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प्रशासनिक लापरवाही के कारण बढ़ा बवाल
पीलीभ्ाीत ब्यूराो
Updated Wed, 24 May 2017 10:38 PM IST
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पुिललिस की बाइक जलाइऱ्ई गइऱ्ई।
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हाईवे से सटे 60 साल पुराने धार्मिक स्थल को तोड़े जाने के बाद शांति और भाईचारे के लिए पहचान रखने वाला जिला पीलीभीत पिछले 24 घंटे के भीतर दो बार सुलगा। एक दिन पहले आक्रोशित ग्रामीणों के हाईवे जाम लगाया था। जाम खुलवाने पहुंचे प्रशासनिक अफसर मामले को गंभीरता से निपटाने के बजाए पुलिस की लाठी के दम पर शांत कराने में जुटे रहे। ग्रामीणों की शिकायत को बिना जांच के ही गलत करार दे दिया गया। बुधवार सुबह भी ग्रामीणों के कलेक्ट्रेट न पहुंचने पर किसी प्रशासनिक अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर उनसे बात करने की जरूरत नहीं समझी। आस्था से जुड़ा मामला होने पर भी लगातार हो रही उपेक्षा से ग्रामीणों का गुस्सा बढ़ता गया। नतीजतन बुधवार शाम ग्रामीणों का आक्रोश हाईवे पर उपद्रव बनकर सामने आ गया।
डीएम के निर्देश पर प्रशासनिक टीम ने अतिक्रमण के नाम पर कार्रवाई की शुरूआत पूरनपुर हाईवे पर की। इसमें खास बात रही कि धार्मिक स्थल तोड़ने से पहले एक बार भी गांव के लोगों के साथ बैठकर उनको विश्वास में लेने की कोशिश नहीं की गई। मंदिर टूटने के बाद मामला आस्था से जुड़ा होने के कारण तूल पकड़ सकता है, बावजूद इसके लापरवाही बरती गई। वैधानिक प्रक्रिया को दरकिनार करने के साथ ही अचानक मंदिर को तुड़वा दिया गया। इसके बाद जनाक्रोश सड़कों पर दिखाई देने के बाद भी प्रशासनिक अधिकारी खुद को सही करार देने में जुटे रहे। उनकी ओर से विवाद को शांत कराने के लिए कोई पुख्ता कदम उठाने की कोशिश भी नहीं की गई। पहले दिन ग्रामीणों के सड़कों पर आने के बाद भी पुलिस ही मौके पर भीड़ से जूझती रही। दो घंटे बाद प्रशासनिक अफसर मौके पर पहुंचे। जबकि मामला सरकारी जमीन और धार्मिक स्थल से जुड़ा हुआ था। इसके बाद दूसरे दिन भी ग्रामीणों का आरोप है कि जो लोग एडीएम के आश्वासन पर डीएम से मुलाकात करने पहुंचे, उनके साथ कोई संतोषजनक व्यवहार नहीं किया गया। प्रशासनिक अधिकारी कभी मंदिर होने से इनकार करते रहे, तो कभी सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण ध्वस्त कराने को एक दम सही कार्रवाई कहकर टालते रहे। बुधवार को पूरे दिन दो दरोगा, दस सिपाही मौके पर तैनात रहे। समय-समय पर भीड़ के इकट्ठा होने की जानकारी मिलने पर भी सिर्फ पुलिस प्रशासन पर मामले को छोड़ दिया गया। सुबह से लेकर बवाल होने तक कोई प्रशासन का जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। जबकि तनाव को देखते हुए एक मजिस्ट्रेट की तैनाती की जानी चाहिए थी। पथराव लाठीचार्ज और आगजनी के बाद प्रशासनिक अफसरों की मौके पर आवाजाही शुरू हो सकी।
