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पीलीभीत में रोते हुए महिलाओं ने बयां किया दर्द: बाढ़ में बह गया घर बार, तीन दिन तक भूखी रहीं पार्वती और प्रभाती

Fri, 22 Oct 2021 08:45 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पीलीभीत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पीलीभीत Published by: Vikas Kumar Updated Fri, 22 Oct 2021 08:45 PM IST
सार

पीलीभीत में आई बाढ़ में फंसी पीड़ित महिलाओं ने बताया कि एक बार हेलिकॉप्टर पास से आकर चला गया तो लगा अब बचना मुश्किल है। 

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parvati and prabhavati starved for three days in the floods in pilibhit
पार्वती (बाएं) और प्रभाती (दाएं) - फोटो : amar ujala

विस्तार

घर बार सब बह गया। तीन दिन तक भूखे रहना पड़ा। चारों ओर पानी ही पानी था। बुधवार को हेलिकॉप्टर दिखा लेकिन प्रभाती और पार्वती के पास तक नहीं पहुंचा। भूख से पेट हिम्मत हारने लगा आंखों से आंसू निकलते रहे पर जब बृहस्पतिवार को वायुसेना का हेलिकॉप्टर फिर से पहुंचा तो साड़ी दिखा कर उनको फंसे होने के निशान दिए। इसके बाद जान बच सकी।

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गुनहान गांव निवासी 50 वर्षीय पार्वती मंडल और प्रभाती मंडल ने रोते हुए अपना दर्द बयां किया। यह दोनों रविवार को धान की कटाई के लिए अपने गांव नगरिया खुर्द कला से गुनहान गईं थीं। शारदा नदी में सोमवार को रात अचानक जलस्तर बढ़ने लगा। गुनहान में जहां उनकी झोपड़ी थी चारों तरफ पानी ही पानी था। जान बचाना भारी था। उन लोगों को यह नहीं पता था कि कुछ घंटों बाद मौत का मंजर नजर आएगा। देखते ही देखते नदी का पानी झोपड़ियों में घुस गया। मचान में बैठकर जान बचाई। पानी की हिलोरे रात में दहशत को और बढ़ा रहीं थीं। भूख भी जोर पकड़ रही थी, लेकिन नदी का डरावना दृश्य देखकर सिर्फ जीवित रहना ही अच्छा लग रहा था। 
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बुधवार सुबह हेलिकॉप्टर आया और कुछ लोगों को निकाल कर ले गया। वह दोनों हेलिकॉप्टर के फिर आने की आस लगाए रहीं। पानी में कुछ कमी आई, फिर भगवान का नाम लेकर रात गुजारी। बृहस्पतिवार दोपहर करीब एक बजे हेलिकॉप्टर फिर से हमारे नजदीक आता दिखा। बदन पर पड़ी साड़ियों का पल्लू उठा कर हेलिकॉप्टर को अपनी ओर आने के लिए इशारा किया। शोर भी मचाया। इसके बाद नदी के इस पार सुरक्षित आए।
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शारदा नदी के पार का पानी ही पानी था। मेरे आंखों के सामने ही कई झोपड़ियां पानी के साथ बह गईं। तीन दिन तक खाने को कुछ नहीं मिला। आस थी कि सुरक्षित नदी के पार पहुंच जाएं। भूखे पेट भगवान का नाम लेकर वक्त गुजारा। सेना के जवान आए और हेलिकॉप्टर से हमें सुरक्षित पहुंचा दिया। - प्रभाती मंडल


नदी ने हमारी झोपड़ी को बहा दिया। खाने को कुछ नहीं था। भूख तड़पा ही रही थी। ईश्वर का नाम लेकर एक -एक पल गुजार रहे थे। बृहस्पतिवार को सेना के जवानों ने हेलिकॉप्टर पर ऊपर चढ़ाया तो हिम्मत आई। नदी पार अपनों को सुरक्षित देखा और खाने को अन्न मिला तो आंखों में आंसू छलक आए। -पार्वती मंडल

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