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माननीय ने हफ्ते भर से दबा रखी 25 करोड़ के विकास कार्यों की फाइल
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पीलीभीत। सरकार एक तरफ तो विकास का ढिंढोरा पीटती है। दूसरी ओर विकास कार्यों से संबंधी काम तरह तरह के कारणों से लटका दिए जाते हैं। जिला पंचायत में 25 करोड़ की लागत से 212 सड़क निर्माण कार्य संबंधी फाइल एक हफ्ते में जिला पंचायत अध्यक्ष की मेज पर पड़ी है। सदस्यों का आरोप है कि वह चहेते ठेकेदारों को काम देना चाहती हैं। क्लोजिंग ईयर खत्म होने में मात्र 42 दिन बचे हैं। ऐसे में वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले 212 सड़क निर्माण के काम कैसे हो पाएंगे। हालांकि अध्यक्ष आरोप को निराधार बताया है।
उत्तर प्रदेश में भले ही भाजपा सरकार हो, लेकिन जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर यहां सपा काबिज है। कुछ सदस्य तो दबी जुबान से यह भी कहते हैं कि प्रदेश भर में सपा और भाजपा भले ही राजनीतिक रूप से एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाकर विरोध में दिखते हों, लेकिन जिला पंचायत में तो सपा- भाजपा की मिलीजुली सरकार है। जिला पंचायत अध्यक्ष का विरोध भाजपा सदस्य नहीं करते। अपर मुख्य अधिकारी जागन लाल ने सीडीओ के अनुमोदन के पश्चात आठ दिन पहले जिला पंचायत अध्यक्ष के पास 212 सड़क निर्माण संबंधी फाइल अनुमोदन के लिए भेजी थी। इन कार्यों की लागत 25 करोड़ से अधिक है। क्लोजिंग ईयर नजदीक है। 31 मार्च से पहले काम कराने का दबाव है। अगर तय समय सीमा में काम नहीं करा पाए तो बजट वापस हो जाएगा।
सदस्यों का आरोप है कि यह सब जानते हुए भी अपने चहेतों को कामों का टेंडर दिलाने के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष ने एक हफ्ते से इस पत्रावली को अपने पास मंजूरी के नाम पर रोक रखा है। अभी तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया है। जिला पंचायत सदस्यों के अनुसार इस पत्रावली में कई काम 10 लाख रुपये से अधिक लागत के हैं। इनकी ई-टेंडरिंग होनी है। इसमें अच्छा खासा समय लगता है। वित्तीय वर्ष में मात्र 42 दिन बचे हैं। फिर भी इन कामों को मंजूरी नहीं मिल पा रही है। एक सदस्य ने नाम न प्रकाशित करने पर बताया कि फाइल में बहुत से कामों की लागत 10 लाख से कम है। यह काम अपने चहेते ठेकेदारों को देने के लिए पत्रावली मंजूर करने में जानबूझकर देर लगाई जा रही है ताकि वित्तीय वर्ष समाप्त होने में कम समय रह जाए। मनमाने तरीके से अपने चहेते ठेकेदारों को टेंडर देकर मोटा मुनाफा कमाया जा सके।
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पहले भी हो चुका है विवाद
जिला पंचायत अध्यक्ष आरती महेंद्र सपा सरकार में विधायक रहे पीतमराम की पुत्रवधु हैं, 13 जनवरी 2016 को वह जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं। पंचायत बोर्ड में 34 जिला पंचायत सदस्य हैं। सदस्यों में काम को लेकर हाय तौबा मची रहती है। पिछले साल भी जिला पंचायत में मात्र एक बैठक बुलाने पर विवाद हो चुका है। शासनादेश के मुताबिक पूरे साल में छह बैठकें होनी चाहिए। मगर, बोर्ड की केवल एक ही बैठक हुई। साढ़े चार साल के कार्यकाल में जिला पंचायत के अधिकतर काम पूरनपुर क्षेत्र में कराए गए ताकि भविष्य में उनका राजनीतिक फायदा लिया जा सके।
टेंडर नहीं हुए और कामों को छोटा कर दिया
25 करोड़ के प्रस्तावित सड़क निर्माण की पत्रावली से जुड़े एक और मामले की चर्चा है। जिला पंचायत सदस्यों का आरोप है कि पत्रावली इसलिए रोकी गई है ताकि 10 लाख से नीचे के काम अपने चहेते ठेकेदारों को दिए जा सकें। पत्रावली में चहेते सदस्यों के ज्यादा काम शामिल कर लिए गए हैं। अन्य सदस्यों के क्षेत्रों में नाममात्र के काम शामिल किए गए। नियम यह है कि बोर्ड सदस्यों के क्षेत्रों में समान रूप से काम शामिल किए जाएं।
प्रस्तावित विकास कार्यों की पत्रावली मुख्य विकास अधिकारी के अनुमोदन के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष को प्राप्त करा दी गई थी। अभी वह पत्रावली अध्यक्ष के पास ही लंबित है। जिला पंचायत अध्यक्ष के अनुमोदन के बाद ही 212 कामों की टेंडर प्रक्रिया चालू की जाएगी।
- जागन लाल, अपर मुख्य अधिकारी
