{"_id":"67607ed88a0a0b05220bb494","slug":"forest-security-has-become-hi-tech-range-finder-along-with-mobile-phone-will-be-the-support-pilibhit-news-c-121-1-pbt1009-127393-2024-12-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Pilibhit News: हाईटेक हुई जंगल की सुरक्षा... मोबाइल फोन के साथ रेंज फाइंडर बनेगा सहारा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Pilibhit News: हाईटेक हुई जंगल की सुरक्षा... मोबाइल फोन के साथ रेंज फाइंडर बनेगा सहारा
Tue, 17 Dec 2024 12:56 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Tue, 17 Dec 2024 12:56 AM IST
विज्ञापन
पीलीभीत। बदलते दौर में जंगल की सुरक्षा भी हाईटेक तरीके से करने पर जोर है। पीटीआर (पीलीभीत टाइगर रिजर्व) में एमएस ट्राइप एप से गश्त की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसके लिए एनटीसीए (राष्ट्रीय बाघ प्राधिकरण) की ओर से पीटीआर प्रशासन को 25 मोबाइल फोन और 14 रेंज फाइंडर उपलब्ध कराए गए हैं। यह वनकर्मियों को दिए जाएंगे।
73 हजार वर्ग हेक्टेयर में फैला पीलीभीत टाइगर रिजर्व का जंगल पांच वन रेंजों में बंटा है। जंगल में सुरक्षा के लिए प्रत्येक रेंज में वन रेंजर के अलावा दरोगा, वन रक्षक और वाॅचर की तैनाती की गई है। पीटीआर में वर्ष 2017-18 से एमएस ट्राइप एप के माध्यम से गश्त शुरू करवा दी गई थी। शुरुआत में गश्त पर गंभीरता बरती गई, लेकिन कुछ साल पहले इसका प्रयोग बंद हो गया।
अब राष्ट्रीय बाघ प्राधिकरण की ओर से पीटीआर को 25 मोबाइल फोन उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा 14 रेंज फाइंडर भी मिले हैं। डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि एमएस ट्राइप एप के जरिए गश्त को मजबूत कराया जाएगा। जल्द ही फील्ड स्टाफ को मोबाइल फोन वितरित कर जरूरी निर्देश दिए जाएंगे।
विज्ञापन
000
ये है एमएस ट्राइप गश्त की प्रक्रिया
गश्त के दौरान वनकर्मी मोबाइल पर एप के जरिए जीपीएस से जुड़ेंगे। जंगल में अवैध गतिविधियों के साथ बाघ समेत अन्य वन्यजीवों की मौजूदगी या पगचिह्न देख एप पर डाटा अपलोड किया जाएगा। मुख्यालय पर बैठे अधिकारी भी एमएस ट्राइप से गश्त करने वाले वनकर्मियों की लोकेशन और फीड किए गए डाटा भी देख सकेंगे।
विज्ञापन
73 हजार वर्ग हेक्टेयर में फैला पीलीभीत टाइगर रिजर्व का जंगल पांच वन रेंजों में बंटा है। जंगल में सुरक्षा के लिए प्रत्येक रेंज में वन रेंजर के अलावा दरोगा, वन रक्षक और वाॅचर की तैनाती की गई है। पीटीआर में वर्ष 2017-18 से एमएस ट्राइप एप के माध्यम से गश्त शुरू करवा दी गई थी। शुरुआत में गश्त पर गंभीरता बरती गई, लेकिन कुछ साल पहले इसका प्रयोग बंद हो गया।
विज्ञापन
अब राष्ट्रीय बाघ प्राधिकरण की ओर से पीटीआर को 25 मोबाइल फोन उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा 14 रेंज फाइंडर भी मिले हैं। डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि एमएस ट्राइप एप के जरिए गश्त को मजबूत कराया जाएगा। जल्द ही फील्ड स्टाफ को मोबाइल फोन वितरित कर जरूरी निर्देश दिए जाएंगे।
विज्ञापन
000
ये है एमएस ट्राइप गश्त की प्रक्रिया
गश्त के दौरान वनकर्मी मोबाइल पर एप के जरिए जीपीएस से जुड़ेंगे। जंगल में अवैध गतिविधियों के साथ बाघ समेत अन्य वन्यजीवों की मौजूदगी या पगचिह्न देख एप पर डाटा अपलोड किया जाएगा। मुख्यालय पर बैठे अधिकारी भी एमएस ट्राइप से गश्त करने वाले वनकर्मियों की लोकेशन और फीड किए गए डाटा भी देख सकेंगे।