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अब हाथियों के झुंड ने थारू बस्ती में धान की फसल रौंदी
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माधोटांडा। नेपाली हाथियों के झुंड ने शुक्रवार रात सीमावर्ती गांव के समीप थारू बस्ती में धान की फसल को रौंद डाला। हाथियों का झुंड गांव में न घुस जाए, इसको लेकर ग्रामीण पूरी रात ट्रैक्टरों की हेड लाइट जलाकर और पीपे बजाकर उन्हें भगाने में जुटे रहे। नेपाली हाथियों का भारतीय इलाके में आतंक फिलहाल जारी है।
नेपाल की शुक्ला फांटा सेंक्चुरी से लगभग हर साल की हाथियों का झुंड आता है। ये हाथी सीमावर्ती गांवों में फसलों का खासा नुकसान पहुंचाते हैं। टाइगर रिजर्व के अफसर नेपाली हाथियों के आने की बात तो स्वीकार कर लेते हैं, मगर इन हाथियों को वापस खदेड़ने के कोई इंतजाम नहीं किए जाते। इन दिनों भी तीन नेपाली हाथी भारतीय इलाके में आतंक मचाए हुए हैं। बृहस्पतिवार गोरखडिब्बी गांव में कई झोपड़ियां तहस नहस करने के बाद हाथी वहां से चले गए थे। मगर, शुक्रवार की रात तीन नेपाली हाथी भारत-नेपाल सीमा के पिलर नंबर 27 से होते हुए ढकिया ताल्लुके महाराजपुर की थारू बस्ती की ओर बढ़ गए। हाथियों के चिंघाडने की आवाज जब थारू बस्ती में पहुंची तो वहां ग्रामीण सतर्क हो गए। हाथी गांव में न घुस आएं, इसलिए ग्रामीणों ने दो ट्रैक्टरों को स्टार्ट कर उनकी हेडलाइट ऑन कर दी।
उसके बाद पीपे बजाना शुरू कर दिए। शोर-शराबे पर हाथी गांव के किनारे तो पहुंचे मगर वे गांव में नहीं घुस पाए। इन हाथियों ने छोटेलाल राना, लोटन राना, छोटेलाल, थुम्मन, जनकराज, राधेश्याम आदि की धान की फसल को पैरों तले रौंद डाला। थारु बस्ती के ग्रामीणों ने पूरी रात जागकर काटी। उन्हें डर था कि हाथी गांव पर हमला न कर दें। ग्रामीणों का कहना है कि हाथी पिछले कुछ दिनों से रोजाना ही आ रहे हैं। वे रात में घरों और फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। उसके बाद सुबह होने से पहले ही दोबारा जंगल में चले जाते हैं। गांव वालों का कहना है कि अभी तो हाथियों की संख्या तीन ही है, मगर आने वाले दिनों में यह संख्या बढ़ भी सकती है। अगर नेपाली हाथियों को अभी नहीं खदेड़ा गया तो जनहानि भी हो सकती है।
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शारदा नदी के पार से जंगली हाथी आ रहे हैं। शुक्ला फांटा सेंचुरी से यह हाथी अक्सर आते रहते हैं। लग्गा भग्गा सहित रमनगरा क्षेत्र के वन कर्मियों को अलर्ट कर दिया गया है। ग्रामीणों से सतर्क रहने और शोर मचाकर हाथियों को भगाने की अपील की गई है। -डीके गोयल, वन क्षेत्राधिकारी, बराही रेंज
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नेपाल की शुक्ला फांटा सेंक्चुरी से लगभग हर साल की हाथियों का झुंड आता है। ये हाथी सीमावर्ती गांवों में फसलों का खासा नुकसान पहुंचाते हैं। टाइगर रिजर्व के अफसर नेपाली हाथियों के आने की बात तो स्वीकार कर लेते हैं, मगर इन हाथियों को वापस खदेड़ने के कोई इंतजाम नहीं किए जाते। इन दिनों भी तीन नेपाली हाथी भारतीय इलाके में आतंक मचाए हुए हैं। बृहस्पतिवार गोरखडिब्बी गांव में कई झोपड़ियां तहस नहस करने के बाद हाथी वहां से चले गए थे। मगर, शुक्रवार की रात तीन नेपाली हाथी भारत-नेपाल सीमा के पिलर नंबर 27 से होते हुए ढकिया ताल्लुके महाराजपुर की थारू बस्ती की ओर बढ़ गए। हाथियों के चिंघाडने की आवाज जब थारू बस्ती में पहुंची तो वहां ग्रामीण सतर्क हो गए। हाथी गांव में न घुस आएं, इसलिए ग्रामीणों ने दो ट्रैक्टरों को स्टार्ट कर उनकी हेडलाइट ऑन कर दी।
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उसके बाद पीपे बजाना शुरू कर दिए। शोर-शराबे पर हाथी गांव के किनारे तो पहुंचे मगर वे गांव में नहीं घुस पाए। इन हाथियों ने छोटेलाल राना, लोटन राना, छोटेलाल, थुम्मन, जनकराज, राधेश्याम आदि की धान की फसल को पैरों तले रौंद डाला। थारु बस्ती के ग्रामीणों ने पूरी रात जागकर काटी। उन्हें डर था कि हाथी गांव पर हमला न कर दें। ग्रामीणों का कहना है कि हाथी पिछले कुछ दिनों से रोजाना ही आ रहे हैं। वे रात में घरों और फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। उसके बाद सुबह होने से पहले ही दोबारा जंगल में चले जाते हैं। गांव वालों का कहना है कि अभी तो हाथियों की संख्या तीन ही है, मगर आने वाले दिनों में यह संख्या बढ़ भी सकती है। अगर नेपाली हाथियों को अभी नहीं खदेड़ा गया तो जनहानि भी हो सकती है।
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शारदा नदी के पार से जंगली हाथी आ रहे हैं। शुक्ला फांटा सेंचुरी से यह हाथी अक्सर आते रहते हैं। लग्गा भग्गा सहित रमनगरा क्षेत्र के वन कर्मियों को अलर्ट कर दिया गया है। ग्रामीणों से सतर्क रहने और शोर मचाकर हाथियों को भगाने की अपील की गई है। -डीके गोयल, वन क्षेत्राधिकारी, बराही रेंज