{"_id":"63334a85f598eb06e6760fa7","slug":"dog-attack-pilibhit-news-bly499009464","type":"story","status":"publish","title_hn":"कुत्तों का आतंक, सालभर में 13 हजार लोगों को बनाया शिकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कुत्तों का आतंक, सालभर में 13 हजार लोगों को बनाया शिकार
सार
एक साल में 13 हजार लोग कुत्तों को शिकार बने हैं।सीएमएस डॉ. बीएस यादव ने बताया कि अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।जिस व्यक्ति को कुत्ता काट ले उसे चार एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाए जाते हैं।
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पीलीभीत जिला अस्पताल में बैठे कुत्ते। संवाद
- फोटो : PILIBHIT
विस्तार
पीलीभीत। शहर में कुत्तों का आतंक है। एक साल में 13 हजार लोग कुत्तों को शिकार बने हैं। इसमें महज पिछले आठ महीनों में (जनवरी से अगस्त तक) 7211 लोगों को रेबीज का इंजेक्शन लगवाने के लिए जिला अस्पताल में आना पड़ा है। यह वे लोग हैं जो अस्पताल पहुंचे, इसके अलावा भी काफी संख्या में लोग ऐसे हैं जिनको कुत्ते ने काटा पर वे एआरवी लगवाने के लिए नहीं गए। यहां बता दें बुधवार को विश्व रैबीज दिवस भी है।
वैसे तो गर्मी के मौसम में कुत्तों के काटने के ज्यादा मामले होते हैं लेकिन अगर जिला अस्पताल के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो जनवरी से अगस्त तक हर माह ही कुत्तों ने लोगों को शिकार बनाया है। स्थिति यह है कि रोजाना ही करीब 20 लोग कुत्तों के काटने पर जिला अस्पताल पहुंचते हैं। शहर में ही अब तक करीब सात हजार से ज्यादा लोगों को कुत्ते काट चुके हैं। देहात में यह आंकड़ा करीब छह हजार है। सीएमएस डॉ. बीएस यादव ने बताया कि अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। जिस व्यक्ति को कुत्ता काट ले उसे चार एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाए जाते हैं। एक उस दिन जिस दिन कुत्ते ने काटा हो, दूसरा काटने से तीसरे दिन, तीसरा सातवें और चौथा 28वें दिन टीका लगता है। उन्होंने बताया कि अगर किसी को कुत्ता गर्दन के ऊपर काटता है तो यह ज्यादा खतरनाक है। ऐसे लोगों को एआरवी के साथ-साथ इम्युनोग्लोबुलिन का डोज भी दी जाती है।
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कुत्ते के काटने पर वैक्सीन जरूर लगवाएं
सीएमएस डॉ. बीएस यादव ने बताया कि यदि किसी को कुत्ते ने काट लिया है और वह एंटी रेबीज वैक्सीन नहीं लगवाता है तो वह अपनी जान से खिलवाड़ करता है। उन्होंने बताया कि कुत्ते के काटने का तत्काल प्रभाव नहीं पड़ता। जैसे-जैसे समय बीतता है वैसे-वैसे शरीर में संक्रमण बढ़ता जाता है। ऐसे में मरीज के शरीर में क्या परिवर्तन हो जाए यह किसी को नहीं पता। जरूरी है कि कुत्ते के काटने पर तत्काल एआरवी लगवाई जाए। उन्होंने बताया कि अन्य जानवरों के काटने से भी रेबीज हो सकता है, इसलिए किसी भी पशु के काटने पर एआरवी जरूरी है।
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चिड़ियादाह गांव से आए अधिक मामले
जिला अस्पताल के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो पिछले माह शहर से सटे चिड़ियादाह गांव के लोग सबसे ज्यादा एआरवी लगवाने पहुंचे। पिछले माह रोजाना ही ऐसे दो-तीन लोग अस्पताल पहुंचे। इसी तरह शहर के देशनगर क्षेत्र से भी कुत्तों के काटने पर काफी संख्या में लोग जिला अस्पताल पहुंचे।
0000
माह कुत्ता काटने के मरीज
जनवरी 825
फरवरी 722
मार्च 917
अप्रैल 910
मई 956
जून 972
जुलाई 1014
अगस्त 895
कुल 7211
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नगरपालिका के पास कुत्ते पकड़ने के साधन नहीं
