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बागियों ने ताल ठोंक बढ़ा दी सत्ताधारी भाजपा के दिग्गजों की परेशानी
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पीलीभीत। गांव की सरकार के चुनाव को लेकर सियासत परवान चढ़ चुकी है। राजनीतिक दल अपने प्रत्याशियों को जिताने के लिए प्रचार-प्रसार से लेकर कार्यकर्ताओं को एकजुटता का संदेश दे रहे हैं। मगर धरातल पर बागियों ने चुनाव मैदान में ताल ठोंक दिग्गजों को परेशान कर दिया है। विपक्षी दलों को छोड़िए सत्ताधारी भाजपा में भी घमासान मचा है। घोषित प्रत्याशियों को पार्टी पदाधिकारियों के निर्दलीय चुनाव लड़ने पर खुद की जीत पर संकट के बादल छाते दिखाई दे रहे हैं। वहीं कुछ इसे सीधे तौर पर दिग्गजों के बीच चल रही गुटबाजी की साजिश करार देने में जुटे हैं। नतीजतन आलम यह है कि विपक्ष से लड़ने के साथ ही बागियों से निपटना चुनौती बना है।
वैसे तो भारतीय जनता पार्टी के सत्ता में आने से पहले और सरकार बनने के बाद भी जिले की सियासत में गुटबाजी लगातार सामने आती रही है। जनप्रतिनिधियों के बीच भी मनमुटाव कई बार उजागर हुआ था। इस बार पंचायत चुनाव में बड़े नेताओं ने कई महीने पहले से मंथन शुरू कर दिया था। कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के साथ हुई बैठकों में सबसे अधिक जोर एकजुटता पर दिया गया था। यह संकल्प लिया गया था कि जो भी हाईकमान से प्रत्याशी घोषित आएगा, उसी को चुनाव लड़ाया जाएगा। मगर अब चुनावी माहौल में हालात बदल गए। सर्वाधिक जोर आजमाइश जिला पंचायत सदस्य पद के चुनाव को लेकर है। वार्ड नंबर 15 की बात करें तो पूर्व में विधायक पद पर चुनाव लड़ चुके एक दिग्गज चुनाव मैदान में है। उनका एक बड़े नेता के समर्थक के तौर पर भी नाम जगजाहिर है। अब उनके विपक्ष में भारतीय जनता युवा मोर्चा के मुख्य पदाधिकारी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने उतर चुके हैं। इस पर अभी तक संगठन की ओर से एक्शन न लिया जाना भी प्रत्याशी की नाराजगी में शुमार हो चुका है। इसी तरह से वार्ड नंबर 22 की तस्वीर है। यहां भी भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष को पार्टी ने प्रत्याशी बनाया है। विपक्षी दलों के साथ ही भारतीय जनता युवा मोर्चा का एक पदाधिकारी निर्दलीय चुनाव लड़ने उतर गया। उसकी ओर से चुनाव प्रचार को लगाए गए पोस्टर फ्लैक्स में पार्टी के बड़े नेताओं के फोटो, पदनाम भी हैं। ऐसे में अब मूल प्रत्याशी इस बात को लेकर परेशान हैं, कि कहीं वोटर भ्रमित न हो जाए। वहीं मतदाता भाजपा के असल प्रत्याशी को लेकर चर्चा करता है।
टिकट कहीं से मिला, चुनाव दूसरे वार्ड से लड़ने लगे
भाजपा में बागी तेवर सिर्फ टिकट कटने पर ही नहीं है। वार्ड नंबर 28 पर तो मामला और भी चर्चित हो चुका है। भाजपा की ओर से घोषित किए गए प्रत्याशी के खिलाफ जो उम्मीदवार चुनाव मैदान में ताल ठोंक चुका है। उसका नाम भी प्रत्याशी की सूची में था, मगर दूसरे वार्ड से। मगर अब चुनाव वह भी वार्ड नंबर 28 से ही लड़ने के लिए निर्दलीय नामांकन कराकर मैदान में उतर चुका है। दो अलग-अगल वार्डों से घोषित किए गए भाजपा के प्रत्याशी एक ही वार्ड से चुनाव लड़ने उतर गए।
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एक वजह ये भी चल रही चर्चाओं में
जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के लिए कई दावेदार बन चुके हैं। ओबीसी को आरक्षित सीट के लिए जो प्रत्याशी प्रबल दावेदारी कर रहे थे। अधिकांश बागी भी उन्हीं सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। कुछ का मानना है कि ये दूसरे दावेदार की साजिश है। एक ने तो यहां तक कह दिया बागी प्रत्याशी दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ रहे दिग्गज के परिवार वालों की गाड़ी में सवार होकर ही प्रचार करता दिखता है। फिलहाल चुनाव मुश्किलों के बीच रोचक हो गया है।
कुछ दिन पहले ही सपा के एक बड़े नेता ने उतार दिया था रिश्तेदार
बागी तेवर सिर्फ सत्ताधारी भाजपा में ही नहीं है। पिछले दिनों जिला पंचायत के एक वार्ड में सपा प्रत्याशी के खिलाफ भी बागी उतारने का मामला चर्चित रहा था। सपा के एक बड़े नेता ने अपनी महिला रिश्तेदार का न सिर्फ निर्दलीय नामांकन कराया, बल्कि चुनाव प्रचार में भी ताकत झोंक दी थी। अन्य दलों में भी भीतर खाने में गुटबाजी जोरों पर है।
नौ पदाधिकारियों के निष्कासन को भेजी है सूची
पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ बागी तेवर दिखाने वाले पदाधिकारियों पर सख्ती की जाएगी। भाजयुमो के दो बड़े पदाधिकारियों समेत नौ लोगों की सूची बनाकर संगठन के बड़े नेताओं को कार्रवाई के लिए भेजी गई है। इसमें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासन कराने की संस्तुति की है। - संजीव प्रताप सिंह, जिलाध्यक्ष भाजपा
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वैसे तो भारतीय जनता पार्टी के सत्ता में आने से पहले और सरकार बनने के बाद भी जिले की सियासत में गुटबाजी लगातार सामने आती रही है। जनप्रतिनिधियों के बीच भी मनमुटाव कई बार उजागर हुआ था। इस बार पंचायत चुनाव में बड़े नेताओं ने कई महीने पहले से मंथन शुरू कर दिया था। कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के साथ हुई बैठकों में सबसे अधिक जोर एकजुटता पर दिया गया था। यह संकल्प लिया गया था कि जो भी हाईकमान से प्रत्याशी घोषित आएगा, उसी को चुनाव लड़ाया जाएगा। मगर अब चुनावी माहौल में हालात बदल गए। सर्वाधिक जोर आजमाइश जिला पंचायत सदस्य पद के चुनाव को लेकर है। वार्ड नंबर 15 की बात करें तो पूर्व में विधायक पद पर चुनाव लड़ चुके एक दिग्गज चुनाव मैदान में है। उनका एक बड़े नेता के समर्थक के तौर पर भी नाम जगजाहिर है। अब उनके विपक्ष में भारतीय जनता युवा मोर्चा के मुख्य पदाधिकारी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने उतर चुके हैं। इस पर अभी तक संगठन की ओर से एक्शन न लिया जाना भी प्रत्याशी की नाराजगी में शुमार हो चुका है। इसी तरह से वार्ड नंबर 22 की तस्वीर है। यहां भी भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष को पार्टी ने प्रत्याशी बनाया है। विपक्षी दलों के साथ ही भारतीय जनता युवा मोर्चा का एक पदाधिकारी निर्दलीय चुनाव लड़ने उतर गया। उसकी ओर से चुनाव प्रचार को लगाए गए पोस्टर फ्लैक्स में पार्टी के बड़े नेताओं के फोटो, पदनाम भी हैं। ऐसे में अब मूल प्रत्याशी इस बात को लेकर परेशान हैं, कि कहीं वोटर भ्रमित न हो जाए। वहीं मतदाता भाजपा के असल प्रत्याशी को लेकर चर्चा करता है।
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टिकट कहीं से मिला, चुनाव दूसरे वार्ड से लड़ने लगे
भाजपा में बागी तेवर सिर्फ टिकट कटने पर ही नहीं है। वार्ड नंबर 28 पर तो मामला और भी चर्चित हो चुका है। भाजपा की ओर से घोषित किए गए प्रत्याशी के खिलाफ जो उम्मीदवार चुनाव मैदान में ताल ठोंक चुका है। उसका नाम भी प्रत्याशी की सूची में था, मगर दूसरे वार्ड से। मगर अब चुनाव वह भी वार्ड नंबर 28 से ही लड़ने के लिए निर्दलीय नामांकन कराकर मैदान में उतर चुका है। दो अलग-अगल वार्डों से घोषित किए गए भाजपा के प्रत्याशी एक ही वार्ड से चुनाव लड़ने उतर गए।
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एक वजह ये भी चल रही चर्चाओं में
जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के लिए कई दावेदार बन चुके हैं। ओबीसी को आरक्षित सीट के लिए जो प्रत्याशी प्रबल दावेदारी कर रहे थे। अधिकांश बागी भी उन्हीं सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। कुछ का मानना है कि ये दूसरे दावेदार की साजिश है। एक ने तो यहां तक कह दिया बागी प्रत्याशी दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ रहे दिग्गज के परिवार वालों की गाड़ी में सवार होकर ही प्रचार करता दिखता है। फिलहाल चुनाव मुश्किलों के बीच रोचक हो गया है।
कुछ दिन पहले ही सपा के एक बड़े नेता ने उतार दिया था रिश्तेदार
बागी तेवर सिर्फ सत्ताधारी भाजपा में ही नहीं है। पिछले दिनों जिला पंचायत के एक वार्ड में सपा प्रत्याशी के खिलाफ भी बागी उतारने का मामला चर्चित रहा था। सपा के एक बड़े नेता ने अपनी महिला रिश्तेदार का न सिर्फ निर्दलीय नामांकन कराया, बल्कि चुनाव प्रचार में भी ताकत झोंक दी थी। अन्य दलों में भी भीतर खाने में गुटबाजी जोरों पर है।
नौ पदाधिकारियों के निष्कासन को भेजी है सूची
पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ बागी तेवर दिखाने वाले पदाधिकारियों पर सख्ती की जाएगी। भाजयुमो के दो बड़े पदाधिकारियों समेत नौ लोगों की सूची बनाकर संगठन के बड़े नेताओं को कार्रवाई के लिए भेजी गई है। इसमें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासन कराने की संस्तुति की है। - संजीव प्रताप सिंह, जिलाध्यक्ष भाजपा