{"_id":"6a8b55c52c265e64080a93ba","slug":"efforts-to-increase-womens-participation-in-dairy-products-pilibhit-news-c-121-1-pbt1005-167215-2026-08-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Pilibhit News: दुग्ध उत्पादों में महिलाओं की सहभागिता बढ़ाने की कवायद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Pilibhit News: दुग्ध उत्पादों में महिलाओं की सहभागिता बढ़ाने की कवायद
विज्ञापन
पीलीभीत। जिले में दुग्ध उत्पादों के निर्माण और कारोबार में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की कवायद शुरू कर दी गई है। इसके लिए विभागीय स्तर पर कार्ययोजना तैयार की जा रही है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को दुग्ध उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण दिलाया जाएगा, जिससे वे उत्पाद तैयार कर स्वरोजगार से जुड़ सके।
अधिकारियों के मुताबिक, महिलाओं को प्रशिक्षण देने के लिए सहकारी दूध उत्पादों की फैक्टरी के विशेषज्ञों से संवाद किया जाएगा। फैक्टरी के विशेषज्ञों के माध्यम से महिलाओं को दूध से पनीर, खोया, घी, दही समेत अन्य उत्पाद तैयार करने की प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी।
प्रशिक्षण में उत्पादों की गुणवत्ता, स्वच्छता, पैकेजिंग और विपणन से जुड़ी जानकारी भी देने की योजना है। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि जिले में बड़ी संख्या में महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। इनमें से कई महिलाएं पहले से ही विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से स्वरोजगार कर रही हैं। दुग्ध उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण मिलने के बाद उन्हें आय का एक और साधन मिल सकेगा। साथ ही स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले दुग्ध उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे।
विज्ञापन
प्रशिक्षण के लिए समूहों की महिलाओं का चयन उनकी रुचि और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर किए जाने की तैयारी है। राष्ट्रीय आजीविका मिशन की उपायुक्त वंदना ने बताया कि दुग्ध उत्पादों के क्षेत्र में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की सहभागिता बढ़ाने के लिए पहल की जा रही है। महिलाओं को प्रशिक्षण दिलाने की योजना है। संवाद
विज्ञापन
अधिकारियों के मुताबिक, महिलाओं को प्रशिक्षण देने के लिए सहकारी दूध उत्पादों की फैक्टरी के विशेषज्ञों से संवाद किया जाएगा। फैक्टरी के विशेषज्ञों के माध्यम से महिलाओं को दूध से पनीर, खोया, घी, दही समेत अन्य उत्पाद तैयार करने की प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी।
विज्ञापन
प्रशिक्षण में उत्पादों की गुणवत्ता, स्वच्छता, पैकेजिंग और विपणन से जुड़ी जानकारी भी देने की योजना है। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि जिले में बड़ी संख्या में महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। इनमें से कई महिलाएं पहले से ही विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से स्वरोजगार कर रही हैं। दुग्ध उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण मिलने के बाद उन्हें आय का एक और साधन मिल सकेगा। साथ ही स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले दुग्ध उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे।
विज्ञापन
प्रशिक्षण के लिए समूहों की महिलाओं का चयन उनकी रुचि और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर किए जाने की तैयारी है। राष्ट्रीय आजीविका मिशन की उपायुक्त वंदना ने बताया कि दुग्ध उत्पादों के क्षेत्र में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की सहभागिता बढ़ाने के लिए पहल की जा रही है। महिलाओं को प्रशिक्षण दिलाने की योजना है। संवाद