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Pilibhit News: प्रभातफेरियों में उमड़ती थी भीड़, जेल में भी लगती थीं शाखाएं

Tue, 16 Jan 2024 01:55 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 16 Jan 2024 01:55 AM IST
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Crowd used to gather in morning processions, shakhas were set up even in jail.
जितेंद्र गुप्ता ।
रामजन्म भूमि आंदोलन के दौरान पूरनपुर के पांच लोग गए थे जेल
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संवाद न्यूज एजेंसी
पूरनपुर। रामजन्म भूमि आंदोलन के दौरान क्षेत्र के पांच लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। आंदोलन के दौरान पूरा इलाका राममय हो जाता था। प्रभातफेरियों में जमकर भीड़ उमड़ती थी। जेल में भी भजन-कीर्तन होते थे, शाखाएं लगाई जाती थीं। जेल जाने वाले लोग अब 22 जनवरी को अयोध्या में श्रीरामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा से खासे खुश हैं।
राम मंदिर आंदोलन में भाग लेने वाले लोगों को जिस घड़ी का इंतजार था वह आ गई है। 22 जनवरी को अयोध्या में श्री रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है। जेल गए प्रमोद कुमार प्रधान ने पुरानी यादें ताजा करते हुए बताया कि उस समय हिंदू समाज का हर व्यक्ति कारसेवा करना चाहता था। पुलिस से लोग मुचैटा लेने को तैयार थे।
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बता दें कि राम मंदिर आंदोलन में वैसे तो क्षेत्र के तमाम लोगों ने भाग लिया। मगर पूर्व विधायक प्रमोद कुमार प्रधान, अशोक खंडेलवाल, राजेंद्र आर्य, जितेंद्र गुप्ता पिंकी और गांव अमरैयाकलां निवासी बाबा गंगादास जेल गए थे। पांचों लोगों को थाने से तिलक लगाकर जेल के लिए रवाना किया गया था।
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इन लोगों को तीन-चार दिन पीलीभीत जेल में रखा गया, उसके बाद बदायूं जेल में शिफ्ट कर दिया गया। इसके बाद क्षेत्र से करीब एक हजार से अधिक लोगों ने गिरफ्तारियां दी थीं। रामजन्म भूमि आंदोलन में जेल जाने वाले पांच लोगों में बाबा गंगादास की करीब एक दशक पहले मौत हो चुकी है। बाकी लोग श्रीरामलाला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होने से बेहद खुश हैं।

--जेल में रखा जाता था रामभक्तों का ख्याल : जितेंद्र
जेल जाने वालों में नगर के जितेंद्र गुप्ता उस समय मात्र 18 साल के थे। जितेंद्र बताते हैं कि वे बजरंग दल के प्रखंड़ संयोजक थे। गिरफ्तारी के दिन दुकान से एसओ थाने में बैठक होने की जानकारी देकर बुला ले गए थे। थाने पहुंचने पर गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद जेल भेज दिया गया। उस समय जेल में बंद अन्य कैदी राम भक्तों का खासा ख्याल रखते थे।

--जेल का वातावरण भी था राममय : राजेंद्र
नगर निवासी राजेंद्र आर्य बताते हैं कि उनको गिरफ्तार करने के बाद बदायूं जेल भेजा गया। रामभक्तों का संख्या बल अधिक होने के कारण जेल में ही भजन कीर्तन होते थे, पूरा वातावरण राममय था। तब दीपावली और भैयादूज जेल में ही मनाई। सख्ती के बाद भी बदायूं के रामभक्त जेल में तमाम खाने-पीने की चीजें दे जाते थे। उस समय जेल कर्मी भी कहते थे कि मन तो उनका भी आंदोलन में शामिल होने का करता है लेकिन सरकार की नौकरी कर रहे हैं, इसलिए बेबस हैं।

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देखने लायक था लोगों का उत्साह : अशोक
समाजसेवी अशोक खंडेलवाल बताते हैं कि उस समय की सरकार दमन पर उतारू थी। इसके विपरीत आंदोलन को लेकर लोगों का उत्साह देखने लायक था। पूरा इलाका राममय था। वह करीब सवा महीने जेल में रहे लेकिन कभी जेल में होने का एहसास नहीं हुआ। जेल का एहसास तब हुआ जब पत्नी मिलाई करने पहुंचीं। तब उनका बेटा मात्र दो साल का था। बेटा गोद में आने के बाद उतरना ही नहीं चाहता था। तब उनकी आंखों में आंसू आ गए थे।

जितेंद्र गुप्ता ।

जितेंद्र गुप्ता ।

जितेंद्र गुप्ता ।

जितेंद्र गुप्ता ।

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