लापरवाही बरतने के आरोप गलत : डीएम
जिलाधिकारी शीतल वर्मा ने कहा कि उनसे मिलने लोग आए थे। उन्होंने उनसे अभिलेख मांगे थे, जो दिखा दिए गए। मौके पर कहीं पर भी मंदिर अभिलेखों में दर्ज नहीं है। मिलने आए लोगों से हुई बातचीत की वीडियोग्राफी भी कराई गई है। लापरवाही बरतने के लगाए जा रहे आरोप गलत है।
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एक महिला को पड़ गया दौरा, लाठी मारने का आरोप
बवाल की शुरूआत में ही प्रदर्शनकारियों में शामिल गायबोझ गांव की एक महिला को अचानक दौरा पड़ गया। जिसमें ग्रामीणों का आरोप था कि मौके पर मौजूद सिपाहियों ने उसको लाठी मारी है। जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ी। उसका नाम तो लोग नहीं बता सके, लेकिन इतना बताया कि वह तोड़े गए मंदिर में कीर्तन किया करती थी। प्रशासन की कार्रवाई के बाद से बदहवाश चल रही है।
पुलिस और प्रशासन रहा ग्रामीणों के टारगेट पर
बुधवार शाम को प्रदर्शन के उग्र होने के बाद वाहनों की हाईवे पर लंबी कतारें लगी हुई थी। पुलिस व प्रशासन के वाहनों को तलाश कर ग्रामीण तोड़फोड़ कर रहे थे। इस दौरान जाम में फंसे राहगीरों को ग्रामीणों ने नुकसान नहीं पहुंचाया। पहले जाम में फंसी एंबुलेंस को रास्ता देकर निकलवाया गया। इसके बाद मौके पर खड़े वाहनों के चालक व उसमें सवार लोगों को बेफ्रिक एक तरफ खड़ा रहने की चेतावनी दी गई। कुछ पब्लिक के वाहन भी पुलिस के धोखे में पकड़े गए, लेकिन पब्लिक का वाहन पता लगते ही उनको निकाल दिया गया। इससे स्पष्ट है कि कहीं न कहीं प्रशासन के प्रति आक्रोश लोगों में पनप रहा था।
राजनेताओं ने भी ग्रामीणों की नहीं ली सुध
पीलीभीत। जहां एक ओर प्रशासन की लापरवाही रही, वहीं राजनेता भी इस मामले में कन्नी काटते रहे। आगे आकर समाधान कराने की जहमत नहीं उठाई। अगर प्रशासनिक और राजनैतिक स्तर से आगे आकर कोई समाधान निकाला जाता तो आगजनी और पथराव तक नौबत नहीं पहुंचती। ऐसा नहीं किया राजनेताओं के पास ग्रामीणों ने गुहार नहीं लगाई। डीएम के संतोषजनक जवाब न देने पर ग्रामीण जनप्रतिनिधियों के पास भी पहुंचे। प्रशासन के बेसुध रवैये को लेकर नाराजगी जताई, लेकिन उनको अनसुना कर टाल दिया। पहले दिन जाम लगाकर अफसरों से आश्वासन दिलाने वाले हिंदू संगठन के नेता भी दूसरे दिन ग्रामीणों को आश्वस्त करने नहीं पहुंचे। अपनी राजनीति चमकाकर एक किनारे हो गए।
बच्चे से लेकर 60 साल के बुजुर्ग भी शामिल
मंदिर निर्माण की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे लोग एक गांव के नहीं आसपास के आधा दर्जन गांव के रहने वाले थे। इसमें दस साल के बच्चे से लेकर 60 साल का बुजुर्ग भी मंदिर के महंत बाबा राम गोपाल दास के साथ खड़ा नजर आया। उनका यही आरोप था कि उनकी सुनवाई प्रशासनिक स्तर से नहीं हो सकी, जिस कारण उनको सड़क पर आना पड़ा है।
इंस्पेक्टर बुलाते रहे फोर्स, लग गए कई घंटे
