{"_id":"5f3986a38ebc3e3d0e2ab6d2","slug":"dm-pilibhit-transfer-pilibhit-news-bly4164371198","type":"story","status":"publish","title_hn":"डेढ़ साल विवादों में घिरे रहे डीएम वैभव श्रीवास्तव, तबादले के बाद भी विधायकों का गुस्सा कम नहीं हुआ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डेढ़ साल विवादों में घिरे रहे डीएम वैभव श्रीवास्तव, तबादले के बाद भी विधायकों का गुस्सा कम नहीं हुआ
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पीलीभीत। अपने डेढ़ साल के कार्यकाल में डीएम वैभव श्रीवास्तव हमेशा चर्चाओं में रहे। अपनी कार्यशैली की वजह से जनप्रतिनिधियों से उनका मनमुटाव बना रहा। वे लगातार शिकायतें करते रहे, मगर अब गोशाला निर्माण में धांधली होने और गायों के लगातार मरने पर भी कार्रवाई न करना भारी पड़ गया, डीएम के तबादले की मुख्य वजह यही बताई जा रही है। सांसद वरुण गांधी का कहना है कि अब जब स्थिति बर्दाश्त से बाहर हो गई तो उन्होंने डीएम को हटाने के लिए मुख्यमंत्री से बात की थी।
बीसलपुर विधायक रामसरन वर्मा ने तो फरवरी से ही डीएम के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था। सांसद और विधायकों के अलावा भाजपा के जिलाध्यक्ष ने भी तबादले के बाद डीएम श्रीवास्तव पर आरोप लगाया कि उन्होंने हमेशा खनन माफियाओं, भू-माफिया, शराब माफिया और धान खरीद माफिया को संरक्षण दिया, उन्हें अपने आवास पर बुलाकर नाश्ता कराया।
वैभव श्रीवास्तव ने 20 फरवरी 2019 को तत्कालीन डीएम अखिलेश मिश्र का तबादला होने के बाद जिलाधिकारी पद पर कार्यभार संभाला था। उसके कुछ दिनों बाद तक तो उनकी प्रशासनिक व्यवस्था ठीक-ठाक चली, मगर कुछ ही समय बाद शहर में लाश का इलाज करने वाले एक चर्चित अस्पताल को बचाने की कोशिशें भी चर्चाओं में आईं। अक्टूबर 2019 में धान खरीद में एक माफिया को बड़ी संख्या में शाहजहांपुर के कटरा की एक फर्म के नाम से सेंटर आवंटित होने के बाद वह चर्चाओं में रहे। बीसलपुर के एक माफिया को किसान के नाम से रेत निकासी की अनुमति मिलने के बाद काफी विवाद छिड़ा और तब विधायक रामसरन वर्मा ने उन पर तमाम आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से शिकायत की। बाद में उसमें जब शासन ने हस्तक्षेप किया तो उन्हें बैक फुट पर आकर 18 लाख का जुर्माना लगाना पड़ा। आखिर में भाजपा के एक नेता समेत कुछ खनन माफिया पर उन्हें एफआईआर दर्ज करानी पड़ी।
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नगरपालिका की फाइलें जबरन मंगवा लीं
डीएम की मनमानी एक ही जगह नहीं थी। नगरपालिका के टैक्स कार्यालय में रात को डीएम के खास अफसर उनके कहने पर अलमारी तोड़कर फाइलें निकाल लाए। इसके चलते नगरपालिका चेयरमैन और ईओ कई दिन तक खासे परेशान रहे। इतना ही नहीं, डीएम ने डूडा कार्यालय में भी विभागाध्यक्ष की गैरमौजूदगी में अभिलेख जबरन उठवा लिए। उनकी इस कार्यशैली से जनपद की तीन विधायकों ने भी उनके खिलाफ मुहिम छेड़ दी। सबने एक साथ मिलकर मुख्यमंत्री तक उनकी शिकायत की। बीसलपुर विधायक ने तो खुलकर ही मोर्चा खोल दिया। बीसलपुर विधायक ने डीएम के कारनामों की पूरी फाइल ही मुख्यमंत्री तक पहुंचाई। मुख्यमंत्री ने उन्हें जांच के बाद कार्रवाई का भरोसा दिलाया था।
विधायकों से लगातार बनी रही दूरी
डीएम की भाजपा विधायकों से भी लगातार दूरी बनी रही। बीसलपुर विधायक के आवास स्थल की वीडियोग्राफी कराने और उनकी डेयरी की जांच कराने पर उन्हें बैकफुट पर आना पड़ा। बीसलपुर विधायक ने इसके चलते डीएम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। विधायक ने कई बार प्रेस कांफ्रेंस करके डीएम पर खुलकर आरोप लगाए।
