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पहली अप्रैल में महंगी दवाइयां बढ़ाएंगी ‘दर्द’ इलाज करा रहे लोगों को सता रही चिंता
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पीलीभीत। एक अप्रैल से महंगी दवाइयां आम जनता का दर्द बढ़ाएंगी। एक साथ 10.76 फीसदी कीमतें बढ़ेंगी। सबसे ज्यादा परेशानी ऐसे मरीजों को होगी, जिन्हें रोज दवाओं का सेवन करना पड़ता है। ऐसे में महंगी दवाएं उनका बजट बिगाड़ देंगी।
रविवार को निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे मरीजों के तीमारदारों से बातचीत की तो उनकी चिंताएं भी साफ झलकने लगी। वे बोले कि जरूरी सामान और खाद्यान्न की महंगाई पहले ही कमर तोड़ रही है। दवाएं भी महंगी हो रही हैं। ऐसे में महंगाई से और हाल-बेहाल हो जाएंगे। बता दें कि एक अप्रैल से दर्द निवारक, विभिन्न संक्रमण, हृदय, किडनी और अस्थमा के मरीजों की 800 दवाओं की कीमतों में बढ़ोत्तरी हो रही है।
अस्पतालों में महंगी दवाएं खरीदने का किया जाता मजबूर
ज्यादातर प्राइवेट अस्पतालों में मेडिकल स्टोर संचालित हैं। डॉक्टर वही दवा मरीज को लिखते हैं, जो सिर्फ उनके मेडिकल स्टोर पर मिलती है। अगर उस सॉल्ट की दवा दूसरे मेडिकल से खरीद ली जाए तो डॉक्टर उसे मरीज को देने से साफ मना कर देते हैं। लोग मजबूर होकर अस्पताल के मेडिकल स्टोर से दवा लेकर मरीज को खिलाते हैं, जो उनको कई गुना महंगी पड़ती है।
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कमर टूट जाएगी
पिताजी को हृदय रोग की समस्या है। एक दिन में छह सौ रुपये की दवा दे चुके हैं। अगर ये दवाइयां और महंगी हो गईं तो हमारी कमर ही टूट जाएगी। दवाइयां तो पहले ही बहुत महंगी मिल रही हैं। - शांता प्रसाद, हैदरगंज गांव जहानाबाद
हम गरीबों का क्या होगा
एक रिश्तेदार अस्पताल में भर्ती हैं। दो दिन में ही दवाइयों का कई हजार का बिल बैठ गया। अगर अब दवाइयां और महंगी हो जाएंगी तो हम गरीब लोगों की तो हालात ही खराब हो जाएगी। - राधे श्याम, गांव सड़ा मरौरी
बहुत मुश्किल होगी
घर में आए दिन दवाओं की जरूरत पड़ती रहती है। इस वक्त ही दवाएं बहुत महंगी पड़ रही हैं। प्रिंट रेट पर सारी दवाइयां मिलती हैं। अगर और दाम बढ़ गए तो बहुत मुश्किल होगी। - अतुल महातिया, शहर निवासी
आम आदमी पर पड़ेगा असर
आज अखबार में पढ़ा दवाएं दस फीसदी महंगी हो रही। पैरासिटामोल जैसी दवा, जिसकी जरूरत आए दिन पड़ती रहती। इससे तो आम आदमी भी प्रभावित होगा। - दीपक अवस्थी, शहर निवासी
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प्राइवेट की जगह प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पर लें दवा
सीएमओ डॉ. आलोक कुमार शर्मा का कहना है कि जेनेरिक दवाएं लें, ये दवाएं प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पर काफी कम दामों में मिल सकती हैं। प्राइवेट अस्पताल में ब्रांड वाली कंपनियों की दवाएं दी जाती हैं, अगर वही सॉल्ट औषधि केंद्र पर मिल रहा है तो ज्दादा पैसे क्यों दें। उन्होंने कुछ दवाओं के उदाहरण देते हुए बताया कि ब्लड प्रेशर की जो दवा वह 55 रुपये में खरीद रहे थे वही उनको जेनेरिक में सिर्फ 13 रुपये में मिली। उन्होंने कुछ एंटीबायोटिक इंजेक्शन का उदाहरण देते हुए बताया कि जो इंजेक्शन मेडिकल स्टोर पर 4500 से 5000 हजार का मिलता है वही जेनेरिक में 235 का मिलता है। प्राइवेट में कई सौ गुना महंगी दवाएं होती हैं।
