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Pilibhit News: फाइलों में ‘गरीब-मुक्त’ माधोटांडा, जमीनी हकीकत में अब भी हजारों परिवार गुरबत से जूझ रहे
Sun, 30 Nov 2025 11:06 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Sun, 30 Nov 2025 11:06 PM IST
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माधोटांडा में राशन कार्ड धारक का घर। स्रोत ग्रामीण
पीलीभीत। सरकारी फाइलों में भले ही माधोटांडा गांव गुलाबी तस्वीर लिए ‘गरीब-मुक्त’ घोषित किया गया है लेकिन जमीनी हकीकत आज भी कड़वी और परेशानियों से भरी है। यही वजह है कि प्रख्यात शायर अदम गोंडवी का शेर “तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, मगर ये आंकड़े झूठे हैं, ये दावा किताबी है” यहां पूरी तरह सटीक बैठता है।
पंचायती राज विभाग की ओर से ग्राम प्रधानों की एक्सपोजर विजिट कराकर जिन गांवों को गरीबी-मुक्त श्रेणी में डालकर शासन को रिपोर्ट भेजी गई, उसमें माधोटांडा भी शामिल किया है लेकिन खाद्य आपूर्ति विभाग के ताजा आंकड़े बताते हैं कि यह दावा वास्तविकता से कोसों दूर है। करीब 50 हजार आबादी वाले इस गांव में 2525 राशन कार्ड धारक और 10090 लाभार्थी पंजीकृत हैं। इनमें अंत्योदय कार्ड धारक 90 परिवार और 295 लाभार्थी शामिल हैं, जो अत्यंत गरीब श्रेणी में आते हैं। यह वे लोग हैं जो रोजी-रोटी के लिए आज भी पूरी तरह मेहनत-मजदूरी पर आश्रित हैं और सरकारी समर्थन के बिना दो जून का भोजन भी मुश्किल है।
सीडीओ का तर्क
सीडीओ आरके श्रीवास के अनुसार करीब डेढ़ वर्ष पहले ‘जीरो पावरटीलाइन’ योजना के तहत गांव में 15–25 अत्यंत गरीब परिवारों को चिह्नित कर योजनाओं का लाभ देने की पहल की गई थी। इसी प्रयास को ‘गरीब-मुक्त’ नाम दिया गया।
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डीपीआरओ का तर्क
डीपीआरओ रोहित भारती ने स्पष्ट किया कि एक्सपोजर विजिट का उद्देश्य गांव को वास्तविक रूप से गरीब-मुक्त बनाना नहीं, बल्कि ग्राम प्रधान और सचिवों को प्रशिक्षण देकर यह समझाना है कि गरीबी उन्मूलन के लिए किस दिशा में बेहतर कार्य किया जाए। यह सूची सिर्फ प्रशिक्षण प्रक्रिया का हिस्सा है।
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पंचायती राज विभाग की ओर से ग्राम प्रधानों की एक्सपोजर विजिट कराकर जिन गांवों को गरीबी-मुक्त श्रेणी में डालकर शासन को रिपोर्ट भेजी गई, उसमें माधोटांडा भी शामिल किया है लेकिन खाद्य आपूर्ति विभाग के ताजा आंकड़े बताते हैं कि यह दावा वास्तविकता से कोसों दूर है। करीब 50 हजार आबादी वाले इस गांव में 2525 राशन कार्ड धारक और 10090 लाभार्थी पंजीकृत हैं। इनमें अंत्योदय कार्ड धारक 90 परिवार और 295 लाभार्थी शामिल हैं, जो अत्यंत गरीब श्रेणी में आते हैं। यह वे लोग हैं जो रोजी-रोटी के लिए आज भी पूरी तरह मेहनत-मजदूरी पर आश्रित हैं और सरकारी समर्थन के बिना दो जून का भोजन भी मुश्किल है।
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सीडीओ का तर्क
सीडीओ आरके श्रीवास के अनुसार करीब डेढ़ वर्ष पहले ‘जीरो पावरटीलाइन’ योजना के तहत गांव में 15–25 अत्यंत गरीब परिवारों को चिह्नित कर योजनाओं का लाभ देने की पहल की गई थी। इसी प्रयास को ‘गरीब-मुक्त’ नाम दिया गया।
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डीपीआरओ का तर्क
डीपीआरओ रोहित भारती ने स्पष्ट किया कि एक्सपोजर विजिट का उद्देश्य गांव को वास्तविक रूप से गरीब-मुक्त बनाना नहीं, बल्कि ग्राम प्रधान और सचिवों को प्रशिक्षण देकर यह समझाना है कि गरीबी उन्मूलन के लिए किस दिशा में बेहतर कार्य किया जाए। यह सूची सिर्फ प्रशिक्षण प्रक्रिया का हिस्सा है।