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Pilibhit News: चार जोन में बंटेगा इमरजेंसी वार्ड, मिलेगा बेहतर उपचार
Sun, 26 Jan 2025 01:30 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Sun, 26 Jan 2025 01:30 AM IST
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शहर के जिला चिकित्सालय में नई इमरजेंसी।संवाद
पीलीभीत। जिला अस्पताल में बन रहे नए इमरजेंसी वार्ड को चार जोन में बांटकर मरीजों का इलाज किया जाएगा। इससे मरीजों को बेहतर उपचार मिलेगा। प्रयास रहेगा कि गंभीर मरीजों को हायर सेंटर न भेजा जाए।
जिला अस्पताल के मेडिकल कॉलेज में संबद्ध होने के बाद एनएमसी के मानकों के अनुसार 40 बेड का इमरजेंसी वार्ड बनाया जा रहा है। इसमें अत्याधुनिक सुविधाएं दी गई हैं। मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने के क्रम में इन्हें चार जोन में विभाजित किया गया है।
यहां ट्राईज एरिया, रेड जोन, यलो और ग्रीन जोन बनाया गया है। प्रत्येक जोन में दस-दस बेड आरक्षित किए गए हैं। उपचार के लिए पहुंचने वाले मरीजों की बीमारी की गंभीरता को देखते हुए संबंधित जोन में भर्ती किया जाएगा। सीएमएस डॉ. रमाकांत सागर ने बताया कि इससे मरीजों को बेहतर उपचार दिया जा सके।
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कम मरीज होंगे रेफर40 बेड का नया इमरजेंसी वार्ड बनने से मरीजों को काफी सहूलियत मिलेगी। जिले में बड़ा हादसा होने पर मरीजों को भर्ती करने में काफी दिक्कत होती थी। ऐसे में यहां से मरीज रेफर कर दिए जाते थे। नया इमरजेंसी वार्ड शुरू होने के बाद ज्यादातर मरीजों का उपचार स्थानीय स्तर पर ही हो सकेगा। ऐसे में रेफर होने वाले मरीजों की संख्या भी कम हो जाएगी।
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जिला अस्पताल के मेडिकल कॉलेज में संबद्ध होने के बाद एनएमसी के मानकों के अनुसार 40 बेड का इमरजेंसी वार्ड बनाया जा रहा है। इसमें अत्याधुनिक सुविधाएं दी गई हैं। मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने के क्रम में इन्हें चार जोन में विभाजित किया गया है।
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यहां ट्राईज एरिया, रेड जोन, यलो और ग्रीन जोन बनाया गया है। प्रत्येक जोन में दस-दस बेड आरक्षित किए गए हैं। उपचार के लिए पहुंचने वाले मरीजों की बीमारी की गंभीरता को देखते हुए संबंधित जोन में भर्ती किया जाएगा। सीएमएस डॉ. रमाकांत सागर ने बताया कि इससे मरीजों को बेहतर उपचार दिया जा सके।
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कम मरीज होंगे रेफर40 बेड का नया इमरजेंसी वार्ड बनने से मरीजों को काफी सहूलियत मिलेगी। जिले में बड़ा हादसा होने पर मरीजों को भर्ती करने में काफी दिक्कत होती थी। ऐसे में यहां से मरीज रेफर कर दिए जाते थे। नया इमरजेंसी वार्ड शुरू होने के बाद ज्यादातर मरीजों का उपचार स्थानीय स्तर पर ही हो सकेगा। ऐसे में रेफर होने वाले मरीजों की संख्या भी कम हो जाएगी।