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मशहूर बांसुरी वादकों के होठों पर सजती थी नवाब अहमद की बांसुरी
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बांसुरी वादन करते नबी अहमद (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
बांसुरी कारीगर नवाब अहमद का इंतकाल
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पीलीभीत। देश-विदेशों तक जनपद की बांसुरी को पहचान दिलाने वाले मरहूम नबी अहमद के पुत्र एवं मशहूर बांसुरी कारीगर नवाब अहमद का देर रात बीमारी के चलते बरेली के एक अस्पताल में इंतकाल हो गया।
जनपद में बांसुरी बनाने का काम करीब 100 साल पुराना है। यहां मरहूम अब्दुल नबी अहमद ने बांसुरी बनाने की शुरूआत की थी। उनके इंतकाल के बाद उनके आठ पुत्रों ने विरासत को कायम रखते हुए अब्दुल नबी एंड संस की स्थापना की। पिता की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उनके पुत्र नवाब अहमद ने भी खासी पहचान बनाई। परिवार वालों के मुताबिक नवाब अहमद द्वारा बनाई गई बांसुरी के मशहूर बांसुरी वादक हरी प्रसाद चौरसिया, रोनू मजूमदार भी कायल थे। अपनी इसी प्रतिभा के दम पर उन्होंने राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर कई पुरस्कार जीते। खास बात यह थी कि नवाब अहमद जितने अच्छे कारीगर थे, उससे अच्छे बांसुरी वादक भी थे। नवाब अहमद के इंतकाल के खबर सुनने के बाद मंगलवार को उनके लाल रोड स्थित आवास पर शोक जताने वाला का तांता लगा रहा।
नवाब अहमद के भांजे जावेद शेख ने बताया कि वह 68 वर्ष के थे। कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। देर रात उनका इंतकाल हो गया। मंगलवार दोपहर उन्हें शहर के ही एक कब्रिस्तान में सुपुर्दे खाक कर दिया गया। वह अपनी पीछे पत्नी परवीन, दो पुत्र और एक पुत्री को छोड़ गए। उनके तीन भाइयों का इंतकाल पूर्व में हो चुका है।
जनपद में बांसुरी बनाने का काम करीब 100 साल पुराना है। यहां मरहूम अब्दुल नबी अहमद ने बांसुरी बनाने की शुरूआत की थी। उनके इंतकाल के बाद उनके आठ पुत्रों ने विरासत को कायम रखते हुए अब्दुल नबी एंड संस की स्थापना की। पिता की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उनके पुत्र नवाब अहमद ने भी खासी पहचान बनाई। परिवार वालों के मुताबिक नवाब अहमद द्वारा बनाई गई बांसुरी के मशहूर बांसुरी वादक हरी प्रसाद चौरसिया, रोनू मजूमदार भी कायल थे। अपनी इसी प्रतिभा के दम पर उन्होंने राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर कई पुरस्कार जीते। खास बात यह थी कि नवाब अहमद जितने अच्छे कारीगर थे, उससे अच्छे बांसुरी वादक भी थे। नवाब अहमद के इंतकाल के खबर सुनने के बाद मंगलवार को उनके लाल रोड स्थित आवास पर शोक जताने वाला का तांता लगा रहा।
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नवाब अहमद के भांजे जावेद शेख ने बताया कि वह 68 वर्ष के थे। कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। देर रात उनका इंतकाल हो गया। मंगलवार दोपहर उन्हें शहर के ही एक कब्रिस्तान में सुपुर्दे खाक कर दिया गया। वह अपनी पीछे पत्नी परवीन, दो पुत्र और एक पुत्री को छोड़ गए। उनके तीन भाइयों का इंतकाल पूर्व में हो चुका है।
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