पीलीभीत। गली मोहल्लों में कुत्तों की भरमार है लेकिन नगरपालिका के पास इन्हें पकड़ने के साधन नहीं हैं। यही वजह है कि आए दिन गली मोहल्लों में कुत्ते लोगों को काट रहे हैं। पालिकाध्यक्ष विमला जायसवाल ने भी इस बात को स्वीकार किया। संवाद
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जिला अस्पताल के अलावा अन्य सरकारी अस्पतालों में एंटी रेबीज का टीका पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। कुत्ता काटने के बाद टीका जरूर लगवाना चाहिए।
- डॉ. आलोक कुुमार, सीएमओ
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वैसे तो गर्मी के मौसम में कुत्तों के काटने के ज्यादा मामले होते हैं लेकिन अगर जिला अस्पताल के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो जनवरी से अगस्त तक हर माह ही कुत्तों ने लोगों को शिकार बनाया है। स्थिति यह है कि रोजाना ही करीब 20 लोग कुत्तों के काटने पर जिला अस्पताल पहुंचते हैं। शहर में ही अब तक करीब सात हजार से ज्यादा लोगों को कुत्ते काट चुके हैं। देहात में यह आंकड़ा करीब छह हजार है। सीएमएस डॉ. बीएस यादव ने बताया कि अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। जिस व्यक्ति को कुत्ता काट ले उसे चार एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाए जाते हैं। एक उस दिन जिस दिन कुत्ते ने काटा हो, दूसरा काटने से तीसरे दिन, तीसरा सातवें और चौथा 28वें दिन टीका लगता है। उन्होंने बताया कि अगर किसी को कुत्ता गर्दन के ऊपर काटता है तो यह ज्यादा खतरनाक है। ऐसे लोगों को एआरवी के साथ-साथ इम्युनोग्लोबुलिन का डोज भी दी जाती है।
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कुत्ते के काटने पर वैक्सीन जरूर लगवाएं
सीएमएस डॉ. बीएस यादव ने बताया कि यदि किसी को कुत्ते ने काट लिया है और वह एंटी रेबीज वैक्सीन नहीं लगवाता है तो वह अपनी जान से खिलवाड़ करता है। उन्होंने बताया कि कुत्ते के काटने का तत्काल प्रभाव नहीं पड़ता। जैसे-जैसे समय बीतता है वैसे-वैसे शरीर में संक्रमण बढ़ता जाता है। ऐसे में मरीज के शरीर में क्या परिवर्तन हो जाए यह किसी को नहीं पता। जरूरी है कि कुत्ते के काटने पर तत्काल एआरवी लगवाई जाए। उन्होंने बताया कि अन्य जानवरों के काटने से भी रेबीज हो सकता है, इसलिए किसी भी पशु के काटने पर एआरवी जरूरी है।
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चिड़ियादाह गांव से आए अधिक मामले
जिला अस्पताल के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो पिछले माह शहर से सटे चिड़ियादाह गांव के लोग सबसे ज्यादा एआरवी लगवाने पहुंचे। पिछले माह रोजाना ही ऐसे दो-तीन लोग अस्पताल पहुंचे। इसी तरह शहर के देशनगर क्षेत्र से भी कुत्तों के काटने पर काफी संख्या में लोग जिला अस्पताल पहुंचे।
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माह कुत्ता काटने के मरीज
जनवरी 825
फरवरी 722
मार्च 917
अप्रैल 910
मई 956
जून 972
जुलाई 1014
अगस्त 895
कुल 7211
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नगरपालिका के पास कुत्ते पकड़ने के साधन नहीं
पीलीभीत। गली मोहल्लों में कुत्तों की भरमार है लेकिन नगरपालिका के पास इन्हें पकड़ने के साधन नहीं हैं। यही वजह है कि आए दिन गली मोहल्लों में कुत्ते लोगों को काट रहे हैं। पालिकाध्यक्ष विमला जायसवाल ने भी इस बात को स्वीकार किया। संवाद
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जिला अस्पताल के अलावा अन्य सरकारी अस्पतालों में एंटी रेबीज का टीका पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। कुत्ता काटने के बाद टीका जरूर लगवाना चाहिए।
- डॉ. आलोक कुुमार, सीएमओ