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Pilibhit News: स्टाफ की कमी से नहीं संवर पा रही पशुओं की सेहत
Fri, 22 Sep 2023 12:47 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Fri, 22 Sep 2023 12:47 AM IST
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पीलीभीत। वर्षाकाल में पशुओं को बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण अभियान चलाया जाता है। गोआश्रय स्थलों में पशुओं की देखभाल और उनके इलाज का जिम्मा भी पशु चिकित्सा विभाग के पास ही है, लेकिन पर्याप्त स्टाफ न होने से व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पा रही है।
स्टाफ की कमी के चलते शासन की ओर से संचालित योजनाओं का पशु पालकों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। डॉक्टरों और कंपाउडरों की ही नहीं चतुर्थश्रेणी कर्मचारियों की भी कमी बनी हुई है। जिले में 16 पशु अस्पताल संचालित हैं। 29 छोटे अस्पताल भी हैं। जहानाबाद और न्यूरिया के पशु अस्पताल में चिकित्सक ही नहीं है।
पशु धन प्रसार अधिकारियों की भी कमी है। हर अस्पताल में एक कंपाउडर होना चाहिए लेकिन जिले में सिर्फ दो कंपाउंडर ही हैं। 39 चतुर्थश्रेणी कर्मियों के सापेक्ष मात्र 18 ही मौजूद हैं। ऐसे में पशु पालन विभाग की योजनाएं जिले में दम तोड़ती नजर आ रही हैं।
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टीकाकरण में भी आड़े आती है स्टाफ की कमी
बारिश के दौरान पशुओं में होने वाली तमाम प्रकार की बीमारियों की रोकथाम के लिए टीकाकरण कराया जाता है। टीमें गांवों में जाती हैं। यहां पर स्टाफ न होने से चिकित्सक पशु अस्पताल में खुद टीकाकरण करते हैं। गांवों में टीकाकरण सुचारु नहीं हो पाता है।
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स्टाफ की कमी बनी हुई है। शासन की योजनाओं के साथ ही विभागीय कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। अव्यवस्था बनी रहती है। स्टाफ को लेकर पत्राचार भी किया गया है। - डाॅ. अरविंद कुमार, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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स्टाफ की कमी के चलते शासन की ओर से संचालित योजनाओं का पशु पालकों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। डॉक्टरों और कंपाउडरों की ही नहीं चतुर्थश्रेणी कर्मचारियों की भी कमी बनी हुई है। जिले में 16 पशु अस्पताल संचालित हैं। 29 छोटे अस्पताल भी हैं। जहानाबाद और न्यूरिया के पशु अस्पताल में चिकित्सक ही नहीं है।
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पशु धन प्रसार अधिकारियों की भी कमी है। हर अस्पताल में एक कंपाउडर होना चाहिए लेकिन जिले में सिर्फ दो कंपाउंडर ही हैं। 39 चतुर्थश्रेणी कर्मियों के सापेक्ष मात्र 18 ही मौजूद हैं। ऐसे में पशु पालन विभाग की योजनाएं जिले में दम तोड़ती नजर आ रही हैं।
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टीकाकरण में भी आड़े आती है स्टाफ की कमी
बारिश के दौरान पशुओं में होने वाली तमाम प्रकार की बीमारियों की रोकथाम के लिए टीकाकरण कराया जाता है। टीमें गांवों में जाती हैं। यहां पर स्टाफ न होने से चिकित्सक पशु अस्पताल में खुद टीकाकरण करते हैं। गांवों में टीकाकरण सुचारु नहीं हो पाता है।
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स्टाफ की कमी बनी हुई है। शासन की योजनाओं के साथ ही विभागीय कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। अव्यवस्था बनी रहती है। स्टाफ को लेकर पत्राचार भी किया गया है। - डाॅ. अरविंद कुमार, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी