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पत्नी की हत्या के आरोपी को आजीवन कारावास, जुर्माना

Fri, 21 Jan 2022 11:27 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 21 Jan 2022 11:27 PM IST
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life prison to murdorer of wife
पीलीभीत। स्पेशल जज आवश्यक वस्तु अधिनियम राजीव सिंह ने करीब सवा तीन साल पहले पत्नी के ऊपर मिट्टी का तेल डालकर उसे जलाने के आरोपी पति सरताज शाह को दोषी पाकर आजीवन कारावास और दस हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है।
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पूरनपुर कस्बा के मोहल्ला अहमदनगर निवासी सितार शाह की ओर से 18 नवंबर 2018 को पूरनपुर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। रिपोर्ट के अनुसार वादी की पुत्री सोनम बी की शादी 18 सितंबर 2017 को कस्बा पूरनपुर के मोहल्ला ढका निवासी सरताज शाह पुत्र बाबूशाह के साथ हुई थी। शादी के बाद से ही सरताज शाह अपनी पत्नी को परेशान करने लगा। सोनम बी अपने मायके में थी। 17 नवंबर 2018 को दिन में करीब 3:30 बजे आरोपी सरताज शाह सोनम बी के मायके में पहुंच गया। उस समय उसके परिवारी जन घर पर नहीं थे। सोनम बी को एक कमरे में ले जाकर उसके ऊपर मिट्टी का तेल डालकर सरताज शाह ने आग लगा दी। जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई ।शोरगुल पर मोहल्ले वाले मौके पर पहुंचे। तब तक आरोपी पति भाग गया। उसे उपचार के लिए पहले पूरनपुर अस्पताल ले गए। जहां से पीलीभीत अस्पताल रेफर कर दिया गया। पीलीभीत में उसका इलाज करीब तीन घंटे चला। हालत ज्यादा खराब होने पर हायर सेंटर रेफर किया गया। बेहतर उपचार के लिए हायर सेंटर ले जाने की तैयारी की गई। लेकिन इस बीच उसकी पीलीभीत में ही मौत हो गई। पुलिस ने घटना की रिपोर्ट दर्ज कर मृतका का पंचायत नामा भरा। उसका अंतिम परीक्षण भी कराया गया ।
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विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल हुआ। मामले की सुनवाई स्पेशल जज राजीव सिंह की अदालत में हुई। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने शुक्रवार को अपना फैसला सुनाया। आरोपी पति को दोषी पाकर आजीवन कारावास और दस हजार अर्थदंड से दंडित किया गया है। अर्थदंड न देने पर उसे एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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न्यायालय ने नहीं मानी फांसी देने की बात
सरकारी वकील की हैसियत से मनोज मिश्रा ने मजबूत ढंग से पैरवी की। उन्होंने तर्क दिया कि अभियुक्त का अपराध जघन्य है। उसे मृत्यु दंड दिया जाए। न्यायालय ने मृत्युदंड देने के तर्क को स्वीकार नहीं किया। न्यायालय ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ द्वारा जो निर्णय दिया गया है। उसके अनुसार यह मामला विरल से विरलतम मामले के अंतर्गत नहीं आता है। इसलिए आजीवन कारावास की सजा उचित है।
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