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चूल्हे जलते नहीं, राहत पहुंच नहीं पा रही, भूख और दहशत में रातें काटने को मजबूर है बाढ़ पीड़ित
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पूरनपुर। शारदा नदी का पानी कम होना शुरू हो गया है। मगर अधिकतर गांवों में घरों में अब भी पानी भरा है। घरों रखा अनाज, कपड़े, बिस्तर सब कुछ भीगने से लोग परेशान हैं। तीन दिन से अधिकतर घरों में चूल्हे नहीं जले हैं। कई लोगों को भूखे ही रातें काटनी पड़ रही हैं। राहत के नाम पर अब तक कुछ भी बाढ़ पीड़ितों को नहीं नसीब हुआ है। शारदापार के गांवों की स्थिति अधिक खराब है।
शारदा की बाढ़ से शारदापार के गांवों के अलावा नदी के इस पार गांव चंदिया हजारा, राहुलनगर, खिरकिया बरगदिया, कॉलोनी नंबर छह की आबादी में बृहस्पतिवार को तीसरे दिन जलभराव रहा। हालांकि पानी कम होने से लोगों ने राहत की सास ली। मगर गांवों में तीन से चार फिट तक भरे रहे पानी में घरों में रखा अनाज, कपड़े, बिस्तर सब कुछ भीग गया। ऊंचे स्थानों पर पहुंचकर बाढ़ पीड़ितों ने बमुश्किल अपनी जान बचाई। घरों में पानी भरा होने से अधिकांश घरों में तीन दिन से चूल्हे नहीं चल सके हैं। गांवों में पानी भरा होने से न तो अफसर पहुंच रहे है और न ही कर्मचारी।
हालांकि कुछ समाजसेवी और ग्राम पंचायतों की ओर से बाढ़ पीड़ितों को खाने के पैकेट बांटे जा रहे हैं। मगर यह पैकेट जिन स्थानों पर जलभराव न के बराबर है वहीं खाने के पैकेट पहुंच रहे है। शारदापार के दूरदराज के अधिकांश गांवों में लोग भूखे और बाढ़ का पानी कब बढ़ जाए की दहशत के चलते रातें जाग कर काटने को मजबूर है। शारदा नदी के इधर राहुलनगर, खिरकिया बरगदिया, कॉलोनी नंबर छह भी भी बाढ़ पीड़ितों तक राहत सामग्री नहीं पहुंच पा रही है।
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शारदा की बाढ़ से शारदापार के गांवों के अलावा नदी के इस पार गांव चंदिया हजारा, राहुलनगर, खिरकिया बरगदिया, कॉलोनी नंबर छह की आबादी में बृहस्पतिवार को तीसरे दिन जलभराव रहा। हालांकि पानी कम होने से लोगों ने राहत की सास ली। मगर गांवों में तीन से चार फिट तक भरे रहे पानी में घरों में रखा अनाज, कपड़े, बिस्तर सब कुछ भीग गया। ऊंचे स्थानों पर पहुंचकर बाढ़ पीड़ितों ने बमुश्किल अपनी जान बचाई। घरों में पानी भरा होने से अधिकांश घरों में तीन दिन से चूल्हे नहीं चल सके हैं। गांवों में पानी भरा होने से न तो अफसर पहुंच रहे है और न ही कर्मचारी।
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हालांकि कुछ समाजसेवी और ग्राम पंचायतों की ओर से बाढ़ पीड़ितों को खाने के पैकेट बांटे जा रहे हैं। मगर यह पैकेट जिन स्थानों पर जलभराव न के बराबर है वहीं खाने के पैकेट पहुंच रहे है। शारदापार के दूरदराज के अधिकांश गांवों में लोग भूखे और बाढ़ का पानी कब बढ़ जाए की दहशत के चलते रातें जाग कर काटने को मजबूर है। शारदा नदी के इधर राहुलनगर, खिरकिया बरगदिया, कॉलोनी नंबर छह भी भी बाढ़ पीड़ितों तक राहत सामग्री नहीं पहुंच पा रही है।
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