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सार्थक परिणाम से दूर मजदूर योजनाएं
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
Updated Sun, 01 May 2016 11:37 PM IST
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- फोटो : pilibhit, beureu
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सरकार मजदूरों के उत्थान के लिए श्रम विभाग के जरिए विभिन्न योजनाएं चला रही है, लेकिन जानकारी का अभाव होने के कारण मजदूरों का भला नहीं हो रहा है। आज भी मजदूरों का जीवन कमाने खाने तक ही सीमित है।
शहर के मोहल्ला मदीना शाह निवासी 52 वर्षीय मुस्ताक के परिवार में पत्नी के अलावा छह बच्चे हैं लेकिन कमाई का कोई स्थायी साधन न होने के कारण दैनिक मजदूरी कर अपना पेट भरते हैं। कभी मंडी की आढ़तों पर आलू प्याज की बोरियां तो अन्य कामों में पसीना बहाकर दो वक्त की रोटी का जुगाड़ कर पाते हैं। कमोवेश यही हाल मोहल्ला शेर मोहम्मद के मोहम्मद कामिल व देशनगर के इसरार का है। पूछने पर बताया कि उन्हें नहीं पता श्रम विभाग क्या है और उनके लिए सरकार क्या कर रही है। उनका पूरा दिन तो मजदूरी कर दो पैसे कमाने में ही गुजर जाता है।
जिले में पंजीकृत हैं मात्र 52 हजार मजदूर
सरकार ने असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के कल्याण के लिए उ.प्र. भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार बोर्ड का गठन कर रखा है। इसका मकसद 18 से 60 वर्ष आयु के ऐसे असंगठित मजदूरों का श्रम विभाग में पंजीयन हो, जिन्होंने 90 दिन का निर्माण कार्य किया हो। मजदूर को प्रति वर्ष 50 रुपये पंजीयन शुल्क व 50 रुपये अंशदान के रूप में विभाग को अदा करने थे। पंजीकृत मजदूरों को 15 कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। श्रम प्रवर्तन अधिकारी डॉ. एमपी सिंह ने बताया कि वर्तमान में लगभग 52 हजार मजदूरों का पंजीकरण विभाग में हो चुका है। समय समय पर कैंप लगाकर मजदूरों को योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि पिछले एक साल में साइकिल वितरण सहित कई योजनाओं से मजदूरों को लाभ दिया जा चुका है।
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यह हैं योजनाएं
पंजीकृत मजदूरों की दुर्घटना में मृत्यु पर परिवार वालों को एक लाख रुपये, पूर्ण अपंगता पर 75 हजार और आंशिक अपंगता पर 40 हजार रुपये की सहायता देने का प्रावधान है। इसके अलावा मातृत्व हित लाभ, शिशु हितलाभ, मेधावी छात्र पुरस्कार, मृत्यु एवं अंत्येष्टि सहायता, एंबुलेंस सहायता, कौशल विकास तकनीकी उन्नयन एवं प्रमाणन, गंभीर बीमारी सहायता, पुत्री विवाह अनुदान, बालिका आशीर्वाद, अक्षमता पेंशन, औजार क्रय के लिए सहायता, स्वास्थ्य सहायता, सौर ऊर्जा और आवास सहायता योजना।
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शहर के मोहल्ला मदीना शाह निवासी 52 वर्षीय मुस्ताक के परिवार में पत्नी के अलावा छह बच्चे हैं लेकिन कमाई का कोई स्थायी साधन न होने के कारण दैनिक मजदूरी कर अपना पेट भरते हैं। कभी मंडी की आढ़तों पर आलू प्याज की बोरियां तो अन्य कामों में पसीना बहाकर दो वक्त की रोटी का जुगाड़ कर पाते हैं। कमोवेश यही हाल मोहल्ला शेर मोहम्मद के मोहम्मद कामिल व देशनगर के इसरार का है। पूछने पर बताया कि उन्हें नहीं पता श्रम विभाग क्या है और उनके लिए सरकार क्या कर रही है। उनका पूरा दिन तो मजदूरी कर दो पैसे कमाने में ही गुजर जाता है।
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जिले में पंजीकृत हैं मात्र 52 हजार मजदूर
सरकार ने असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के कल्याण के लिए उ.प्र. भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार बोर्ड का गठन कर रखा है। इसका मकसद 18 से 60 वर्ष आयु के ऐसे असंगठित मजदूरों का श्रम विभाग में पंजीयन हो, जिन्होंने 90 दिन का निर्माण कार्य किया हो। मजदूर को प्रति वर्ष 50 रुपये पंजीयन शुल्क व 50 रुपये अंशदान के रूप में विभाग को अदा करने थे। पंजीकृत मजदूरों को 15 कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। श्रम प्रवर्तन अधिकारी डॉ. एमपी सिंह ने बताया कि वर्तमान में लगभग 52 हजार मजदूरों का पंजीकरण विभाग में हो चुका है। समय समय पर कैंप लगाकर मजदूरों को योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि पिछले एक साल में साइकिल वितरण सहित कई योजनाओं से मजदूरों को लाभ दिया जा चुका है।
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यह हैं योजनाएं
पंजीकृत मजदूरों की दुर्घटना में मृत्यु पर परिवार वालों को एक लाख रुपये, पूर्ण अपंगता पर 75 हजार और आंशिक अपंगता पर 40 हजार रुपये की सहायता देने का प्रावधान है। इसके अलावा मातृत्व हित लाभ, शिशु हितलाभ, मेधावी छात्र पुरस्कार, मृत्यु एवं अंत्येष्टि सहायता, एंबुलेंस सहायता, कौशल विकास तकनीकी उन्नयन एवं प्रमाणन, गंभीर बीमारी सहायता, पुत्री विवाह अनुदान, बालिका आशीर्वाद, अक्षमता पेंशन, औजार क्रय के लिए सहायता, स्वास्थ्य सहायता, सौर ऊर्जा और आवास सहायता योजना।