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मां की बदौलत डॉ. सोनी को पहचान के साथ मिला मुकाम 16-55-04
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सोनी मौर्य व उनकी मां आरती
- फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। गरीब परिवार की बेटी डॉ. सोनी की सफलता की कहानी वर्ष 1992 से शुरू होती है। जब वह मात्र तीन महीने की थीं। उपाधि महाविद्यालय में चतुर्थश्रेणी कर्मचारी पिता कल्लू राम मौर्य का अचानक निधन हो गया। खुद को संभालने के साथ परिवार को चलाने और आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी मां आरती देवी के कंधों पर आ गई। दो भाई व चार बहनों का परिवार था, सोनी सभी भाई बहनों में सबसे छोटी थीं। पिता के स्थान पर आरती देवी को नौकरी मिली। कम वेतन और बड़े परिवार के भरण पोषण की चुनौती सामने होने के बावजूद आरती देवी ने कभी हिम्मत नहीं हारी। इसी का नतीजा है कि सोनी मौर्य आज असिस्टेंट प्रोफेसर हैं।
सोनी बताती हैं कि मां ने खुद भले न खाया हो पर बच्चों को कभी किसी चीज की कमी नहीं होने दी। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थीं। लेकिन बच्चों को बड़े ओहदे पर देखना चाहती थीं। इसी मंशा से उन्होंने इंटरमीडिएट के बाद बीएससी गणित के लिए उनका दाखिला रामलुभाई कॉलेज में कराया। सोनी बताती हैं कि फुटबॉल और एथलेटिक्स में उनकी रुचि थी। परिश्रम कर राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाई। बीएससी करने के बाद 2011 में बीएचयू की प्रवेश परीक्षा पास कर बीपीएड में दाखिला लिया। एमपीएड 2014 में पूरा किया। वर्ष 2018 में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।
कड़ी मेहनत कर अपनी मां के भरोसे पर खरा उतरकर पहली नौकरी मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण कर स्पोर्ट्स ऑफिसर के पद पर मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में मिली। कुछ ही दिनों में दिल्ली टीजीटी -पीजीटी और यूपी टीजीटी, पीजीटी की परीक्षा उत्तीर्ण की। बिहार लोक सेवा आयोग से डायट में प्रवक्ता पद के लिए चयनित हुईं। उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग की तरफ से असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए क्वालीफाई किया। जून 2020 से बदायूं जिले के गिंदो देवी महाविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर शारीरिक शिक्षा के पद पर सेवारत हैं।
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मां की याद करती हूं तो गर्व होता है
डॉ. सोनी मौर्य कहती हैं कि पिता को तो देखा नहीं लेकिन मां में ही पिता और मां दोनों का प्यार मिला। तभी तय कर लिया था कि बड़े पद पर पहुंचकर मां के कष्ट दूर करूंगी। गर्व की बात यह रही कि मां की प्रेरणा से मुकाम के साथ पहचान मिली पर गम की बात यह रही कि 2020 में जब वह प्रोफेसर बनकर आईं तब तक मां का स्वर्गवास हो गया था। अब उनके प्यार की खुशबू और आशीर्वाद है, जो जिंदगी के सफर को आगे बढ़ा रहा है।
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सोनी बताती हैं कि मां ने खुद भले न खाया हो पर बच्चों को कभी किसी चीज की कमी नहीं होने दी। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थीं। लेकिन बच्चों को बड़े ओहदे पर देखना चाहती थीं। इसी मंशा से उन्होंने इंटरमीडिएट के बाद बीएससी गणित के लिए उनका दाखिला रामलुभाई कॉलेज में कराया। सोनी बताती हैं कि फुटबॉल और एथलेटिक्स में उनकी रुचि थी। परिश्रम कर राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाई। बीएससी करने के बाद 2011 में बीएचयू की प्रवेश परीक्षा पास कर बीपीएड में दाखिला लिया। एमपीएड 2014 में पूरा किया। वर्ष 2018 में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।
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कड़ी मेहनत कर अपनी मां के भरोसे पर खरा उतरकर पहली नौकरी मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण कर स्पोर्ट्स ऑफिसर के पद पर मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में मिली। कुछ ही दिनों में दिल्ली टीजीटी -पीजीटी और यूपी टीजीटी, पीजीटी की परीक्षा उत्तीर्ण की। बिहार लोक सेवा आयोग से डायट में प्रवक्ता पद के लिए चयनित हुईं। उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग की तरफ से असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए क्वालीफाई किया। जून 2020 से बदायूं जिले के गिंदो देवी महाविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर शारीरिक शिक्षा के पद पर सेवारत हैं।
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मां की याद करती हूं तो गर्व होता है
डॉ. सोनी मौर्य कहती हैं कि पिता को तो देखा नहीं लेकिन मां में ही पिता और मां दोनों का प्यार मिला। तभी तय कर लिया था कि बड़े पद पर पहुंचकर मां के कष्ट दूर करूंगी। गर्व की बात यह रही कि मां की प्रेरणा से मुकाम के साथ पहचान मिली पर गम की बात यह रही कि 2020 में जब वह प्रोफेसर बनकर आईं तब तक मां का स्वर्गवास हो गया था। अब उनके प्यार की खुशबू और आशीर्वाद है, जो जिंदगी के सफर को आगे बढ़ा रहा है।