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गेहूं की बुआई शुरू पर डीएपी का संकट
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पीलीभीत मंडी समिति स्थित किसान सेवा केंद्र पर लगी किसानों की लंबी लाइन। संवाद
- फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। जिले में धान की कटाई लगभग निपट चुकी है और किसानों ने गेहूं की बुआई भी शुरू कर दी है। पिछले साल की तरह इस बार भी किसानों को डीएपी (खाद) रुलाने लगी है। उपलब्धता कम होने के कारण किसानों को डीएपी के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। इन दिनों अधिकतर सहकारी समितियों पर डीएपी उपलब्ध नहीं है। जिन समितियों पर खाद है वहां जरूरत के हिसाब से उपलब्धता बहुत कम है। जिन दुकानों पर डीएपी मौजूद है वहां कतार लग रही है।
बता दें कि शासन ने इस बार जिले के लिए यूरिया का लक्ष्य 56,600 एमटी (मीट्रिक टन) रखा है जबकि मौजूदा समय में जिले में 21,981 एमटी यूरिया उपलब्ध है। वहीं डीएपी के लिए 15,650 एमटी का लक्ष्य है जबकि यह 4612 एमटी मौजूद है। एनपीके का लक्ष्य 12,250 एमटी है जबकि उपलब्धता 4967 एमटी है। पिछले दिनों एनपीके की एक रैक जिले को मिली है। चूंकि एनपीके की कीमत डीएपी के मुकबाले ज्यादा है इसलिए किसान डीएपी को प्राथमिकता देते हैं।
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले को अभी डीएपी की रैक नहीं मिली है। नवंबर में रैक आने की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं जिन समितियों पर डीएपी नहीं है वहां बफर से 800 एमटी डीएपी भेजने की बात चल ही है।
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इफको के सेंटर पर लगी कतार
मंडी परिसर स्थित इफको सेंटर पर शुक्रवार को किसानों की लंबी कतार लगी नजर आई। ज्यादातर किसानों को एनपीके खाद दी गई। खाद लेने आए रविंद्र सिंह ने बताया कि गेहूं की बुआई करनी है। डीएपी लेने आए थे। डीएपी नहीं मिली तो एनपीके ली है। वहीं सूवा सिंह मंडी में धान बेचने आए थे। गेहूं बुआई के लिए एनपीके खरीदी। बोले कि डीएपी नहीं मिल रही है। पिछले साल भी बहुत परेशान होना पड़ा था। कतार में लगे किसान सूरज का कहना था कि डीएपी को लेकर इस बार भी मारामारी है। इफको के सेंटर पर आए हैं। यहां भी डीएपी नहीं मिली। तीन बैग एनपीके के खरीदे हैं।
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डीएम ने एआर को-ऑपरेटिव से मांगी रिपोर्ट
जिले में 76 सहकारी समितियां हैं। इन समितियों के माध्यम ने किसानों को उचित कीमतों पर खाद उपलब्ध कराई जाती है। समितियों की स्थिति को लेकर डीएम ने एआर को-ऑपरेटिव से रिपोर्ट मांगी है। किस समिति पर कितनी डीएपी, एनपीके, यूरिया और अन्य जरूरी उर्वरक कितनी मात्रा में है, उसका पूरा ब्योरा मांगा गया है।
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वर्जन
समितियों पर डीएपी की उपलब्धता को लेकर रिपोर्ट मांगी गई है। जिन समितियों पर खाद नहीं होगी वहां उपलब्ध कराई जाएगी। किसानों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा। नवंबर में डीएपी की रैक आने की उम्मीद है।
-प्रवीण कुमार लक्षकार, डीएम
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बता दें कि शासन ने इस बार जिले के लिए यूरिया का लक्ष्य 56,600 एमटी (मीट्रिक टन) रखा है जबकि मौजूदा समय में जिले में 21,981 एमटी यूरिया उपलब्ध है। वहीं डीएपी के लिए 15,650 एमटी का लक्ष्य है जबकि यह 4612 एमटी मौजूद है। एनपीके का लक्ष्य 12,250 एमटी है जबकि उपलब्धता 4967 एमटी है। पिछले दिनों एनपीके की एक रैक जिले को मिली है। चूंकि एनपीके की कीमत डीएपी के मुकबाले ज्यादा है इसलिए किसान डीएपी को प्राथमिकता देते हैं।
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विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले को अभी डीएपी की रैक नहीं मिली है। नवंबर में रैक आने की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं जिन समितियों पर डीएपी नहीं है वहां बफर से 800 एमटी डीएपी भेजने की बात चल ही है।
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इफको के सेंटर पर लगी कतार
मंडी परिसर स्थित इफको सेंटर पर शुक्रवार को किसानों की लंबी कतार लगी नजर आई। ज्यादातर किसानों को एनपीके खाद दी गई। खाद लेने आए रविंद्र सिंह ने बताया कि गेहूं की बुआई करनी है। डीएपी लेने आए थे। डीएपी नहीं मिली तो एनपीके ली है। वहीं सूवा सिंह मंडी में धान बेचने आए थे। गेहूं बुआई के लिए एनपीके खरीदी। बोले कि डीएपी नहीं मिल रही है। पिछले साल भी बहुत परेशान होना पड़ा था। कतार में लगे किसान सूरज का कहना था कि डीएपी को लेकर इस बार भी मारामारी है। इफको के सेंटर पर आए हैं। यहां भी डीएपी नहीं मिली। तीन बैग एनपीके के खरीदे हैं।
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डीएम ने एआर को-ऑपरेटिव से मांगी रिपोर्ट
जिले में 76 सहकारी समितियां हैं। इन समितियों के माध्यम ने किसानों को उचित कीमतों पर खाद उपलब्ध कराई जाती है। समितियों की स्थिति को लेकर डीएम ने एआर को-ऑपरेटिव से रिपोर्ट मांगी है। किस समिति पर कितनी डीएपी, एनपीके, यूरिया और अन्य जरूरी उर्वरक कितनी मात्रा में है, उसका पूरा ब्योरा मांगा गया है।
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वर्जन
समितियों पर डीएपी की उपलब्धता को लेकर रिपोर्ट मांगी गई है। जिन समितियों पर खाद नहीं होगी वहां उपलब्ध कराई जाएगी। किसानों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा। नवंबर में डीएपी की रैक आने की उम्मीद है।
-प्रवीण कुमार लक्षकार, डीएम