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Pilibhit News: बंगाली भाषी समाज को जातीय पहचान और आरक्षण लाभ दिलाने की मांग
Fri, 12 Jun 2026 11:32 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Fri, 12 Jun 2026 11:32 PM IST
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केंद्रीय मंत्री को ज्ञापन देने पहुंचे बंगाली समुदाय के लोग। स्रोत वीडियो ग्रैफ।
पीलीभीत। जनपद के बंगाली भाषी समुदाय से जुड़े प्रतिनिधियों, ग्राम प्रधानों और प्रशासकों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित ज्ञापन शुक्रवार को जिलाधिकारी को दिया। इसमें बंगाली भाषी परिवारों की जातीय पहचान, आरक्षण संबंधी अधिकारों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) प्रमाणपत्र जारी किए जाने की मांग उठाई है।
ज्ञापन में कहा गया है कि आजादी के बाद तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित होकर उत्तर प्रदेश में बसाए गए हजारों बंगाली भाषी परिवार आज भी अपनी जातीय श्रेणी और संवैधानिक अधिकारों को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं। सरकार बंगाली भाषी परिवारों को हिंदू समुदाय का हिस्सा तो मानती है, लेकिन हिंदू वर्ण व्यवस्था के अनुरूप उनकी जातीय श्रेणी को स्पष्ट रूप से मान्यता नहीं दी जा रही है। इससे समुदाय के लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं, आरक्षण लाभों और प्रमाण पत्रों के संबंध में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ज्ञापन में कहा गया है कि यह मुद्दा पिछले लगभग पांच दशकों से शासन और प्रशासन के विभिन्न स्तरों पर उठाया जाता रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है। इस समस्या का शीघ्र समाधान कराने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि एक माह के भीतर कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो पीलीभीत ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के बंगाली भाषी समुदाय को आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
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वहीं, ज्ञापन की प्रतिलिपि केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद जितिन प्रसाद, गन्ना राज्यमंत्री संजय सिंह गंगवार, विधायक बाबूराम पासवान, विधायक स्वामी प्रवक्ता नंद, जिला पंचायत अध्यक्ष दलजीत कौर, भाजपा जिलाध्यक्ष गोकुल प्रसाद मौर्य सहित अन्य जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को भी दी गई है।
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ज्ञापन में कहा गया है कि आजादी के बाद तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित होकर उत्तर प्रदेश में बसाए गए हजारों बंगाली भाषी परिवार आज भी अपनी जातीय श्रेणी और संवैधानिक अधिकारों को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं। सरकार बंगाली भाषी परिवारों को हिंदू समुदाय का हिस्सा तो मानती है, लेकिन हिंदू वर्ण व्यवस्था के अनुरूप उनकी जातीय श्रेणी को स्पष्ट रूप से मान्यता नहीं दी जा रही है। इससे समुदाय के लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं, आरक्षण लाभों और प्रमाण पत्रों के संबंध में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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ज्ञापन में कहा गया है कि यह मुद्दा पिछले लगभग पांच दशकों से शासन और प्रशासन के विभिन्न स्तरों पर उठाया जाता रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है। इस समस्या का शीघ्र समाधान कराने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि एक माह के भीतर कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो पीलीभीत ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के बंगाली भाषी समुदाय को आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
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वहीं, ज्ञापन की प्रतिलिपि केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद जितिन प्रसाद, गन्ना राज्यमंत्री संजय सिंह गंगवार, विधायक बाबूराम पासवान, विधायक स्वामी प्रवक्ता नंद, जिला पंचायत अध्यक्ष दलजीत कौर, भाजपा जिलाध्यक्ष गोकुल प्रसाद मौर्य सहित अन्य जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को भी दी गई है।