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साहब! यहां तो अब भी 200 स्कूलों में चूल्हे पर बन रहा मिड-डे मील
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पीलीभीत। शासन की ओर से सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा व स्वास्थ्य पर खासा जोर दिया जा रहा है, लेकिन हकीकत इसके उलट है। जिले में बेसिक शिक्षा विभाग के 1802 में से 200 से अधिक विद्यालय ऐसे हैं जिनके रसोईघरों में आज भी चूल्हे पर मिड डे मील बनाया जा रहा है। यह स्थिति तब है जब इन स्कूलों में मिड डे मील के नाम पर हर माह करीब एक करोड़ फूंके जा रहे हैं।
परिषदीय विद्यालयों में किचन शेड से लेकर अन्य संसाधन भी मुहैया कराए गए हैं, इसके बावजूद जिले के कई विद्यालयों को चूल्हों से मुक्ति नहीं मिल पाई है। मध्याह्न भोजन योजना के शुरुआती दौर में विद्यालयों में लकड़ी के ईंधन से ही मिड डे मील बनता था। जिससे एक तो शिक्षकों को ईंधन की समस्या होती थी, दूसरे चूल्हे से उठने वाला धुआं बच्चों की सेहत पर असर डालता है। इन विद्यालयों को धुएं से निजात दिलाने के लिए किचन उपकरण मद में भेजी गई धनराशि से गैस सिलिंडर व चूल्हा खरीदने का इंतजाम किया गया। जिले के अधिकतर विद्यालयों में गैस सिलिंडर व चूल्हे का इंतजाम है, लेकिन अब भी कई स्कूलों में गोबर के उपलों व लकड़ी के ईंधन से चूल्हे पर मिड डे मील बनाया जा रहा है।
जिले में 200 से अधिक स्कूल एलपीजी विहीन, सरकारी आंकड़ों में महज 66
जिले में करीब 200 स्कूल ऐसे हैं जहां चूल्हे पर मिड डे मील बन रहा है। जबकि सरकारी आंकड़ों में यह संख्या महज 66 है। इसमें न तो वे स्कूल शामिल किए गए हैं जिनके गैस सिलिंडर चोरी चले गए और न ही वे जहां किन्हीं कारणों से मिड डे मील नहीं बनाया जा रहा है।
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हेड मास्टर और प्रधानों के घरों में स्कूलों के गैस सिलिंडर
जिले के परिषदीय स्कूलों में अमूमन हर साल ही चोरी की घटनाएं प्रकाश में आती हैं। हेडमास्टर भी इसकी सूचना पुलिस को देने में कतई कोताही नहीं बरतते। अब आगे मिड डे मील कैसे बनेगा, इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। सूत्रों के मुताबिक जिले में एलपीजी विहीन स्कूलों के अलावा कई स्कूल ऐसे भी हैं, जहां इंतजाम होने के बाद भी चूल्हे पर मिड डे मील बनाया जा रहा है। इन स्कूलों के गैस सिलिंडर हेड मास्टर या फिर प्रधानों के घरों में प्रयोग किए जा रहे हैं।
कार्रवाई के नाम पर महज चेतावनी
इस संबंध में अगर कार्रवाई की बात करें तो महज मौखिक चेतावनी देदी जाती है। जिसके चलते जिम्मेदार शिक्षक इसको कोई तवज्जो नहीं देते।
निदेशालय को भेजी गई है सूचना
परिषदीय स्कूलों में गैस सिलिंडर और चूल्हे के लिए अलग से कोई बजट की व्यवस्था नहीं है। किचन उपकरण मद से ही इसकी खरीद होती है। निदेशालय स्तर पर एलपीजीविहीन विद्यालयों की सूचना मांगी गई थी। सूचना भेजी जा चुकी है।
- देवेंद्र स्वरूप, बीएसए
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परिषदीय विद्यालयों में किचन शेड से लेकर अन्य संसाधन भी मुहैया कराए गए हैं, इसके बावजूद जिले के कई विद्यालयों को चूल्हों से मुक्ति नहीं मिल पाई है। मध्याह्न भोजन योजना के शुरुआती दौर में विद्यालयों में लकड़ी के ईंधन से ही मिड डे मील बनता था। जिससे एक तो शिक्षकों को ईंधन की समस्या होती थी, दूसरे चूल्हे से उठने वाला धुआं बच्चों की सेहत पर असर डालता है। इन विद्यालयों को धुएं से निजात दिलाने के लिए किचन उपकरण मद में भेजी गई धनराशि से गैस सिलिंडर व चूल्हा खरीदने का इंतजाम किया गया। जिले के अधिकतर विद्यालयों में गैस सिलिंडर व चूल्हे का इंतजाम है, लेकिन अब भी कई स्कूलों में गोबर के उपलों व लकड़ी के ईंधन से चूल्हे पर मिड डे मील बनाया जा रहा है।
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जिले में 200 से अधिक स्कूल एलपीजी विहीन, सरकारी आंकड़ों में महज 66
जिले में करीब 200 स्कूल ऐसे हैं जहां चूल्हे पर मिड डे मील बन रहा है। जबकि सरकारी आंकड़ों में यह संख्या महज 66 है। इसमें न तो वे स्कूल शामिल किए गए हैं जिनके गैस सिलिंडर चोरी चले गए और न ही वे जहां किन्हीं कारणों से मिड डे मील नहीं बनाया जा रहा है।
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हेड मास्टर और प्रधानों के घरों में स्कूलों के गैस सिलिंडर
जिले के परिषदीय स्कूलों में अमूमन हर साल ही चोरी की घटनाएं प्रकाश में आती हैं। हेडमास्टर भी इसकी सूचना पुलिस को देने में कतई कोताही नहीं बरतते। अब आगे मिड डे मील कैसे बनेगा, इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। सूत्रों के मुताबिक जिले में एलपीजी विहीन स्कूलों के अलावा कई स्कूल ऐसे भी हैं, जहां इंतजाम होने के बाद भी चूल्हे पर मिड डे मील बनाया जा रहा है। इन स्कूलों के गैस सिलिंडर हेड मास्टर या फिर प्रधानों के घरों में प्रयोग किए जा रहे हैं।
कार्रवाई के नाम पर महज चेतावनी
इस संबंध में अगर कार्रवाई की बात करें तो महज मौखिक चेतावनी देदी जाती है। जिसके चलते जिम्मेदार शिक्षक इसको कोई तवज्जो नहीं देते।
निदेशालय को भेजी गई है सूचना
परिषदीय स्कूलों में गैस सिलिंडर और चूल्हे के लिए अलग से कोई बजट की व्यवस्था नहीं है। किचन उपकरण मद से ही इसकी खरीद होती है। निदेशालय स्तर पर एलपीजीविहीन विद्यालयों की सूचना मांगी गई थी। सूचना भेजी जा चुकी है।
- देवेंद्र स्वरूप, बीएसए