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पूर्व सांसद से केस वापस लेने का आदेश उनके निधन के बाद आया
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
Updated Mon, 21 Mar 2016 11:37 PM IST
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बरखेड़ा से वर्ष 1991 में लोकसभा सदस्य चुने गए डॉ. परशुराम गंगवार एवं उनके साथियों पर भी थाना बरखेड़ा पर आंदोलन के दौरान केस दर्ज हुआ था। उनके निधन के बाद अब उनसे केस वापसी का आदेश सरकार ने किया है। वहीं बीसलपुर विधायक रामसरन वर्मा का भी एक केस वापसी का आदेश आया है। हालांकि श्री वर्मा इस मामले में तीन महीना पहले कोर्ट से ही दोषमुक्त हो चुके हैं।
बरखेड़ा निवासी डॉ. परशुराम गंगवार और उनके साथियों पर राजनैतिक आंदोलन करने का मुकदमा दर्ज हुआ था। यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है। प्रशासन ने काफी पहले ही केस वापसी की रिपोर्ट सरकार को भेजी थी। आदेश आने में विलंब हो गया। इस दौरान डॉ. गंगवार का निधन हो गया। केस वापसी आदेश इसी सप्ताह प्राप्त हुआ। अभियोजन अधिकारी आरएस चौधरी ने आदेश आते ही कोर्ट में केस वापसी की अर्जी दाखिल कर दी है। दरअसल व्यक्ति के निधन के बाद भी आपराधिक मुकदमा तभी समाप्त होता है जब अदालत में संबंधित पुलिस यह आख्या दाखिल करती है कि विचाराधीन व्यक्ति का निधन हो चुका है। बहराल केस वापसी के आदेश के बाद पूर्व सांसद के समर्थकों को इस मामले से राहत मिलेगी।
इधर, सरकार ने बीसलपुर विधायक रामसरन वर्मा और उनके साथियों पर चल रहे मुकदमा वापसी का जो आदेश भेजा है उसमें वर्ष 2008 में बीसलपुर में दर्ज एक केस का उल्लेख है। रामलीला मेले के दौरान चाट विक्रेता सोनू की हत्या हो गई थी। आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर आंदोलन हुआ था। उसी समय पुलिस ने विधायक एवं उनके साथियों पर मामला दर्ज किया था। मामले की सुनवाई कोर्ट में हुई। अपर जिला जज कोर्ट से तीन माह पूर्व केस में निर्णय हो गया जिसमें साक्ष्य के अभाव में विधायक को दोष मुक्त किया जा चुका है।
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बरखेड़ा निवासी डॉ. परशुराम गंगवार और उनके साथियों पर राजनैतिक आंदोलन करने का मुकदमा दर्ज हुआ था। यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है। प्रशासन ने काफी पहले ही केस वापसी की रिपोर्ट सरकार को भेजी थी। आदेश आने में विलंब हो गया। इस दौरान डॉ. गंगवार का निधन हो गया। केस वापसी आदेश इसी सप्ताह प्राप्त हुआ। अभियोजन अधिकारी आरएस चौधरी ने आदेश आते ही कोर्ट में केस वापसी की अर्जी दाखिल कर दी है। दरअसल व्यक्ति के निधन के बाद भी आपराधिक मुकदमा तभी समाप्त होता है जब अदालत में संबंधित पुलिस यह आख्या दाखिल करती है कि विचाराधीन व्यक्ति का निधन हो चुका है। बहराल केस वापसी के आदेश के बाद पूर्व सांसद के समर्थकों को इस मामले से राहत मिलेगी।
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इधर, सरकार ने बीसलपुर विधायक रामसरन वर्मा और उनके साथियों पर चल रहे मुकदमा वापसी का जो आदेश भेजा है उसमें वर्ष 2008 में बीसलपुर में दर्ज एक केस का उल्लेख है। रामलीला मेले के दौरान चाट विक्रेता सोनू की हत्या हो गई थी। आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर आंदोलन हुआ था। उसी समय पुलिस ने विधायक एवं उनके साथियों पर मामला दर्ज किया था। मामले की सुनवाई कोर्ट में हुई। अपर जिला जज कोर्ट से तीन माह पूर्व केस में निर्णय हो गया जिसमें साक्ष्य के अभाव में विधायक को दोष मुक्त किया जा चुका है।
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