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सिर्फ पौधे लगाने तक सीमित रही नमामि गंगे परियोजना
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पीलीभीत में देवहा नदी में फेंकी जा रही है गंदगी। संवाद
- फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। गंगा नदी के साथ-साथ सहयोगी नदियों को स्वच्छ बनाए रखने की योजना भी नमामि गंगे परियोजना में शामिल हो गई है। पीलीभीत जिले के माधौटांडा स्थित गोमत ताल से शुरू होने वाली शारदा नदी को इसमें शामिल किया है। उद्गम स्थल के बाद करीबन आठ किलोमीटर तक नदी विलुप्त है। कुछ स्थानों पर नदी की जमीन में खेती हो रही है। जब आठ किलोमीटर आगे देखते हैं तो नदी में गांवों का गंदा पानी आ रहा है। नदी संकरी है। नाले जैसी नजर आ रही है।
वैसे तो नमामि गंगे परियोजना वर्ष 2014 में शुरू हुई थी। तब केवल गंगा को प्रदूषण मुक्त करने का लक्ष्य था लेकिन अब सहायक नदियों को भी इसमें शामिल किया गया है। वर्ष 2020-2021 से जिले में नमामि गंगे परियोजना लागू हुई। परियोजना लागू होने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि तस्वीर बदलेगी लेकिन अभी ऐसा नहीं हो सका है। अभी तक यह योजना जिले में सिर्फ पौधे लगाने और कुछ स्थानों पर अवैध कब्जे हटवाने तक सीमित है।
परियोजना के तहत अभी तक 112 लाख रुपये खर्च करके 9000 पौधे ही लगाए गए हैं। गोमती नदी के साथ-साथ जिले की दूसरी सहायक नदियों में देवहा और खकरा है। अभी नमामि गंगे के तहत इनमें भी कोई काम नहीं हुआ है। नदियां तो प्रदूषण से पीड़ित हैं पर कोई काम नहीं हुआ है। इसे लेकर पर्यावरण प्रेमी आहत हैं। नदियों में कई स्थानों पर लोग पॉलिथीन में पूजन सामग्री भर कर भी फेंक रहे हैं। कई लोग नदी की जमीन पर खेती कर रहे हैं। अवैध कब्जों से कुछ स्थानों पर नदी नाले का रूप ले रही है।
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क्या है नमामि गंगे परियोजना
वर्ष 2014 में केंद्र सरकार ने गंगा नदी के प्रदूषण को समाप्त करने और नदी को पुनर्जीवित करने के लिए ‘नमामि गंगे’ नामक एक एकीकृत गंगा संरक्षण मिशन का शुभारंभ किया है। इस योजना का क्रियान्वयन जल शक्ति मंत्रालय कर रहा है।
नमामि गंगे प्रोजेक्ट में नदियों में बहुत ज्यादा काम नहीं हुआ। कूड़ा फेंकने पर रोक लगी है। खकरा नदी के किनारे जहां पर कूड़ा फेंका जाता था वहां पर जिलाधिकारी ने पार्क बनवा दिया है।
- लक्ष्मीकांत शर्मा
नदियों का पानी इतना स्वच्छ होना चाहिए कि उसे पीने के साथ पूजा आदि में इस्तेमाल किया जाए। इसके लिए सरकार और जनता दोनों को काम करना है लेकिन अभी ऐसा हो नहीं सका।
शेखर शुक्ला
मैं तो यही चाहता हूं कि सरकार नदी को प्रदूषित करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करे। जिससे कल के लिए स्वच्छ जल उपलब्ध रहे। - समन्वय शर्मा
नदियां एक दिन में प्रदूषित नहीं हुई हैं। लेकिन अब नहीं चेते तो कब चेतेंगे। नदी को अवैध कब्जे और प्रदूषण से मुक्त कराया जाए। - राजीव शर्मा
यह काम होना चाहिए
विस्तृत स्तर पर सहायक नदियों की सफाई कराई जाए
अगर सफाई कराई जाती है तो हानिकारक तत्व निकल जाएंगे
लोगों को भी जागरूकता दिखानी होगी, नदी में पॉलिथीन आदि ने फेंके
देवहा नदी के किनारों पर पॉलिथीन में भरकर कूड़ा फेंका जाता है
बारिश के दिनों में यह कूड़ा नदी तक पहुंच जाता है
एक नजर में गोमती
उद्गम स्थल- माधौटांडा, पीलीभीत
अंतिम स्थल- कैथी गाजीपुर
कुल लंबाई 929 किलोमीटर
13 जनपद से होकर गुजरती है गोमती
929 किलोमीटर में नदी के किनारों पर 150 से अधिक गांव स्थित हैं।
