासिक अभियान की शुरूआत की गई है। ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। अभियान में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
निर्मल बिष्ट, सीओ ट्रैफिक
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मासिक अभियान में दिया सुधार का मौका, लापरवाही अब भी जारी
सड़क हादसों में मौतों का ग्राफ लगातार बढ़ने से साफ है कि यातायात नियमों का पालन नहीं हो रहा है। डीजीपी भी यह स्वीकार कर चुके हैं कि शासन स्तर से की जा रही कवायद को जिला स्तर पर पलीता लगाया जा रहा है। उन्होंने माना है कि जिले के अफसर ट्रैफिक नियमों का पालन कराने में लापरवाही बरत रहे हैं। नतीजतन हादसों की संख्या में कमी नहीं हो पा रही है। मासिक अभियान चलाकर अक्तूबर में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन तीन दिन बीतने के बाद भी उसका असर सड़कों पर नहीं दिखाई दे रहा है। डीजीपी का ये फरमान भी जिले के अधिकारियों की लापरवाही की भेंट चढ़ता दिखाई दे रहा है।
वैसे तो जिले की यातायात व्यवस्था की हालत किसी से छिपी नहीं है। नियमों का पालन कराने में पुलिस महकमा किस कदर पस्त है, इसकी हकीकत सड़कों पर यमदूत बनकर दौड़ रहे वाहनों को देखकर लगाया जा सकता है। खास बात यह है कि इसके सुधार के लिए जिले के अफसर हरसंभव प्रयास करने के दावे करते है। जबकि खुद डीजीपी इससे इत्तेफाक नहीं रखते। पुलिस अधीक्षक को भेजे पत्र में डीजीपी जावीद अहमद ने स्वीकार किया है कि जिला स्तर पर कोई प्रभावी कदम हादसों को रोकने के लिए नहीं उठाए गए। यही कारण है कि हादसों में मरने वालों का आंकड़ा उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक है। सुधार के लिए एक अक्तूबर से मासिक अभियान चलाकर ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करने वालों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इस पर अधिकारी कार्रवाई कराने की बात तो कर रहे है, लेकिन सिर्फ अभिलेख दुरुस्त कर वाहवाही लूटने का प्रयास किया जा रहा है। सड़कों पर हालात बदतर बने हुए है।
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इन नियमों की अनदेखी पर सख्ती के दिए निर्देश
डीजीपी जावीद अहमद की ओर से भेजे गए पत्र में मुख्य रूप से 11 ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें रॉंग साइड वाहन चलाना, हेलमेट की अनदेखी, तेज गति से वाहन चलाना, बिना ड्राइविंग लाइसेंस वाहन चलाना, चार पहिया वाहनों में सीट वैल्ट का प्रयोग न करना, नशे में वाहन चलाना, बिना बीमा के वाहन चलाना, वाहन पर नंबर प्लेट न होना, वाहन चलाते वक्त मोबाइल का प्रयोग करना, दुपहिया वाहन पर ट्रिपल राइडिंग करने वालों पर सख्ती के निर्देश दिए हैं।
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मॉनीटरिंग से दूरी बनाते हैं अफसर
जिले की बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था के पीछे एक अहम कारण अफसरों की अनदेखी भी है। ट्रैफिक पुलिस के पास स्टाफ की कमी है। न तो स्टाफ की कमी को दूर करने के प्रयास किए गए और न ही कभी पुलिस की ओर से की जा रही कार्रवाई की मॉनीटरिंग की गई। सिर्फ दफ्तरों में बैठकर ही अधिकारियों ने ट्रैफिक सुधार के लिए किए गए प्रयासों को अमलीजामा पहना दिया। मुख्य चौराहों पर भी पुलिस की मौजूदगी नहीं दिखाई दी।
बयानबाजी में सिमट कर रह गए अभियान
ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन को लेकर स्कूली बच्चों की चेकिंग के लिए पिछले दिनों काफी जोरशोर दिखाकर अभियान चलाने की बात कही गई। प्रेस विज्ञप्ति जारी कर ट्रैफिक पुलिस ने इसका प्रचार भी करा दिया, लेकिन आज तक न तो स्कूली बच्चों को चेक किया गया, न ही वाहनों को। स्कूली बच्चों को नियमों की सीख देने के लिए चलाया जाने वाला अभियान अफसरों की बयानबाजी में ही सिमट गया।
डीजीपी का पत्र प्राप्त हुआ है। इसके आधार पर मासिक अभियान की शुरूआत की गई है। ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। अभियान में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
निर्मल बिष्ट, सीओ ट्रैफिक