इंस्पेक्टर सुनगढ़ी हरगोविंद सिंह के साथ पांच तो दरोगा मनोज यादव के साथ दस सिपाही मौजूद थे। सूचना देकर फोर्स को बुलाया गया, लेकिन पुलिस बल आने में काफी देर लग गई। जब तक ग्रामीण हाईवे पर पूरी तरह काबिज होकर आगजनी कर चुके थे।
पुलिस ने शुरू की गांव में दबिशें
मौके से भाग निकले ग्रामीणों को पकड़ने के लिए और उन पर कानूनी शिकंजा कसने के लिए अधिकारियों ने कार्रवाई की शुरूआत कर दी है। जिले के कई थानाध्यक्ष एवं यूपी 100 की गाड़ियों, पीएसी एवं दफ्तरों के फोर्स को भी मौके पर बुला लिया है।
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डीएम के निर्देश पर प्रशासनिक टीम ने अतिक्रमण के नाम पर कार्रवाई की शुरूआत पूरनपुर हाईवे पर की। इसमें खास बात रही कि धार्मिक स्थल तोड़ने से पहले एक बार भी गांव के लोगों के साथ बैठकर उनको विश्वास में लेने की कोशिश नहीं की गई। मंदिर टूटने के बाद मामला आस्था से जुड़ा होने के कारण तूल पकड़ सकता है, बावजूद इसके लापरवाही बरती गई। वैधानिक प्रक्रिया को दरकिनार करने के साथ ही अचानक मंदिर को तुड़वा दिया गया। इसके बाद जनाक्रोश सड़कों पर दिखाई देने के बाद भी प्रशासनिक अधिकारी खुद को सही करार देने में जुटे रहे। उनकी ओर से विवाद को शांत कराने के लिए कोई पुख्ता कदम उठाने की कोशिश भी नहीं की गई। पहले दिन ग्रामीणों के सड़कों पर आने के बाद भी पुलिस ही मौके पर भीड़ से जूझती रही। दो घंटे बाद प्रशासनिक अफसर मौके पर पहुंचे। जबकि मामला सरकारी जमीन और धार्मिक स्थल से जुड़ा हुआ था। इसके बाद दूसरे दिन भी ग्रामीणों का आरोप है कि जो लोग एडीएम के आश्वासन पर डीएम से मुलाकात करने पहुंचे, उनके साथ कोई संतोषजनक व्यवहार नहीं किया गया। प्रशासनिक अधिकारी कभी मंदिर होने से इनकार करते रहे, तो कभी सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण ध्वस्त कराने को एक दम सही कार्रवाई कहकर टालते रहे। बुधवार को पूरे दिन दो दरोगा, दस सिपाही मौके पर तैनात रहे। समय-समय पर भीड़ के इकट्ठा होने की जानकारी मिलने पर भी सिर्फ पुलिस प्रशासन पर मामले को छोड़ दिया गया। सुबह से लेकर बवाल होने तक कोई प्रशासन का जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। जबकि तनाव को देखते हुए एक मजिस्ट्रेट की तैनाती की जानी चाहिए थी। पथराव लाठीचार्ज और आगजनी के बाद प्रशासनिक अफसरों की मौके पर आवाजाही शुरू हो सकी।
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लापरवाही बरतने के आरोप गलत : डीएम
जिलाधिकारी शीतल वर्मा ने कहा कि उनसे मिलने लोग आए थे। उन्होंने उनसे अभिलेख मांगे थे, जो दिखा दिए गए। मौके पर कहीं पर भी मंदिर अभिलेखों में दर्ज नहीं है। मिलने आए लोगों से हुई बातचीत की वीडियोग्राफी भी कराई गई है। लापरवाही बरतने के लगाए जा रहे आरोप गलत है।
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एक महिला को पड़ गया दौरा, लाठी मारने का आरोप
