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पीलीभीत-मैलानी रूट पर आमान परिवर्तन का मामला: राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के एनओसी न देने से डेढ़ साल से रुका है ब्रॉडगेज का कार्य
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पीलीभीत। वन विभाग की लेटलतीफी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के चलते मैलानी-पीलीभीत रेल मार्ग पर ब्रॉडगेज कार्य डेढ़ साल से ठप है। हालांकि मैलानी से शाहगढ़ रेलवे स्टेशन के बीच लगभग 85 फीसदी कार्य पूरा हो चुका है, मगर शाहगढ़ से पीलीभीत के बीच डेढ़ साल से कार्य ठप पड़ा है। इसके पीछे कारण टाइगर रिजर्व के इस आठ किमी के टुकड़े में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) से एनओसी का न मिल पाना है। जुलाई में एनटीसीए (राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण) के डीआईजी भी दौरा कर चुके हैं, बावजूद इसके रेलवे को अब तक एनओसी नहीं मिल सकी है।
ऐशबाग-पीलीभीत मीटरगेज रूट पर तीन चरणों में आमान परिवर्तन का कार्य शुरू कराया गया था। इसमें पहले और दूसरे चरण यानी ऐशबाग से सीतापुर और सीतापुर से मैलानी तक का कार्य पूरा हो चुका है। तीसरे चरण में पीलीभीत-मैलानी रूट पर ब्राडगेज कार्य होने हैं। तीसरे चरण में कार्य के लिए इस रूट पर मीटरगेज की ट्रेनों का संचालन 30 मई 2018 को बंद कर दिया गया था। इसके बाद 68 किमी लंबे रुट पर ब्रॉडगेज का काम शुरू किया था।
रेल अफसरों के मुताबिक, मैलानी से शाहगढ़ रेलवे स्टेशन के बीच लगभग 85 फीसदी ब्रॉडगेज कार्य पूरा हो चुका है, मगर शाहगढ़ से पीलीभीत के बीच डेढ़ साल बीतने के बाद भी आमान परिवर्तन का कार्य ठप चल रहा है।
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एनटीसीए के डीआईजी भी कर चुके हैं दौरा
चूंकि एनओसी एनटीसीए को देनी है। टाइगर रिजर्व के आठ किमी क्षेत्र में रेल पटरी बिछाने और अंडरपास निर्माण को एनओसी दिए जाने को लेकर एनटीसीए के डीआईजी निशांत वर्मा ने भी 11 जुलाई को माला रेंज में पहुंचकर अंडरपास निर्माण वाले स्थानों की गहनता से जांच की थी। यहां टाइगर रिजर्व पांच अंडरपास की मांग कर रहा है। डीआईजी ने भी वन्यजीवों की सुरक्षा को देखते हुए अंडरपास को जरूरी बताया था। एनटीसीए के डीआईजी के दौरे के बाद माना जा रहा था कि रेलवे को जल्द ही एनओसी मिल सकेगी, मगर डीआईजी के दौरान चार माह बीत चुके हैं, मगर रेलवे को अब तक एनओसी नहीं मिल सकी है। कुल मिलाकर देखा जाए तो स्थानीय जनप्रतिनिधि भी इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। यदि जनप्रतिनिधि उच्च स्तर पर पैरवी करें तो यहां जल्द ही एनओसी मिलने के बाद काम पूरा हो सकता है।
एनओसी के संबंध में स्थानीय स्तर से सारी कार्रवाई कर रिपोर्ट भेजी चुकी है। शायद वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से भी रिपोर्ट मांगी गई है। अब एनटीसीए से एनओसी आना ही शेष है। - नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, पीलीभीत टाइगर रिजर्व
पीलीभीत-मैलानी रूट पर वन विभाग द्वारा एनओसी न दिए जाने से काम रुका चल रहा है। फिलहाल अभी एनओसी नहीं मिल सकी है। इसको लेकर प्रयास जारी है। - राजेंद्र सिंह, पीआरओ, इज्जतनगर मंडल
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ऐशबाग-पीलीभीत मीटरगेज रूट पर तीन चरणों में आमान परिवर्तन का कार्य शुरू कराया गया था। इसमें पहले और दूसरे चरण यानी ऐशबाग से सीतापुर और सीतापुर से मैलानी तक का कार्य पूरा हो चुका है। तीसरे चरण में पीलीभीत-मैलानी रूट पर ब्राडगेज कार्य होने हैं। तीसरे चरण में कार्य के लिए इस रूट पर मीटरगेज की ट्रेनों का संचालन 30 मई 2018 को बंद कर दिया गया था। इसके बाद 68 किमी लंबे रुट पर ब्रॉडगेज का काम शुरू किया था।
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रेल अफसरों के मुताबिक, मैलानी से शाहगढ़ रेलवे स्टेशन के बीच लगभग 85 फीसदी ब्रॉडगेज कार्य पूरा हो चुका है, मगर शाहगढ़ से पीलीभीत के बीच डेढ़ साल बीतने के बाद भी आमान परिवर्तन का कार्य ठप चल रहा है।
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एनटीसीए के डीआईजी भी कर चुके हैं दौरा
चूंकि एनओसी एनटीसीए को देनी है। टाइगर रिजर्व के आठ किमी क्षेत्र में रेल पटरी बिछाने और अंडरपास निर्माण को एनओसी दिए जाने को लेकर एनटीसीए के डीआईजी निशांत वर्मा ने भी 11 जुलाई को माला रेंज में पहुंचकर अंडरपास निर्माण वाले स्थानों की गहनता से जांच की थी। यहां टाइगर रिजर्व पांच अंडरपास की मांग कर रहा है। डीआईजी ने भी वन्यजीवों की सुरक्षा को देखते हुए अंडरपास को जरूरी बताया था। एनटीसीए के डीआईजी के दौरे के बाद माना जा रहा था कि रेलवे को जल्द ही एनओसी मिल सकेगी, मगर डीआईजी के दौरान चार माह बीत चुके हैं, मगर रेलवे को अब तक एनओसी नहीं मिल सकी है। कुल मिलाकर देखा जाए तो स्थानीय जनप्रतिनिधि भी इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। यदि जनप्रतिनिधि उच्च स्तर पर पैरवी करें तो यहां जल्द ही एनओसी मिलने के बाद काम पूरा हो सकता है।
एनओसी के संबंध में स्थानीय स्तर से सारी कार्रवाई कर रिपोर्ट भेजी चुकी है। शायद वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से भी रिपोर्ट मांगी गई है। अब एनटीसीए से एनओसी आना ही शेष है। - नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, पीलीभीत टाइगर रिजर्व
पीलीभीत-मैलानी रूट पर वन विभाग द्वारा एनओसी न दिए जाने से काम रुका चल रहा है। फिलहाल अभी एनओसी नहीं मिल सकी है। इसको लेकर प्रयास जारी है। - राजेंद्र सिंह, पीआरओ, इज्जतनगर मंडल