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Pilibhit News: खंडहर हो गया ई टॉयलेट तो मेडिकल कॉलेज के शौचालय के नहीं खुल सके ताले
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गन्ना तिराहे के पास बना ई-टॉयलेट । संवाद
पीलीभीत। गौहनिया चौराहे पर लोगों की सुविधा के लिए ई-टॉयलेट बनवाया गया था। शुरुआती दाैर में तो वह ठीक चला, लेकिन बीते दो साल से बंद पड़ा है। अब वहां पर हाल यह है कि खंडहर से वह कम नहीं है। इसी तरह से सीएसआर योजना के तहत मेडिकल कॉलेज में शौचालय बनवाया गया था, जो निर्माण के बाद से बंद पड़़ा है।
गौहनिया चौराहा शहर के बीच में होने के कारण यहां पर लोगों की आवाजाही काफी रहती है। अस्पताल आदि होने के कारण चहलकदमी भी रहती है। ऐसे में नगर पालिका की ओर से करीब आठ साल पहले ई-टॉयलेट बनवाया था। इसमें सुविधा दी गई थी कि एक रुपये का सिक्का डालने के बाद ही लोग उसका उपयोग कर सकते थे। निर्माण के बाद इसका संचालन होता रहा। उधर, करीब दो साल पहले मशीन में तकनीकि कमी आने से यह बंद हो गया था। तब से इसको ठीक कराने की किसी ने सुध ही नहीं ली है। हालत यह है कि वह धूल और कचरे से पट गया है। बताया जा रहा है कि बरेली से टेक्नीशियन को बुलाकर इसे ठीक कराया जाएगा।
तीन साल बाद भी नहीं खुल सके ताले
मेडिकल कॉलेज परिसर में आयुष विंग के पास वर्ष 2018-19 में भारतीय अक्षय उर्जा विकास समिति की सीएसआर योजना के तहत शौचालय का निर्माण कराया गया था। इसी के साथ आरओ वाटर और 30 स्ट्रीट लाइट का भी काम होना था। इसका तत्कालीन केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने उद्घाटन किया था। निर्माण के बाद अब तक शौचालय के ताले नहीं खुल सके हैं। शौचालय न खुलने से उसके आसपास अब अस्पताल का कूड़ा करकट डाला जाने लगा है।
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गौहनिया चौराहा शहर के बीच में होने के कारण यहां पर लोगों की आवाजाही काफी रहती है। अस्पताल आदि होने के कारण चहलकदमी भी रहती है। ऐसे में नगर पालिका की ओर से करीब आठ साल पहले ई-टॉयलेट बनवाया था। इसमें सुविधा दी गई थी कि एक रुपये का सिक्का डालने के बाद ही लोग उसका उपयोग कर सकते थे। निर्माण के बाद इसका संचालन होता रहा। उधर, करीब दो साल पहले मशीन में तकनीकि कमी आने से यह बंद हो गया था। तब से इसको ठीक कराने की किसी ने सुध ही नहीं ली है। हालत यह है कि वह धूल और कचरे से पट गया है। बताया जा रहा है कि बरेली से टेक्नीशियन को बुलाकर इसे ठीक कराया जाएगा।
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तीन साल बाद भी नहीं खुल सके ताले
मेडिकल कॉलेज परिसर में आयुष विंग के पास वर्ष 2018-19 में भारतीय अक्षय उर्जा विकास समिति की सीएसआर योजना के तहत शौचालय का निर्माण कराया गया था। इसी के साथ आरओ वाटर और 30 स्ट्रीट लाइट का भी काम होना था। इसका तत्कालीन केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने उद्घाटन किया था। निर्माण के बाद अब तक शौचालय के ताले नहीं खुल सके हैं। शौचालय न खुलने से उसके आसपास अब अस्पताल का कूड़ा करकट डाला जाने लगा है।

गन्ना तिराहे के पास बना ई-टॉयलेट । संवाद
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