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Pilibhit News: हर छात्र को मिलेगा मेंटर, रैगिंग पर जीरो टॉलरेंस
Mon, 27 Jul 2026 11:46 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Mon, 27 Jul 2026 11:46 PM IST
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मेडिकल कॉलेज में बैठक की अध्यक्षता करते प्राचार्य। स्रोत- मेडिकल कॉलेज
पीलीभीत। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में नए प्राचार्य डॉ. अमित कुमार ने सोमवार को विभागाध्यक्षों और प्रभारी अधिकारियों के साथ व्यापक समीक्षा बैठक की। संस्थान की शैक्षणिक, प्रशासनिक और चिकित्सीय व्यवस्थाओं को और मजबूत बनाने के लिए कई अहम फैसले लिए। बैठक में छात्र सुरक्षा, महिला सुरक्षा, अनुशासन, मानसिक स्वास्थ्य, रोगी सेवाओं की गुणवत्ता और प्रशासनिक पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया।
प्राचार्य ने स्पष्ट किया कि मेडिकल कॉलेज में विद्यार्थियों के हितों से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। सभी विभागाध्यक्षों को छात्रों के साथ नियमित संवाद बनाए रखने और उनकी शैक्षणिक, व्यक्तिगत व मानसिक समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। पैरामेडिकल छात्र-छात्राओं के लिए मेंटर-मेंटी प्रणाली शुरू करने का निर्णय लिया गया, जिसके तहत प्रत्येक विद्यार्थी को एक संकाय सदस्य का मार्गदर्शन मिलेगा।
बैठक में कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। पॉश आंतरिक शिकायत समिति, जेंडर हैरेसमेंट समिति और एंटी रैगिंग समिति की बैठकें अब प्रत्येक माह अनिवार्य रूप से आयोजित होंगी। प्राचार्य ने कहा कि महाविद्यालय परिसर में रैगिंग के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति का सख्ती से पालन किया जाएगा और किसी भी शिकायत पर तत्काल कार्रवाई होगी।
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विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए मनोचिकित्सा विभाग को प्रत्येक माह इंटरैक्टिव सत्र आयोजित करने के निर्देश दिए गए। इन सत्रों में तनाव प्रबंधन, नशामुक्ति, भावनात्मक सुदृढ़ता, व्यक्तित्व विकास और जीवन कौशल जैसे विषयों पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन दिया जाएगा।
हाल ही में पैरामेडिकल छात्र-छात्राओं से जुड़े प्रकरण के मद्देनजर बैठक में निर्णय लिया गया कि महाविद्यालय पुलिस विवेचना में पूरा सहयोग करेगा। भविष्य में प्रवेश लेने वाले सभी विद्यार्थियों का पुलिस सत्यापन भी अनिवार्य रूप से कराया जाएगा। बैठक में उप-प्राचार्य प्रो. डॉ. अरुण सिंह, प्रो. डॉ. प्रेमचंद्र श्रीवास्तव, प्रो. डॉ. विभूति गोयल, प्रो. डॉ. जगदम्बा सहित सभी विभागाध्यक्ष, वरिष्ठ चिकित्सक एवं प्रभारी अधिकारी मौजूद रहे।
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एक सप्ताह में पुलिस सत्यापन कराया जाए
बैठक में आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों के पुलिस सत्यापन पर भी सख्त रुख अपनाया गया। निर्देश दिए गए कि सभी कर्मचारियों का एक सप्ताह के भीतर सत्यापन कराया जाए। तय समय में सत्यापन पूरा नहीं होने पर संबंधित कर्मचारी का वेतन रोका जाएगा। साथ ही आउटसोर्स एजेंसियों को बिना पुलिस सत्यापन और अन्य वैधानिक औपचारिकताएं पूरी किए किसी भी कर्मचारी की नियुक्ति न करने के निर्देश दिए गए।
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प्राचार्य ने स्पष्ट किया कि मेडिकल कॉलेज में विद्यार्थियों के हितों से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। सभी विभागाध्यक्षों को छात्रों के साथ नियमित संवाद बनाए रखने और उनकी शैक्षणिक, व्यक्तिगत व मानसिक समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। पैरामेडिकल छात्र-छात्राओं के लिए मेंटर-मेंटी प्रणाली शुरू करने का निर्णय लिया गया, जिसके तहत प्रत्येक विद्यार्थी को एक संकाय सदस्य का मार्गदर्शन मिलेगा।
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बैठक में कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। पॉश आंतरिक शिकायत समिति, जेंडर हैरेसमेंट समिति और एंटी रैगिंग समिति की बैठकें अब प्रत्येक माह अनिवार्य रूप से आयोजित होंगी। प्राचार्य ने कहा कि महाविद्यालय परिसर में रैगिंग के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति का सख्ती से पालन किया जाएगा और किसी भी शिकायत पर तत्काल कार्रवाई होगी।
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विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए मनोचिकित्सा विभाग को प्रत्येक माह इंटरैक्टिव सत्र आयोजित करने के निर्देश दिए गए। इन सत्रों में तनाव प्रबंधन, नशामुक्ति, भावनात्मक सुदृढ़ता, व्यक्तित्व विकास और जीवन कौशल जैसे विषयों पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन दिया जाएगा।
हाल ही में पैरामेडिकल छात्र-छात्राओं से जुड़े प्रकरण के मद्देनजर बैठक में निर्णय लिया गया कि महाविद्यालय पुलिस विवेचना में पूरा सहयोग करेगा। भविष्य में प्रवेश लेने वाले सभी विद्यार्थियों का पुलिस सत्यापन भी अनिवार्य रूप से कराया जाएगा। बैठक में उप-प्राचार्य प्रो. डॉ. अरुण सिंह, प्रो. डॉ. प्रेमचंद्र श्रीवास्तव, प्रो. डॉ. विभूति गोयल, प्रो. डॉ. जगदम्बा सहित सभी विभागाध्यक्ष, वरिष्ठ चिकित्सक एवं प्रभारी अधिकारी मौजूद रहे।
एक सप्ताह में पुलिस सत्यापन कराया जाए
बैठक में आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों के पुलिस सत्यापन पर भी सख्त रुख अपनाया गया। निर्देश दिए गए कि सभी कर्मचारियों का एक सप्ताह के भीतर सत्यापन कराया जाए। तय समय में सत्यापन पूरा नहीं होने पर संबंधित कर्मचारी का वेतन रोका जाएगा। साथ ही आउटसोर्स एजेंसियों को बिना पुलिस सत्यापन और अन्य वैधानिक औपचारिकताएं पूरी किए किसी भी कर्मचारी की नियुक्ति न करने के निर्देश दिए गए।