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पीलीभीत पुलिस ने दरोगा के लिए जुटाए दो लाख
पीलीभीत।
Updated Tue, 17 Mar 2015 11:53 PM IST
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इलाहाबाद में वकील की गोली मारकर हत्या के आरोपी दरोगा शैलेंद्र सिंह के परिवार की आर्थिक मदद करने में पीलीभीत पुलिस ने भी हाथ आगे बढ़ाया है। जिले की पुलिस ने आपसी चंदा कर अब तक करीब दो लाख रुपये जुटाए हैं।
11 मार्च को इलाहाबाद जिला कचहरी में नाराबारी चौकी इंचार्ज दरोगा शैलेंद्र सिंह ने वकीलों की पिटाई से बचने के लिए अपने सर्विस रिवाल्वर से गोली चला दी थी। इससे अधिवक्ता नबी अहमद की गोली लगने से मौत हो गई थी। बवाल के दौरान गोली लगने से एक सिपाही भी घायल हो गया था।
दरोगा और घायल सिपाही की आर्थिक मदद के लिए जिले की पुलिस ने भी हाथ आगे बढ़ाए हैं। सूत्रों के मुताबिक मदद के लिए सिपाही से लेकर दरोगा और इंस्पेक्टरों ने चंदा देने में बढ़ चढ़कर भागीदारी की है। जिले में पुलिस वाले अब तक दो लाख रुपये चंदा के रूप में जुटा चुके हैं।
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एकत्र हुई धनराशि एक देहात सर्किल के थानेदार के पास है। थानेदार का दावा है कि एकत्र धनराशि इसी हफ्ते सिपाही और दरोगा के घर वालों को भेजा जाएगा। किसके खाते में कितनी रकम भेजी जाएगी। इस पर शीघ्र ही आपसी सहमति बनाई जाएगी।
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चंदा वसूली का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। यदि वह स्वेच्छा से चंदा एकत्र कर रहें हैं तो अधिकारी इसमें कर भी क्या सकते हैं?
- सुधीर कुमार सिंह, एएसपी
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11 मार्च को इलाहाबाद जिला कचहरी में नाराबारी चौकी इंचार्ज दरोगा शैलेंद्र सिंह ने वकीलों की पिटाई से बचने के लिए अपने सर्विस रिवाल्वर से गोली चला दी थी। इससे अधिवक्ता नबी अहमद की गोली लगने से मौत हो गई थी। बवाल के दौरान गोली लगने से एक सिपाही भी घायल हो गया था।
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दरोगा और घायल सिपाही की आर्थिक मदद के लिए जिले की पुलिस ने भी हाथ आगे बढ़ाए हैं। सूत्रों के मुताबिक मदद के लिए सिपाही से लेकर दरोगा और इंस्पेक्टरों ने चंदा देने में बढ़ चढ़कर भागीदारी की है। जिले में पुलिस वाले अब तक दो लाख रुपये चंदा के रूप में जुटा चुके हैं।
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एकत्र हुई धनराशि एक देहात सर्किल के थानेदार के पास है। थानेदार का दावा है कि एकत्र धनराशि इसी हफ्ते सिपाही और दरोगा के घर वालों को भेजा जाएगा। किसके खाते में कितनी रकम भेजी जाएगी। इस पर शीघ्र ही आपसी सहमति बनाई जाएगी।
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चंदा वसूली का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। यदि वह स्वेच्छा से चंदा एकत्र कर रहें हैं तो अधिकारी इसमें कर भी क्या सकते हैं?
- सुधीर कुमार सिंह, एएसपी