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स्थापना के पांच दशक बाद जागा उपाधि महाविद्यालय, नैक निरीक्षण कराने को जुटा
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पीलीभीत। उपाधि महाविद्यालय अपनी स्थापना के 57 साल गुजरने के बाद भी यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) से नैक (राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद) निरीक्षण नहीं करवा सका। इधर अब महाविद्यालय प्रशासन नैक निरीक्षण को लेकर कमर कस चुका है। इसके लिए बाकायदा एक कमेटी का भी गठन किया जा चुका है और महाविद्यालय में नैक मानक के अनुरूप कार्य शुरू कराए गए हैं।
जनपद के एकमात्र अशासकीय सहायता प्राप्त उपाधि महाविद्यालय की स्थापना वर्ष 1964 में हुई थी। खास बात यह है कि स्थापना के 57 साल गुजरने के बाद भी महाविद्यालय के विकास की गति की ओर कभी किसी ने ध्यान ही नहीं दिया। कई बार प्रबंध कमेटी जोरशोर से अस्तित्व में आई, मगर वह भी महाविद्यालय का भला करने में सफल नहीं हो सकी। लंबे अरसे तक प्राचार्यों की तैनाती भी आयोग से न होकर स्थानीय स्तर पर ही होती रही। जिसकी वजह से महाविद्यालय का प्रशासन कभी सशक्त नहीं हो सका। निर्णय लेने की क्षमता के अभाव में समय बीतता गया और नैक निरीक्षण की ओर किसी ने ध्यान ही नहीं दिया। नैक निरीक्षण न होने के चलते यूजीसी द्वारा भी कोई ग्रांट नहीं मिल सकी। हालांकि बीच-बीच में नैक निरीक्षण के प्रयास किए गए, मगर मामला अधर में फंसता रहा। इधर अब मौजूदा प्राचार्य डॉ. अंग्रेज सिंह ने प्रबंध कमेटी के सहयोग से चालू शैक्षिक सत्र में यूजीसी से नैक निरीक्षण करवाने को कमर कसी है। इसके लिए प्राचार्य की देखरेख में कमेटी का भी गठन किया जा चुका है। इसमें डॉ. सतेंद्र नारायण प्रभारी, डॉ. प्रणव शर्मा, डॉ. अनुपम पांडेय, डॉ. अमित कुमार और डॉ. सौरभ वर्मा को सदस्य पद की जिम्मेदारी दी गई है।
कंट्रोलर की नियुक्ति के बाद बिगड़ती गई स्थिति
उपाधि महाविद्यालय में अनियमितताओं के चलते महाविद्यालय की प्रबंध समिति को वर्ष 2004 में शासन ने भंग कर दिया था। इसके बाद कंट्रोलर की नियुक्ति की गई। ठीक छह साल बाद प्रबंध कमेटी का पुन: चुनाव हुआ, मगर विश्वविद्यालय स्तर पर इसको लेकर सहमति नहीं प्रदान की गई। इस बीच महाविद्यालय में शिक्षण कार्य के साथ-साथ अन्य व्यवस्थाएं भी पटरी से उतरती चली गई। महाविद्यालय के खस्ताहाल को देख प्रबंध समिति के पूर्व पदाधिकारियों ने एक बार फिर जोर आजमाइश की। इस पर विश्वविद्यालय द्वारा अनुमति मिलने के बाद वर्ष 2015 में महाविद्यालय में प्रबंध समिति का पुन: गठन किया गया है और प्रबंध समिति महाविद्यालय में परिवर्तन कर महाविद्यालय को पुन: अस्तित्व में लाने के प्रयास में जुटी है।
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इसी सत्र में नैक निरीक्षण की तैयारी
यूजीसी के मुताबिक वर्ष 2022 तक सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को नैक के मानकों पर खरा उतरना होगा। इसके तहत उन्हें नैक के कुल स्कोर में से आधे से ज्यादा स्कोर हासिल करना होगा। इसके बाद महाविद्यालय प्रशासन और प्रबंधक कमेटी नैक निरीक्षण की तैयारी को लेकर कमर कस चुके हैं। महाविद्यालय की पुरानी जर्जर हो चुकी बिजली फीटिंग से लेकर भवन का रख-रखाव, लाइब्रेरी का उच्चीकरण, प्राइवेट विद्यार्थियों के लिए अलग से एकल विंडो, सौंदर्यीकरण, गर्ल्स कॉमन रूम आदि पर तेजी से काम शुरू हो चुका है। कुल मिलाकर नैक निरीक्षण के सभी मानकों को पूरा करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसमें स्टाफ भी खासी भूमिका निभाता नजर आ रहा है।
स्थायी प्रवक्ताओं की अभी भी कमी
महाविद्यालय में सृजित 25 स्थायी प्रवक्ता पदों के सापेक्ष 12 प्रवक्ता ही तैनात है। खास बात यह है कि यहां स्नातक स्तर पर शिक्षाशास्त्र और अंग्रेजी का कोई प्रवक्ता ही नहीं है। यहां 14 सेल्फ फाइनेंस असिस्टेंट प्रोफेसर की भी तैनाती है। स्टाफ की यह स्थिति पिछले कई सालों से बनी हुई है।