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बोर्ड से प्रस्तावित 212 कामों की पत्रावली मेें कुछ तकनीकी खामियां पाई गई थीं। उन्हें दुरुस्त किया जा रहा है। दो-तीन दिन का समय और लगेगा। पत्रावली भेज दी जाएगी। टेंडरिंग से पहले चहेते ठेकेदारों को काम देने की बात पूरी तरह से निराधार है। प्रत्येक काम नियमानुसार कराए जा रहे हैं।
- आरती महेंद्र, जिला पंचायज अध्यक्ष
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उत्तर प्रदेश में भले ही भाजपा सरकार हो, लेकिन जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर यहां सपा काबिज है। कुछ सदस्य तो दबी जुबान से यह भी कहते हैं कि प्रदेश भर में सपा और भाजपा भले ही राजनीतिक रूप से एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाकर विरोध में दिखते हों, लेकिन जिला पंचायत में तो सपा- भाजपा की मिलीजुली सरकार है। जिला पंचायत अध्यक्ष का विरोध भाजपा सदस्य नहीं करते। अपर मुख्य अधिकारी जागन लाल ने सीडीओ के अनुमोदन के पश्चात आठ दिन पहले जिला पंचायत अध्यक्ष के पास 212 सड़क निर्माण संबंधी फाइल अनुमोदन के लिए भेजी थी। इन कार्यों की लागत 25 करोड़ से अधिक है। क्लोजिंग ईयर नजदीक है। 31 मार्च से पहले काम कराने का दबाव है। अगर तय समय सीमा में काम नहीं करा पाए तो बजट वापस हो जाएगा।
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सदस्यों का आरोप है कि यह सब जानते हुए भी अपने चहेतों को कामों का टेंडर दिलाने के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष ने एक हफ्ते से इस पत्रावली को अपने पास मंजूरी के नाम पर रोक रखा है। अभी तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया है। जिला पंचायत सदस्यों के अनुसार इस पत्रावली में कई काम 10 लाख रुपये से अधिक लागत के हैं। इनकी ई-टेंडरिंग होनी है। इसमें अच्छा खासा समय लगता है। वित्तीय वर्ष में मात्र 42 दिन बचे हैं। फिर भी इन कामों को मंजूरी नहीं मिल पा रही है। एक सदस्य ने नाम न प्रकाशित करने पर बताया कि फाइल में बहुत से कामों की लागत 10 लाख से कम है। यह काम अपने चहेते ठेकेदारों को देने के लिए पत्रावली मंजूर करने में जानबूझकर देर लगाई जा रही है ताकि वित्तीय वर्ष समाप्त होने में कम समय रह जाए। मनमाने तरीके से अपने चहेते ठेकेदारों को टेंडर देकर मोटा मुनाफा कमाया जा सके।
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पहले भी हो चुका है विवाद
जिला पंचायत अध्यक्ष आरती महेंद्र सपा सरकार में विधायक रहे पीतमराम की पुत्रवधु हैं, 13 जनवरी 2016 को वह जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं। पंचायत बोर्ड में 34 जिला पंचायत सदस्य हैं। सदस्यों में काम को लेकर हाय तौबा मची रहती है। पिछले साल भी जिला पंचायत में मात्र एक बैठक बुलाने पर विवाद हो चुका है। शासनादेश के मुताबिक पूरे साल में छह बैठकें होनी चाहिए। मगर, बोर्ड की केवल एक ही बैठक हुई। साढ़े चार साल के कार्यकाल में जिला पंचायत के अधिकतर काम पूरनपुर क्षेत्र में कराए गए ताकि भविष्य में उनका राजनीतिक फायदा लिया जा सके।
टेंडर नहीं हुए और कामों को छोटा कर दिया
25 करोड़ के प्रस्तावित सड़क निर्माण की पत्रावली से जुड़े एक और मामले की चर्चा है। जिला पंचायत सदस्यों का आरोप है कि पत्रावली इसलिए रोकी गई है ताकि 10 लाख से नीचे के काम अपने चहेते ठेकेदारों को दिए जा सकें। पत्रावली में चहेते सदस्यों के ज्यादा काम शामिल कर लिए गए हैं। अन्य सदस्यों के क्षेत्रों में नाममात्र के काम शामिल किए गए। नियम यह है कि बोर्ड सदस्यों के क्षेत्रों में समान रूप से काम शामिल किए जाएं।
प्रस्तावित विकास कार्यों की पत्रावली मुख्य विकास अधिकारी के अनुमोदन के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष को प्राप्त करा दी गई थी। अभी वह पत्रावली अध्यक्ष के पास ही लंबित है। जिला पंचायत अध्यक्ष के अनुमोदन के बाद ही 212 कामों की टेंडर प्रक्रिया चालू की जाएगी।
- जागन लाल, अपर मुख्य अधिकारी
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बोर्ड से प्रस्तावित 212 कामों की पत्रावली मेें कुछ तकनीकी खामियां पाई गई थीं। उन्हें दुरुस्त किया जा रहा है। दो-तीन दिन का समय और लगेगा। पत्रावली भेज दी जाएगी। टेंडरिंग से पहले चहेते ठेकेदारों को काम देने की बात पूरी तरह से निराधार है। प्रत्येक काम नियमानुसार कराए जा रहे हैं।
- आरती महेंद्र, जिला पंचायज अध्यक्ष