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नवजात की सेहत का ध्यान रखना हमारी जिम्मेदारी : सीएमओ
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पीलीभीत के गांधी प्रेक्षागृह में अमर उजाला के सहयोग से जॉनसंस बेबी कंपनी की ओर से आयोजित कार्यश
पीलीभीत। शिशुओं की देखभाल को जागरूकता कार्यक्रम के तहत अमर उजाला के सहयोग से जॉनसंस बेबी कंपनी ने बृहस्पतिवार को गांधी स्टेडियम स्थित प्रेक्षागृह में जॉनसन बेस्ट पहले पल से कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें सीएमओ और कंपनी के प्रतिनिधियों ने नवजात को नाजुक फूल बताते हुए विशेष देखभाल करने की सलाह दी।
मुख्य अतिथि सीएमओ डॉ. आलोक कुमार शर्मा ने अमर उजाला और जॉनसंस बेबी कंपनी के संयुक्त प्रयास सो सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ होती हैं। उन्हें बुलाकर सम्मान और उनके साथ इस तरह की चर्चा होना अच्छा प्रयास है। आशा कार्यकर्ता घर-घर सकारात्मक संदेश पहुंचाती हैं।
शिशु देखभाल पर उन्होंने कहा कि अच्छा करें तो परिणाम भी बेहतर होगा। जब शिशु स्वस्थ होगा तो शिशु मृत्युदर भी कम होगी। उन्होंने कहा कि गर्भवती होने की जानकारी होने पर तीसरे महीने में पंजीकरण हो जाना चाहिए। पंजीकरण के साथ ही शिशु की देखभाल शुरू हो जाती है। स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टर प्रसूता की समय-समय पर देखने के साथ जांच कराते रहते हैं।
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उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए है कि जब जच्चा स्वस्थ होगी, तब बच्चा भी स्वस्थ होगा। इससे यह भी फायदा मिलता है कि उच्च रिस्क वाली प्रसूता की पहचान हो जाती है और समय से उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। प्रसव के बाद बच्चे की श्वांस नली साफ करने के साथ तापमान का भी खास ध्यान रखा जाता है।
नवजात की सफाई, खानपान और सही तेल का इस्तेमाल करने से कुपोषण, डायरिया, निमोनिया और मिजिल्स जैसी बीमारी से बचाया जा सकता है।
जॉनसंस बेबी कंपनी से आए प्रतिनिधि मुनेंद्र कुमार तिवारी व सिटी टीम के अनूप कुमार के अलावा संचालक अपूर्वा मिश्रा ने एलईडी के माध्यम से आशा कार्यकर्ताओं को जॉनसंस बेबी कंपनी के उत्पाद, उसके प्रयोग से होने वाली शिशुओं में फायदों की विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान डीसीपीएम उत्तम कुमार के अलावा 250 आशा कार्यकर्ता मौजूद रहीं।
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चिकित्सकों ने किया जागरूक
कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचीं जेएमबी डिग्री कॉलेज व अस्पताल की न्यूट्रीशियन स्पेशलिस्ट गुंजन तिवारी ने कहा कि शुरुआती दो साल बच्चे के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं। 80 प्रतिशत मस्तिष्क का विकास इन दो सालों में हो जाता है। पहले के छह माह मां का दूध बच्चों के लिए पूरक का काम करता है। एसएस हॉस्पिटल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा अग्रवाल ने कहा कि गर्भावस्था के दौरान कई महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना होता है। जिसमें नियमित चिकित्सीय सलाह के साथ टीकाकरण करना न भूलें। जिला अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. हिना प्रकाश ने कहा कि बच्चों में प्रोटीन का पूरा ध्यान रख जाना चाहिए। बच्चों के रूटीन भोजन में फल और सब्जी को शामिल करना चाहिए।
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मुख्य अतिथि सीएमओ डॉ. आलोक कुमार शर्मा ने अमर उजाला और जॉनसंस बेबी कंपनी के संयुक्त प्रयास सो सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ होती हैं। उन्हें बुलाकर सम्मान और उनके साथ इस तरह की चर्चा होना अच्छा प्रयास है। आशा कार्यकर्ता घर-घर सकारात्मक संदेश पहुंचाती हैं।
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शिशु देखभाल पर उन्होंने कहा कि अच्छा करें तो परिणाम भी बेहतर होगा। जब शिशु स्वस्थ होगा तो शिशु मृत्युदर भी कम होगी। उन्होंने कहा कि गर्भवती होने की जानकारी होने पर तीसरे महीने में पंजीकरण हो जाना चाहिए। पंजीकरण के साथ ही शिशु की देखभाल शुरू हो जाती है। स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टर प्रसूता की समय-समय पर देखने के साथ जांच कराते रहते हैं।
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उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए है कि जब जच्चा स्वस्थ होगी, तब बच्चा भी स्वस्थ होगा। इससे यह भी फायदा मिलता है कि उच्च रिस्क वाली प्रसूता की पहचान हो जाती है और समय से उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। प्रसव के बाद बच्चे की श्वांस नली साफ करने के साथ तापमान का भी खास ध्यान रखा जाता है।
नवजात की सफाई, खानपान और सही तेल का इस्तेमाल करने से कुपोषण, डायरिया, निमोनिया और मिजिल्स जैसी बीमारी से बचाया जा सकता है।
जॉनसंस बेबी कंपनी से आए प्रतिनिधि मुनेंद्र कुमार तिवारी व सिटी टीम के अनूप कुमार के अलावा संचालक अपूर्वा मिश्रा ने एलईडी के माध्यम से आशा कार्यकर्ताओं को जॉनसंस बेबी कंपनी के उत्पाद, उसके प्रयोग से होने वाली शिशुओं में फायदों की विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान डीसीपीएम उत्तम कुमार के अलावा 250 आशा कार्यकर्ता मौजूद रहीं।
चिकित्सकों ने किया जागरूक
कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचीं जेएमबी डिग्री कॉलेज व अस्पताल की न्यूट्रीशियन स्पेशलिस्ट गुंजन तिवारी ने कहा कि शुरुआती दो साल बच्चे के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं। 80 प्रतिशत मस्तिष्क का विकास इन दो सालों में हो जाता है। पहले के छह माह मां का दूध बच्चों के लिए पूरक का काम करता है। एसएस हॉस्पिटल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा अग्रवाल ने कहा कि गर्भावस्था के दौरान कई महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना होता है। जिसमें नियमित चिकित्सीय सलाह के साथ टीकाकरण करना न भूलें। जिला अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. हिना प्रकाश ने कहा कि बच्चों में प्रोटीन का पूरा ध्यान रख जाना चाहिए। बच्चों के रूटीन भोजन में फल और सब्जी को शामिल करना चाहिए।