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रविवार को निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे मरीजों के तीमारदारों से बातचीत की तो उनकी चिंताएं भी साफ झलकने लगी। वे बोले कि जरूरी सामान और खाद्यान्न की महंगाई पहले ही कमर तोड़ रही है। दवाएं भी महंगी हो रही हैं। ऐसे में महंगाई से और हाल-बेहाल हो जाएंगे। बता दें कि एक अप्रैल से दर्द निवारक, विभिन्न संक्रमण, हृदय, किडनी और अस्थमा के मरीजों की 800 दवाओं की कीमतों में बढ़ोत्तरी हो रही है।
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अस्पतालों में महंगी दवाएं खरीदने का किया जाता मजबूर
ज्यादातर प्राइवेट अस्पतालों में मेडिकल स्टोर संचालित हैं। डॉक्टर वही दवा मरीज को लिखते हैं, जो सिर्फ उनके मेडिकल स्टोर पर मिलती है। अगर उस सॉल्ट की दवा दूसरे मेडिकल से खरीद ली जाए तो डॉक्टर उसे मरीज को देने से साफ मना कर देते हैं। लोग मजबूर होकर अस्पताल के मेडिकल स्टोर से दवा लेकर मरीज को खिलाते हैं, जो उनको कई गुना महंगी पड़ती है।
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कमर टूट जाएगी
पिताजी को हृदय रोग की समस्या है। एक दिन में छह सौ रुपये की दवा दे चुके हैं। अगर ये दवाइयां और महंगी हो गईं तो हमारी कमर ही टूट जाएगी। दवाइयां तो पहले ही बहुत महंगी मिल रही हैं। - शांता प्रसाद, हैदरगंज गांव जहानाबाद
हम गरीबों का क्या होगा
एक रिश्तेदार अस्पताल में भर्ती हैं। दो दिन में ही दवाइयों का कई हजार का बिल बैठ गया। अगर अब दवाइयां और महंगी हो जाएंगी तो हम गरीब लोगों की तो हालात ही खराब हो जाएगी। - राधे श्याम, गांव सड़ा मरौरी
बहुत मुश्किल होगी
घर में आए दिन दवाओं की जरूरत पड़ती रहती है। इस वक्त ही दवाएं बहुत महंगी पड़ रही हैं। प्रिंट रेट पर सारी दवाइयां मिलती हैं। अगर और दाम बढ़ गए तो बहुत मुश्किल होगी। - अतुल महातिया, शहर निवासी
आम आदमी पर पड़ेगा असर
आज अखबार में पढ़ा दवाएं दस फीसदी महंगी हो रही। पैरासिटामोल जैसी दवा, जिसकी जरूरत आए दिन पड़ती रहती। इससे तो आम आदमी भी प्रभावित होगा। - दीपक अवस्थी, शहर निवासी
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प्राइवेट की जगह प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पर लें दवा
सीएमओ डॉ. आलोक कुमार शर्मा का कहना है कि जेनेरिक दवाएं लें, ये दवाएं प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पर काफी कम दामों में मिल सकती हैं। प्राइवेट अस्पताल में ब्रांड वाली कंपनियों की दवाएं दी जाती हैं, अगर वही सॉल्ट औषधि केंद्र पर मिल रहा है तो ज्दादा पैसे क्यों दें। उन्होंने कुछ दवाओं के उदाहरण देते हुए बताया कि ब्लड प्रेशर की जो दवा वह 55 रुपये में खरीद रहे थे वही उनको जेनेरिक में सिर्फ 13 रुपये में मिली। उन्होंने कुछ एंटीबायोटिक इंजेक्शन का उदाहरण देते हुए बताया कि जो इंजेक्शन मेडिकल स्टोर पर 4500 से 5000 हजार का मिलता है वही जेनेरिक में 235 का मिलता है। प्राइवेट में कई सौ गुना महंगी दवाएं होती हैं।