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Pilibhit Tiger: जोखिम भरा कौतूहल... नजदीक से देखने की लालसा में जिंदगी दांव पर; 10-15 मीटर की दूरी से सेल्फी
Wed, 27 Dec 2023 12:32 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, पीलीभीत
अमर उजाला नेटवर्क, पीलीभीत
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 27 Dec 2023 12:32 PM IST
सार
पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के जंगल में बाघों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक- 71 से अधिक बाघ जंगल में मौजूद हैं। चर्चा है कि पीटीआर में करीब 100 बाघ हैं। बढ़ती संख्या के चलते बाघों के लिए जंगल का दायरा कम पड़ने लगा है, जिस कारण बाघ जंगल से बाहर निकल रहे हैं।
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Pilibhit Tiger
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पीलीभीत जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर अटकोना गांव मंगलवार को प्रदेश में एकाएक सुर्खियों में आ गया। वजह थी बाघिन, जो गांव में आधी रात को घुस आई थी। गांव में दीवार पर बैठी बाघिन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं। बाघिन को नजदीक से देखने के लिए लोगों ने जिंदगी तक दांव पर लगा दी।
लोग बाघिन से महज 10-15 मीटर की दूरी पर सेल्फी ले रहे थे और वीडियो बना रहे थे। अटकोना गांव में मंगलवार सुबह किसी मेले जैसा माहौल नजर आया। गांव के बाहर की तरफ सुखविंदर सिंह के झाले में बाघिन घंटों दीवार पर बैठी रही। उसे देखने के लिए आसपास के गांव के लोग भी आ गए।
इतना ही नहीं चूका घूमने आए लोग जंगल छोड़कर गांव में आ गए। घरों की छत व दीवार के चारों ओर ग्रामीण थे। लोग बाघिन से महज 10-15 मीटर की दूरी पर उसकी वीडियो बना रहे थे। अनुमान के मुताबिक, करीब दो-ढाई हजार लोग मौके पर मौजूद थे।
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माहौल किसी मेले जैसा हो गया था। अगर बाघिन आक्रामक हो जाती तो निश्चित ही कोई बड़ी घटना हो जाती। लोग बाघिन के इतने करीब पहुंच गए कि एक छलांग में ही उसके आगोश में आ जाते।
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लोग बाघिन से महज 10-15 मीटर की दूरी पर सेल्फी ले रहे थे और वीडियो बना रहे थे। अटकोना गांव में मंगलवार सुबह किसी मेले जैसा माहौल नजर आया। गांव के बाहर की तरफ सुखविंदर सिंह के झाले में बाघिन घंटों दीवार पर बैठी रही। उसे देखने के लिए आसपास के गांव के लोग भी आ गए।
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इतना ही नहीं चूका घूमने आए लोग जंगल छोड़कर गांव में आ गए। घरों की छत व दीवार के चारों ओर ग्रामीण थे। लोग बाघिन से महज 10-15 मीटर की दूरी पर उसकी वीडियो बना रहे थे। अनुमान के मुताबिक, करीब दो-ढाई हजार लोग मौके पर मौजूद थे।
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माहौल किसी मेले जैसा हो गया था। अगर बाघिन आक्रामक हो जाती तो निश्चित ही कोई बड़ी घटना हो जाती। लोग बाघिन के इतने करीब पहुंच गए कि एक छलांग में ही उसके आगोश में आ जाते।
भीड़ पर काबू पाने को गुरुद्वारे से कराई अपील