घंटा और थाली बजाने से भी हुई किरकिरी
कोरोना काल के दौरान लॉकडाउन में डीएम जुलूस निकालकर थाली बजाने निकल पड़े थे। जब मामले ने तूल पकड़ा तो बैकफुट पर आना पड़ा। लॉकडाउन में ही बंद दुकानों से अचानक पूरी शराब गायब होने को भी डीएम ने गंभीरता से नहीं लिया और किसी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
चिकित्सा उपकरणों की खरीद में घपला
हाल ही में ग्राम पंचायतों में थर्मल स्कैनर और पल्स ऑक्सीमीटर खरीद में घपले की बात सामने आने के बावजूद डीएम चुप रहे। शासन ने इन चिकित्सीय उपकरणों के दाम प्रत्येक ग्राम पंचायत के लिए 2800 रुपये तय किए थे, मगर शासन के आदेश आने से पहले ही सभी ग्राम पंचायतों में बिना टेंडर एक ही कंपनी द्वारा 5886 रुपये में उपकरण खरीदकर बंटवा दिए गए।
गोशाला से 134 गायें गायब, दर्जनों मर गईं
हाल ही में सबसे ताजा मामला गोशालाओं में गायें गायब होने और मरने का रहा। देवीपुर गोशाला में छह माह पहले 134 गाय गायब हो गई थीं। हाल ही में डेढ़ दर्जन गायें भूख और कमजोरी से मर गईं। डीएम ने उसमें भी खानापूरी ही की। बरखेड़ा गोशाला से भी गोवंशीय पशुओं की शिफ्टिंग के दौरान 29 गायें मरी हुई पाई गईं। अन्य गोशालाओं के निर्माण में बड़े पैमाने पर करोड़ों का बजट ठिकाने लगाने का मामला अमर उजाला ने उठाया। डीएम के स्तर से तब भी गंभीरता नहीं दिखाई गई। गोशालाओं में गोवंशीय पशुओं की मौत और निर्माणाधीन गोशालाओं के निर्माण में हो रही धांधली पर डीएम लगातार चुप्पी साधे रहे।
गायों की मौत और गोशाला निर्माण में भ्रष्टाचार पर माफी नहीं : वरुण गांधी
जिलाधिकारी वैैैभव श्रीवास्तव ने हर मामले में हद कर रखी थी। मगर, गोशालाओं में गाय मरने लगीं तो हद हो गई। मैं वैसे तो कम बोलने में यकीन रखता हूं, लेकिन गोशालाओं के अंदर गायें मरने से मैं अंदर तक आहत था। डीएम गोशाला निर्माण के मामलों में हुए भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने में लगे थे। यह बर्दाश्त से बाहर हो गया था। जब यह सब बातें सामने आई तो मैंने सीधे मुख्यमंत्री से बात की। उसके बाद ही डीएम का ट्रांसफर हो सका। उम्मीद है कि नए जिलाधिकारी आकर सरकार की प्राथमिकता वाली सभी योजनाओं को आगे बढ़ाएंगे। गोशालाओं को सुधारने के लिए सख्त कदम उठाएंगे। -वरुण गांधी, सांसद
डीएम ने हमेशा हठधर्मिता और मनमानी की : किशनलाल
जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने जब से जनपद में कार्यभार संभाला, तब से लगातर उन्होंने अपनी हठधर्मिता और मनमानी दिखाई। वह किसी भी जनप्रतिनिधि की नहीं सुनते थे। अपने अधीनस्थ अधिकारियों को डरा धमकाकर रखते थे। डीएम के कार्यकाल में हर क्षेत्र में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला। -किशनलाल राजपूत, विधायक बरखेड़ा
केवल तबादला पर्याप्त नहीं: रामसरन वर्मा
मैंने हमेशा ही डीएम के गलत कामों के खिलाफ आवाज उठाई। हाल ही में भी मुख्यमंत्री को डीएम वैभव श्रीवास्तव के कारनामों के बारे में बताया था। अवैध खनन, स्टांप चोरी आदि में संलिप्तता रही तो भूमाफिया को संरक्षण दिया। यही नहीं डूडा के कामों में लखनऊ की फर्म से ठेकेदारी कराने, धान खरीद समेत हर तरह के माफियाओं को उनका संरक्षण रहा। डीएम माफिया को अपने आवास पर बुलाकर नाश्ता कराते थे। ये सब बातें मैंने मुख्यमंत्री को बताई थीं। डीएम को रायबरेली भेजना पर्याप्त नहीं है। डीएम पर और सख्त कार्रवाई कराने के लिए जल्द ही फिर मुख्यमंत्री से मिलूंगा। डीएम के बारे में बाकी बातें सोमवार को प्रेस वार्ता में बताऊंगा। -रामसरन वर्मा, विधायक बीसलपुर