बवाल की शुरूआत में ही प्रदर्शनकारियों में शामिल गायबोझ गांव की एक महिला को अचानक दौरा पड़ गया। जिसमें ग्रामीणों का आरोप था कि मौके पर मौजूद सिपाहियों ने उसको लाठी मारी है। जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ी। उसका नाम तो लोग नहीं बता सके, लेकिन इतना बताया कि वह तोड़े गए मंदिर में कीर्तन किया करती थी। प्रशासन की कार्रवाई के बाद से बदहवाश चल रही है।
पुलिस और प्रशासन रहा ग्रामीणों के टारगेट पर
बुधवार शाम को प्रदर्शन के उग्र होने के बाद वाहनों की हाईवे पर लंबी कतारें लगी हुई थी। पुलिस व प्रशासन के वाहनों को तलाश कर ग्रामीण तोड़फोड़ कर रहे थे। इस दौरान जाम में फंसे राहगीरों को ग्रामीणों ने नुकसान नहीं पहुंचाया। पहले जाम में फंसी एंबुलेंस को रास्ता देकर निकलवाया गया। इसके बाद मौके पर खड़े वाहनों के चालक व उसमें सवार लोगों को बेफ्रिक एक तरफ खड़ा रहने की चेतावनी दी गई। कुछ पब्लिक के वाहन भी पुलिस के धोखे में पकड़े गए, लेकिन पब्लिक का वाहन पता लगते ही उनको निकाल दिया गया। इससे स्पष्ट है कि कहीं न कहीं प्रशासन के प्रति आक्रोश लोगों में पनप रहा था।
राजनेताओं ने भी ग्रामीणों की नहीं ली सुध
पीलीभीत। जहां एक ओर प्रशासन की लापरवाही रही, वहीं राजनेता भी इस मामले में कन्नी काटते रहे। आगे आकर समाधान कराने की जहमत नहीं उठाई। अगर प्रशासनिक और राजनैतिक स्तर से आगे आकर कोई समाधान निकाला जाता तो आगजनी और पथराव तक नौबत नहीं पहुंचती। ऐसा नहीं किया राजनेताओं के पास ग्रामीणों ने गुहार नहीं लगाई। डीएम के संतोषजनक जवाब न देने पर ग्रामीण जनप्रतिनिधियों के पास भी पहुंचे। प्रशासन के बेसुध रवैये को लेकर नाराजगी जताई, लेकिन उनको अनसुना कर टाल दिया। पहले दिन जाम लगाकर अफसरों से आश्वासन दिलाने वाले हिंदू संगठन के नेता भी दूसरे दिन ग्रामीणों को आश्वस्त करने नहीं पहुंचे। अपनी राजनीति चमकाकर एक किनारे हो गए।
बच्चे से लेकर 60 साल के बुजुर्ग भी शामिल
मंदिर निर्माण की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे लोग एक गांव के नहीं आसपास के आधा दर्जन गांव के रहने वाले थे। इसमें दस साल के बच्चे से लेकर 60 साल का बुजुर्ग भी मंदिर के महंत बाबा राम गोपाल दास के साथ खड़ा नजर आया। उनका यही आरोप था कि उनकी सुनवाई प्रशासनिक स्तर से नहीं हो सकी, जिस कारण उनको सड़क पर आना पड़ा है।
इंस्पेक्टर बुलाते रहे फोर्स, लग गए कई घंटे
इंस्पेक्टर सुनगढ़ी हरगोविंद सिंह के साथ पांच तो दरोगा मनोज यादव के साथ दस सिपाही मौजूद थे। सूचना देकर फोर्स को बुलाया गया, लेकिन पुलिस बल आने में काफी देर लग गई। जब तक ग्रामीण हाईवे पर पूरी तरह काबिज होकर आगजनी कर चुके थे।
पुलिस ने शुरू की गांव में दबिशें
मौके से भाग निकले ग्रामीणों को पकड़ने के लिए और उन पर कानूनी शिकंजा कसने के लिए अधिकारियों ने कार्रवाई की शुरूआत कर दी है। जिले के कई थानाध्यक्ष एवं यूपी 100 की गाड़ियों, पीएसी एवं दफ्तरों के फोर्स को भी मौके पर बुला लिया है।