68 नालों व 30 उद्योगों का पानी विभिन्न स्थानों से नदी में पहुंचता है।
उद्गम स्थल पर कोई प्रदूषण नहीं है। अगर आगे कहीं कोई प्रदूषण या अवैध कब्जा है तो उसे हटवाया जाएगा। नमामि गंगे परियोजना को जिले में प्रभावी तरीके लागू कराकर काम कराएंगे।
- प्रशांत श्रीवास्तव, मुख्य विकास अधिकारी
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वैसे तो नमामि गंगे परियोजना वर्ष 2014 में शुरू हुई थी। तब केवल गंगा को प्रदूषण मुक्त करने का लक्ष्य था लेकिन अब सहायक नदियों को भी इसमें शामिल किया गया है। वर्ष 2020-2021 से जिले में नमामि गंगे परियोजना लागू हुई। परियोजना लागू होने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि तस्वीर बदलेगी लेकिन अभी ऐसा नहीं हो सका है। अभी तक यह योजना जिले में सिर्फ पौधे लगाने और कुछ स्थानों पर अवैध कब्जे हटवाने तक सीमित है।
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परियोजना के तहत अभी तक 112 लाख रुपये खर्च करके 9000 पौधे ही लगाए गए हैं। गोमती नदी के साथ-साथ जिले की दूसरी सहायक नदियों में देवहा और खकरा है। अभी नमामि गंगे के तहत इनमें भी कोई काम नहीं हुआ है। नदियां तो प्रदूषण से पीड़ित हैं पर कोई काम नहीं हुआ है। इसे लेकर पर्यावरण प्रेमी आहत हैं। नदियों में कई स्थानों पर लोग पॉलिथीन में पूजन सामग्री भर कर भी फेंक रहे हैं। कई लोग नदी की जमीन पर खेती कर रहे हैं। अवैध कब्जों से कुछ स्थानों पर नदी नाले का रूप ले रही है।
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क्या है नमामि गंगे परियोजना
वर्ष 2014 में केंद्र सरकार ने गंगा नदी के प्रदूषण को समाप्त करने और नदी को पुनर्जीवित करने के लिए ‘नमामि गंगे’ नामक एक एकीकृत गंगा संरक्षण मिशन का शुभारंभ किया है। इस योजना का क्रियान्वयन जल शक्ति मंत्रालय कर रहा है।
नमामि गंगे प्रोजेक्ट में नदियों में बहुत ज्यादा काम नहीं हुआ। कूड़ा फेंकने पर रोक लगी है। खकरा नदी के किनारे जहां पर कूड़ा फेंका जाता था वहां पर जिलाधिकारी ने पार्क बनवा दिया है।
- लक्ष्मीकांत शर्मा
नदियों का पानी इतना स्वच्छ होना चाहिए कि उसे पीने के साथ पूजा आदि में इस्तेमाल किया जाए। इसके लिए सरकार और जनता दोनों को काम करना है लेकिन अभी ऐसा हो नहीं सका।
शेखर शुक्ला
मैं तो यही चाहता हूं कि सरकार नदी को प्रदूषित करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करे। जिससे कल के लिए स्वच्छ जल उपलब्ध रहे। - समन्वय शर्मा
नदियां एक दिन में प्रदूषित नहीं हुई हैं। लेकिन अब नहीं चेते तो कब चेतेंगे। नदी को अवैध कब्जे और प्रदूषण से मुक्त कराया जाए। - राजीव शर्मा
यह काम होना चाहिए
विस्तृत स्तर पर सहायक नदियों की सफाई कराई जाए
अगर सफाई कराई जाती है तो हानिकारक तत्व निकल जाएंगे
लोगों को भी जागरूकता दिखानी होगी, नदी में पॉलिथीन आदि ने फेंके
देवहा नदी के किनारों पर पॉलिथीन में भरकर कूड़ा फेंका जाता है
बारिश के दिनों में यह कूड़ा नदी तक पहुंच जाता है
एक नजर में गोमती
उद्गम स्थल- माधौटांडा, पीलीभीत
अंतिम स्थल- कैथी गाजीपुर
कुल लंबाई 929 किलोमीटर
13 जनपद से होकर गुजरती है गोमती
929 किलोमीटर में नदी के किनारों पर 150 से अधिक गांव स्थित हैं।
68 नालों व 30 उद्योगों का पानी विभिन्न स्थानों से नदी में पहुंचता है।
उद्गम स्थल पर कोई प्रदूषण नहीं है। अगर आगे कहीं कोई प्रदूषण या अवैध कब्जा है तो उसे हटवाया जाएगा। नमामि गंगे परियोजना को जिले में प्रभावी तरीके लागू कराकर काम कराएंगे।
- प्रशांत श्रीवास्तव, मुख्य विकास अधिकारी