भाजपा संगठन कार्यकर्ताओं के प्रति डीएम का रवैया कभी ठीक नहीं रहा। डीएम ने संगठन को हमेशा नजरंदाज किया। अवैध खनन से लेकर धान खरीद और गोशाला निर्माण समेत हर मामले में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया। भाजपा जिला महामंत्री पर जो एफआईआर दर्ज हुई है, उसमें भी डीएम की संलिप्तता रही। अब डीएम जनता की बर्दाश्त से बाहर हो गए थे। सरकार ने उनका तबादला करके उचित निर्णय लिया है। - संजीव प्रताप सिंह, जिलाध्यक्ष भाजपा
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बीसलपुर विधायक रामसरन वर्मा ने तो फरवरी से ही डीएम के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था। सांसद और विधायकों के अलावा भाजपा के जिलाध्यक्ष ने भी तबादले के बाद डीएम श्रीवास्तव पर आरोप लगाया कि उन्होंने हमेशा खनन माफियाओं, भू-माफिया, शराब माफिया और धान खरीद माफिया को संरक्षण दिया, उन्हें अपने आवास पर बुलाकर नाश्ता कराया।
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वैभव श्रीवास्तव ने 20 फरवरी 2019 को तत्कालीन डीएम अखिलेश मिश्र का तबादला होने के बाद जिलाधिकारी पद पर कार्यभार संभाला था। उसके कुछ दिनों बाद तक तो उनकी प्रशासनिक व्यवस्था ठीक-ठाक चली, मगर कुछ ही समय बाद शहर में लाश का इलाज करने वाले एक चर्चित अस्पताल को बचाने की कोशिशें भी चर्चाओं में आईं। अक्टूबर 2019 में धान खरीद में एक माफिया को बड़ी संख्या में शाहजहांपुर के कटरा की एक फर्म के नाम से सेंटर आवंटित होने के बाद वह चर्चाओं में रहे। बीसलपुर के एक माफिया को किसान के नाम से रेत निकासी की अनुमति मिलने के बाद काफी विवाद छिड़ा और तब विधायक रामसरन वर्मा ने उन पर तमाम आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से शिकायत की। बाद में उसमें जब शासन ने हस्तक्षेप किया तो उन्हें बैक फुट पर आकर 18 लाख का जुर्माना लगाना पड़ा। आखिर में भाजपा के एक नेता समेत कुछ खनन माफिया पर उन्हें एफआईआर दर्ज करानी पड़ी।
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नगरपालिका की फाइलें जबरन मंगवा लीं
डीएम की मनमानी एक ही जगह नहीं थी। नगरपालिका के टैक्स कार्यालय में रात को डीएम के खास अफसर उनके कहने पर अलमारी तोड़कर फाइलें निकाल लाए। इसके चलते नगरपालिका चेयरमैन और ईओ कई दिन तक खासे परेशान रहे। इतना ही नहीं, डीएम ने डूडा कार्यालय में भी विभागाध्यक्ष की गैरमौजूदगी में अभिलेख जबरन उठवा लिए। उनकी इस कार्यशैली से जनपद की तीन विधायकों ने भी उनके खिलाफ मुहिम छेड़ दी। सबने एक साथ मिलकर मुख्यमंत्री तक उनकी शिकायत की। बीसलपुर विधायक ने तो खुलकर ही मोर्चा खोल दिया। बीसलपुर विधायक ने डीएम के कारनामों की पूरी फाइल ही मुख्यमंत्री तक पहुंचाई। मुख्यमंत्री ने उन्हें जांच के बाद कार्रवाई का भरोसा दिलाया था।
विधायकों से लगातार बनी रही दूरी
डीएम की भाजपा विधायकों से भी लगातार दूरी बनी रही। बीसलपुर विधायक के आवास स्थल की वीडियोग्राफी कराने और उनकी डेयरी की जांच कराने पर उन्हें बैकफुट पर आना पड़ा। बीसलपुर विधायक ने इसके चलते डीएम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। विधायक ने कई बार प्रेस कांफ्रेंस करके डीएम पर खुलकर आरोप लगाए।
घंटा और थाली बजाने से भी हुई किरकिरी
कोरोना काल के दौरान लॉकडाउन में डीएम जुलूस निकालकर थाली बजाने निकल पड़े थे। जब मामले ने तूल पकड़ा तो बैकफुट पर आना पड़ा। लॉकडाउन में ही बंद दुकानों से अचानक पूरी शराब गायब होने को भी डीएम ने गंभीरता से नहीं लिया और किसी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
चिकित्सा उपकरणों की खरीद में घपला
