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Pilibhit News: मरम्मत के नाम पर करोड़ों खर्च, उधर उजाड़ी जा रही नहर पटरी
Fri, 01 Sep 2023 12:02 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Fri, 01 Sep 2023 12:02 AM IST
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कलीनगर। सिंचाई परियोजना के लिए महत्वपूर्ण खारजा नहर के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। एक ओर नहर पटरियों की मरम्मत के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, दूसरी ओर अभियंताओं के संरक्षण में माफिया पटरियां उजाड़कर रेत का खनन करने में जुटे हैं। मामला सुर्खियों में आने पर छुटपुट कार्रवाई कर खुद का बचाव किया जा रहा है।
शारदा डैम से निकलने वाली खारजा नहर से पीलीभीत के अलावा उन्नाव, रायबरेली तक 10 जिलों में फसलों को पानी मुहैया कराया जाता है। नहर की देखरेख की जिम्मेदारी हेड वर्क्स खंड की है। इन दिनों खारजा नहर के हेड से लेकर एक किलोमीटर दायरे में पटरी की मजबूती के लिए नहर के दोनों ओर पत्थर की पिचिंग कराई जा रही है। नहर की सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी जेई की रहती है। सुरक्षा दावों के बीच खनन की भी छूट दे दी जाती है।
कई सालों से माधोटांडा और कलीनगर क्षेत्र में कई स्थानों पर नहर की पटरियों को दोनों ओर से काट कर रेत खनन किया जा रहा है। इससे कई स्थानों पर नहर में गहरे गड्ढे हो गए हैं। यदाकदा एसडीएम और तहसीलदार खनन के वाहनों को पकड़कर कार्रवाई कर देते हैं, लेकिन नहर को उजड़वाने वाले जिम्मेदारों पर कार्रवाई से हाथ खींच लिए जाते हैं। नतीजतन खनन का धंधा बदस्तूर जारी रहता है। दो दिन पूर्व तहसीलदार कलीनगर के साथ खनन अधिकारी और सीओ पूरनपुर ने छापा मार था। इसमें रेत खनन कर नहर की पटरियों को उजाड़ने की बात कही गई थी।
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सामाजिक वानिकी प्रभाग भी बना रहता है अनजान
खारजा नहर के जिस इलाके से खनन किया जा रहा है, उसमें बेशकीमती पेड़ खड़े हैं। वन्यजीवों की भी मौजूदगी रहती है। रात के अंधेरे में रेत खनन किया जाता है। रेत की आड़ में पेड़ों का सफाया भी होता है। पूर्व में कई मामले सामने भी आए हैं, लेकिन सामाजिक वानिकी प्रभाग रोकथाम करने के बजाय अनजान बना रहता है।
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शारदा डैम से निकलने वाली खारजा नहर से पीलीभीत के अलावा उन्नाव, रायबरेली तक 10 जिलों में फसलों को पानी मुहैया कराया जाता है। नहर की देखरेख की जिम्मेदारी हेड वर्क्स खंड की है। इन दिनों खारजा नहर के हेड से लेकर एक किलोमीटर दायरे में पटरी की मजबूती के लिए नहर के दोनों ओर पत्थर की पिचिंग कराई जा रही है। नहर की सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी जेई की रहती है। सुरक्षा दावों के बीच खनन की भी छूट दे दी जाती है।
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कई सालों से माधोटांडा और कलीनगर क्षेत्र में कई स्थानों पर नहर की पटरियों को दोनों ओर से काट कर रेत खनन किया जा रहा है। इससे कई स्थानों पर नहर में गहरे गड्ढे हो गए हैं। यदाकदा एसडीएम और तहसीलदार खनन के वाहनों को पकड़कर कार्रवाई कर देते हैं, लेकिन नहर को उजड़वाने वाले जिम्मेदारों पर कार्रवाई से हाथ खींच लिए जाते हैं। नतीजतन खनन का धंधा बदस्तूर जारी रहता है। दो दिन पूर्व तहसीलदार कलीनगर के साथ खनन अधिकारी और सीओ पूरनपुर ने छापा मार था। इसमें रेत खनन कर नहर की पटरियों को उजाड़ने की बात कही गई थी।
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सामाजिक वानिकी प्रभाग भी बना रहता है अनजान
खारजा नहर के जिस इलाके से खनन किया जा रहा है, उसमें बेशकीमती पेड़ खड़े हैं। वन्यजीवों की भी मौजूदगी रहती है। रात के अंधेरे में रेत खनन किया जाता है। रेत की आड़ में पेड़ों का सफाया भी होता है। पूर्व में कई मामले सामने भी आए हैं, लेकिन सामाजिक वानिकी प्रभाग रोकथाम करने के बजाय अनजान बना रहता है।