बाघिन को रेस्क्यू करने से पहले भीड़ को काबू करने में वन विभाग और पुलिस के पसीने छूट गए। कई बार ग्रामीणों से पुलिस की नोकझोंक हुई। एक ग्रामीण की माला रेंजर से नोकझोंक के बाद धक्का मुक्की तक की नौबत आ गई। एसओ अचल कुमार ने ग्रामीण को समझाकर अलग किया। जबरदस्त भीड़ के कारण जब रेस्क्यू में परेशानी आने लगी तो गुरुद्वारे से माइक पर लोगों से हटने की अपील की गई। इसके बाद भी भीड़ नहीं हटी तो पुलिस ने सख्ती कर खदेड़ा।
बाघिन को रेस्क्यू करने से पहले भीड़ को काबू करने में वन विभाग और पुलिस के पसीने छूट गए। कई बार ग्रामीणों से पुलिस की नोकझोंक हुई। एक ग्रामीण की माला रेंजर से नोकझोंक के बाद धक्का मुक्की तक की नौबत आ गई। एसओ अचल कुमार ने ग्रामीण को समझाकर अलग किया। जबरदस्त भीड़ के कारण जब रेस्क्यू में परेशानी आने लगी तो गुरुद्वारे से माइक पर लोगों से हटने की अपील की गई। इसके बाद भी भीड़ नहीं हटी तो पुलिस ने सख्ती कर खदेड़ा।
दो किलोमीटर तक मार्ग पर लगी वाहनों की कतार
बाघिन के घर में घुसे होने की जानकारी फैलते ही आसपास गांव के लोग भी मौके पर पहुंचने लगे। फोटो, वीडियो वायरल होने के बाद भीड़ बेकाबू होने लगी। सड़क पर दो किलोमीटर तक वाहनों की कतार लग गई। करीब तीन घंटे तक लोगों का हुजूम रहा। बाघिन की मौजूदगी वाले दोनों घरों के आसपास सैकड़ों की भीड़ जुट गई।
बाघिन के घर में घुसे होने की जानकारी फैलते ही आसपास गांव के लोग भी मौके पर पहुंचने लगे। फोटो, वीडियो वायरल होने के बाद भीड़ बेकाबू होने लगी। सड़क पर दो किलोमीटर तक वाहनों की कतार लग गई। करीब तीन घंटे तक लोगों का हुजूम रहा। बाघिन की मौजूदगी वाले दोनों घरों के आसपास सैकड़ों की भीड़ जुट गई।
सिकुड़ रहा जंगल, बाहर आ रहे बाघ पीटीआर में सौ बाघ होने की संभावना
पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के जंगल में बाघों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक- 71 से अधिक बाघ जंगल में मौजूद हैं। चर्चा है कि पीटीआर में करीब 100 बाघ हैं। बढ़ती संख्या के चलते बाघों के लिए जंगल का दायरा कम पड़ने लगा है, जिस कारण बाघ जंगल से बाहर निकल रहे हैं।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के जंगल में बाघों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक- 71 से अधिक बाघ जंगल में मौजूद हैं। चर्चा है कि पीटीआर में करीब 100 बाघ हैं। बढ़ती संख्या के चलते बाघों के लिए जंगल का दायरा कम पड़ने लगा है, जिस कारण बाघ जंगल से बाहर निकल रहे हैं।
बाघों को गन्ने के खेत काफी पसंद हैं। सर्दियों में इसलिए बाघ जंगल से बाहर निकलकर गन्ने के खेतों में बैठे रहते हैं। जंगल से सटे इलाकों में गन्ने की काफी खेती है। विशेषज्ञों की मानें तो गन्ने के खेत में रुककर बाघ को जंगल जैसा एहसास होता है। इसके अलावा कलीनगर तहसील क्षेत्र में नहरें अधिक हैं।
जिसमें छुट्टा पशु की मौजूदगी बनी रहती है। ऐसे में बाघ भी वही रुक जाता है। यहां इसे शिकार भी आसानी से मिल जाता है। जंगल में एक बाघ को तकरीबन 5 से 7 किलोमीटर एरिया में विचरण करना पसंद है। नर बाघ अपने एरिया में दूसरे बाघ को नहीं घुसने देता। ऐसे में कमजोर और छोटे बाघ जंगल से बाहर निकलकर खेतों व झाड़ियों में डेरा जमा लेते हैं।
अटकोना गांव में रात करीब एक बजे बाघिन घुस आई थी। जिसे रेस्क्यू कर पकड़ लिया गया है। वह पूरी तरह से स्वस्थ है। उसकी उम्र दो-ढाई साल के बीच है। उसे माला गेस्ट हाउस में रखा गया है। जल्द ही जंगल में छोड़ दिया जाएगा। - नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, पीटीआर