हाल ही में ग्राम पंचायतों में थर्मल स्कैनर और पल्स ऑक्सीमीटर खरीद में घपले की बात सामने आने के बावजूद डीएम चुप रहे। शासन ने इन चिकित्सीय उपकरणों के दाम प्रत्येक ग्राम पंचायत के लिए 2800 रुपये तय किए थे, मगर शासन के आदेश आने से पहले ही सभी ग्राम पंचायतों में बिना टेंडर एक ही कंपनी द्वारा 5886 रुपये में उपकरण खरीदकर बंटवा दिए गए।
गोशाला से 134 गायें गायब, दर्जनों मर गईं
हाल ही में सबसे ताजा मामला गोशालाओं में गायें गायब होने और मरने का रहा। देवीपुर गोशाला में छह माह पहले 134 गाय गायब हो गई थीं। हाल ही में डेढ़ दर्जन गायें भूख और कमजोरी से मर गईं। डीएम ने उसमें भी खानापूरी ही की। बरखेड़ा गोशाला से भी गोवंशीय पशुओं की शिफ्टिंग के दौरान 29 गायें मरी हुई पाई गईं। अन्य गोशालाओं के निर्माण में बड़े पैमाने पर करोड़ों का बजट ठिकाने लगाने का मामला अमर उजाला ने उठाया। डीएम के स्तर से तब भी गंभीरता नहीं दिखाई गई। गोशालाओं में गोवंशीय पशुओं की मौत और निर्माणाधीन गोशालाओं के निर्माण में हो रही धांधली पर डीएम लगातार चुप्पी साधे रहे।
गायों की मौत और गोशाला निर्माण में भ्रष्टाचार पर माफी नहीं : वरुण गांधी
जिलाधिकारी वैैैभव श्रीवास्तव ने हर मामले में हद कर रखी थी। मगर, गोशालाओं में गाय मरने लगीं तो हद हो गई। मैं वैसे तो कम बोलने में यकीन रखता हूं, लेकिन गोशालाओं के अंदर गायें मरने से मैं अंदर तक आहत था। डीएम गोशाला निर्माण के मामलों में हुए भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने में लगे थे। यह बर्दाश्त से बाहर हो गया था। जब यह सब बातें सामने आई तो मैंने सीधे मुख्यमंत्री से बात की। उसके बाद ही डीएम का ट्रांसफर हो सका। उम्मीद है कि नए जिलाधिकारी आकर सरकार की प्राथमिकता वाली सभी योजनाओं को आगे बढ़ाएंगे। गोशालाओं को सुधारने के लिए सख्त कदम उठाएंगे। -वरुण गांधी, सांसद
डीएम ने हमेशा हठधर्मिता और मनमानी की : किशनलाल
जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने जब से जनपद में कार्यभार संभाला, तब से लगातर उन्होंने अपनी हठधर्मिता और मनमानी दिखाई। वह किसी भी जनप्रतिनिधि की नहीं सुनते थे। अपने अधीनस्थ अधिकारियों को डरा धमकाकर रखते थे। डीएम के कार्यकाल में हर क्षेत्र में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला। -किशनलाल राजपूत, विधायक बरखेड़ा
केवल तबादला पर्याप्त नहीं: रामसरन वर्मा
मैंने हमेशा ही डीएम के गलत कामों के खिलाफ आवाज उठाई। हाल ही में भी मुख्यमंत्री को डीएम वैभव श्रीवास्तव के कारनामों के बारे में बताया था। अवैध खनन, स्टांप चोरी आदि में संलिप्तता रही तो भूमाफिया को संरक्षण दिया। यही नहीं डूडा के कामों में लखनऊ की फर्म से ठेकेदारी कराने, धान खरीद समेत हर तरह के माफियाओं को उनका संरक्षण रहा। डीएम माफिया को अपने आवास पर बुलाकर नाश्ता कराते थे। ये सब बातें मैंने मुख्यमंत्री को बताई थीं। डीएम को रायबरेली भेजना पर्याप्त नहीं है। डीएम पर और सख्त कार्रवाई कराने के लिए जल्द ही फिर मुख्यमंत्री से मिलूंगा। डीएम के बारे में बाकी बातें सोमवार को प्रेस वार्ता में बताऊंगा। -रामसरन वर्मा, विधायक बीसलपुर
भाजपा संगठन कार्यकर्ताओं के प्रति डीएम का रवैया कभी ठीक नहीं रहा। डीएम ने संगठन को हमेशा नजरंदाज किया। अवैध खनन से लेकर धान खरीद और गोशाला निर्माण समेत हर मामले में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया। भाजपा जिला महामंत्री पर जो एफआईआर दर्ज हुई है, उसमें भी डीएम की संलिप्तता रही। अब डीएम जनता की बर्दाश्त से बाहर हो गए थे। सरकार ने उनका तबादला करके उचित निर्णय लिया है। - संजीव प्रताप सिंह, जिलाध्यक्ष भाजपा