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कोरोना का खौफ: सरकारी दफ्तर सन्नाटे में, अफसर-कर्मचारियों की संख्या घटी
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पीलीभीत। कोरोना वायरस की दहशत से बाजार ही नहीं, सरकारी दफ्तरों में भी सन्नाटा पसरा है। सरकारी दफ्तरों मेें अफसर और कर्मचारियों की संख्या घट गई है। जो अफसर या कर्मचारी दफ्तर आ भी रहे हैं, वह मुंह पर मास्क बांधकर सावधानी बरत रहे हैं। अफसर और कर्मचारी अब एक दूसरे से हाथ मिलाने से भी परहेज कर रहे हैं। इसके अलावा कचहरी में भी कामकाज न के बराबर हो रहा है।
सरकारी दफ्तरों कलक्ट्रेट, विकास भवन, गन्ना विभाग, सिंचाई विभाग, पीडब्ल्यूडी, डाकघर, दूर संचार विभाग, पुलिस विभाग, तहसील, बेसिक शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा विभाग के अलावा नगर पालिका समेत कई अन्य सरकारी विभागों में अफसरों और कर्मचारियों ने आना काफी कम कर दिया है। तमाम अफसर अपने आवास से ही अधिकांश काम निपटा रहे हैं। कुछ एक कर्मचारी या अफसर अपने दफ्तर पहुंचते भी हैं, तो वह मास्क या सैनिटाइजर साथ में लाकर बेहद सावधानी बरत रहे हैं। अब सरकारी दफ्तरों में एक दूसरे से हाथ मिलाना पूरी तरह बंद है। हर किसी पर कोरोना का खौफ छाया हुआ है। दफ्तरों में अब भारतीय संस्कृति की पुरानी सभ्यता हाथ जोड़कर प्रणाम या नमस्ते का चलन एक बार फिर जोर-शोर से शुरू हो गया है। पुलिस थानों में भी अफसर और कर्मचारी इक्का- दुक्का ही दिखते हैं। अन्यथा अधिकांश फील्ड में होने की बात कहकर सुबह से बाहर निकल लेते हैं।
कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर आग नागरिक भी सावधानी बरत रहे हैं। बुधवार को सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय में मात्र 10 फरियादी ही अपनी समस्या रखने पहुंचे। अन्यथा रोजाना फरियादियों की संख्या अधिक रहती है। सिटी मजिस्ट्रेट अरुण कुमार सिंह ने बताया कि आम लोग जागरुक है। वह स्वयं भी भीड़ भाड़ से बच रहे हैं।
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बीएसए कार्यालय में काम करने वाले अधिकांश कर्मचारी बुधवार मास्क पहने नजर आए। यहां कर्मचारी एक दूसरे से सटकर बैठने ने भी बचते दिखे। बात करने पर कर्मचारियों ने बताया कि कोरोना हर जगह फैल रहा है। मास्क पहनना जरूरी है क्योंकि विभाग में बाहरी लोगों का भी आना जाना रहता है। बचाव ही बेहतर रास्ता है।
विकास भवन में सीडीओ कार्यालय समेत 32 से अधिक विभागों के दफ्तर हैं। इनमें अमूमन भीड़ भाड़ रहती है, लेकिन बुधवार को सीडीओ दफ्तर, डीआरडीए, समाज कल्याण, सहकारिता, मत्स्य समेत ज्यादातर विभागों में चंद स्टाफ ही था। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मास्क पहने थे।
कोरोना वायरस का आम नागरिकों में इस कदर खौफ है कि कर्मचारी दफ्तर आने के बाद भी दूसरे के पास बैठने से कतरा रहे हैं। नगरपालिका के लेखा अनुभाग में पूरा स्टाफ ही गायब दिखा। ईओ निशा मिश्रा भी थोड़ी ही देर अपने दफ्तर में बैठीं। नगरपालिका के अन्य दफ्तरों में भी इक्का दुक्का कर्मचारी ही बैठे दिखे।
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सरकारी दफ्तरों कलक्ट्रेट, विकास भवन, गन्ना विभाग, सिंचाई विभाग, पीडब्ल्यूडी, डाकघर, दूर संचार विभाग, पुलिस विभाग, तहसील, बेसिक शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा विभाग के अलावा नगर पालिका समेत कई अन्य सरकारी विभागों में अफसरों और कर्मचारियों ने आना काफी कम कर दिया है। तमाम अफसर अपने आवास से ही अधिकांश काम निपटा रहे हैं। कुछ एक कर्मचारी या अफसर अपने दफ्तर पहुंचते भी हैं, तो वह मास्क या सैनिटाइजर साथ में लाकर बेहद सावधानी बरत रहे हैं। अब सरकारी दफ्तरों में एक दूसरे से हाथ मिलाना पूरी तरह बंद है। हर किसी पर कोरोना का खौफ छाया हुआ है। दफ्तरों में अब भारतीय संस्कृति की पुरानी सभ्यता हाथ जोड़कर प्रणाम या नमस्ते का चलन एक बार फिर जोर-शोर से शुरू हो गया है। पुलिस थानों में भी अफसर और कर्मचारी इक्का- दुक्का ही दिखते हैं। अन्यथा अधिकांश फील्ड में होने की बात कहकर सुबह से बाहर निकल लेते हैं।
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कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर आग नागरिक भी सावधानी बरत रहे हैं। बुधवार को सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय में मात्र 10 फरियादी ही अपनी समस्या रखने पहुंचे। अन्यथा रोजाना फरियादियों की संख्या अधिक रहती है। सिटी मजिस्ट्रेट अरुण कुमार सिंह ने बताया कि आम लोग जागरुक है। वह स्वयं भी भीड़ भाड़ से बच रहे हैं।
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बीएसए कार्यालय में काम करने वाले अधिकांश कर्मचारी बुधवार मास्क पहने नजर आए। यहां कर्मचारी एक दूसरे से सटकर बैठने ने भी बचते दिखे। बात करने पर कर्मचारियों ने बताया कि कोरोना हर जगह फैल रहा है। मास्क पहनना जरूरी है क्योंकि विभाग में बाहरी लोगों का भी आना जाना रहता है। बचाव ही बेहतर रास्ता है।
विकास भवन में सीडीओ कार्यालय समेत 32 से अधिक विभागों के दफ्तर हैं। इनमें अमूमन भीड़ भाड़ रहती है, लेकिन बुधवार को सीडीओ दफ्तर, डीआरडीए, समाज कल्याण, सहकारिता, मत्स्य समेत ज्यादातर विभागों में चंद स्टाफ ही था। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मास्क पहने थे।
कोरोना वायरस का आम नागरिकों में इस कदर खौफ है कि कर्मचारी दफ्तर आने के बाद भी दूसरे के पास बैठने से कतरा रहे हैं। नगरपालिका के लेखा अनुभाग में पूरा स्टाफ ही गायब दिखा। ईओ निशा मिश्रा भी थोड़ी ही देर अपने दफ्तर में बैठीं। नगरपालिका के अन्य दफ्तरों में भी इक्का दुक्का कर्मचारी ही बैठे दिखे।