नैक निरीक्षण को लेकर महाविद्यालय प्रशासन तैयारी में जुट चुका है। कमेटी भी बना दी गई है। महाविद्यालय प्रशासन प्रबंध कमेटी के सहयोग से सत्र के अंत तक नैक निरीक्षण कराने के प्रयास में जुटा है। मानक के अनुरूप कार्य भी शुरू कराए गए हैं।
- डॉ. अंग्रेज सिंह, प्राचार्य, उपाधि महाविद्यालय
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जनपद के एकमात्र अशासकीय सहायता प्राप्त उपाधि महाविद्यालय की स्थापना वर्ष 1964 में हुई थी। खास बात यह है कि स्थापना के 57 साल गुजरने के बाद भी महाविद्यालय के विकास की गति की ओर कभी किसी ने ध्यान ही नहीं दिया। कई बार प्रबंध कमेटी जोरशोर से अस्तित्व में आई, मगर वह भी महाविद्यालय का भला करने में सफल नहीं हो सकी। लंबे अरसे तक प्राचार्यों की तैनाती भी आयोग से न होकर स्थानीय स्तर पर ही होती रही। जिसकी वजह से महाविद्यालय का प्रशासन कभी सशक्त नहीं हो सका। निर्णय लेने की क्षमता के अभाव में समय बीतता गया और नैक निरीक्षण की ओर किसी ने ध्यान ही नहीं दिया। नैक निरीक्षण न होने के चलते यूजीसी द्वारा भी कोई ग्रांट नहीं मिल सकी। हालांकि बीच-बीच में नैक निरीक्षण के प्रयास किए गए, मगर मामला अधर में फंसता रहा। इधर अब मौजूदा प्राचार्य डॉ. अंग्रेज सिंह ने प्रबंध कमेटी के सहयोग से चालू शैक्षिक सत्र में यूजीसी से नैक निरीक्षण करवाने को कमर कसी है। इसके लिए प्राचार्य की देखरेख में कमेटी का भी गठन किया जा चुका है। इसमें डॉ. सतेंद्र नारायण प्रभारी, डॉ. प्रणव शर्मा, डॉ. अनुपम पांडेय, डॉ. अमित कुमार और डॉ. सौरभ वर्मा को सदस्य पद की जिम्मेदारी दी गई है।
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कंट्रोलर की नियुक्ति के बाद बिगड़ती गई स्थिति
उपाधि महाविद्यालय में अनियमितताओं के चलते महाविद्यालय की प्रबंध समिति को वर्ष 2004 में शासन ने भंग कर दिया था। इसके बाद कंट्रोलर की नियुक्ति की गई। ठीक छह साल बाद प्रबंध कमेटी का पुन: चुनाव हुआ, मगर विश्वविद्यालय स्तर पर इसको लेकर सहमति नहीं प्रदान की गई। इस बीच महाविद्यालय में शिक्षण कार्य के साथ-साथ अन्य व्यवस्थाएं भी पटरी से उतरती चली गई। महाविद्यालय के खस्ताहाल को देख प्रबंध समिति के पूर्व पदाधिकारियों ने एक बार फिर जोर आजमाइश की। इस पर विश्वविद्यालय द्वारा अनुमति मिलने के बाद वर्ष 2015 में महाविद्यालय में प्रबंध समिति का पुन: गठन किया गया है और प्रबंध समिति महाविद्यालय में परिवर्तन कर महाविद्यालय को पुन: अस्तित्व में लाने के प्रयास में जुटी है।
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इसी सत्र में नैक निरीक्षण की तैयारी
यूजीसी के मुताबिक वर्ष 2022 तक सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को नैक के मानकों पर खरा उतरना होगा। इसके तहत उन्हें नैक के कुल स्कोर में से आधे से ज्यादा स्कोर हासिल करना होगा। इसके बाद महाविद्यालय प्रशासन और प्रबंधक कमेटी नैक निरीक्षण की तैयारी को लेकर कमर कस चुके हैं। महाविद्यालय की पुरानी जर्जर हो चुकी बिजली फीटिंग से लेकर भवन का रख-रखाव, लाइब्रेरी का उच्चीकरण, प्राइवेट विद्यार्थियों के लिए अलग से एकल विंडो, सौंदर्यीकरण, गर्ल्स कॉमन रूम आदि पर तेजी से काम शुरू हो चुका है। कुल मिलाकर नैक निरीक्षण के सभी मानकों को पूरा करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसमें स्टाफ भी खासी भूमिका निभाता नजर आ रहा है।
स्थायी प्रवक्ताओं की अभी भी कमी
महाविद्यालय में सृजित 25 स्थायी प्रवक्ता पदों के सापेक्ष 12 प्रवक्ता ही तैनात है। खास बात यह है कि यहां स्नातक स्तर पर शिक्षाशास्त्र और अंग्रेजी का कोई प्रवक्ता ही नहीं है। यहां 14 सेल्फ फाइनेंस असिस्टेंट प्रोफेसर की भी तैनाती है। स्टाफ की यह स्थिति पिछले कई सालों से बनी हुई है।
नैक निरीक्षण को लेकर महाविद्यालय प्रशासन तैयारी में जुट चुका है। कमेटी भी बना दी गई है। महाविद्यालय प्रशासन प्रबंध कमेटी के सहयोग से सत्र के अंत तक नैक निरीक्षण कराने के प्रयास में जुटा है। मानक के अनुरूप कार्य भी शुरू कराए गए हैं।
- डॉ. अंग्रेज सिंह, प्राचार्य, उपाधि महाविद्यालय