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जंगल में आग बुझाने गए वाचर को खा गया बाघ
पीलीभ्ाीत ब्यूराो
Updated Tue, 09 May 2017 11:27 PM IST
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हंगामा करते गांव के लाोग
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जंगल में आग लगने की सूचना पर गए वाचर को बाघ ने मार डाला। दूसरे दिन शव के अवशेष, साइकिल और मोबाइल जंगल में मिला। घटना से गुस्साए ग्रामीणों ने फारेस्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए वन चौकी एवं फारेस्टर आवास पर हंगामा किया।
न्यूरिया थाना क्षेत्र के गांव अनवरगंज निवासी 45 वर्षीय ताराचंद्र टाइगर रिजर्व में संविदा वन वाचर के रूप में पिछले करीब ढाई साल से तैनात थे। सोमवार करीब चार बजे महोफ वन क्षेत्राधिकारी गिरराज सिंह पीलीभीत आ रहे थे। वनकटी बीट में उन्हें एक स्थान पर आग जलती दिखी। कुछ आगे बढ़ने पर उन्हें रास्ते में वन वाचर ताराचंद मिले। इस पर रेंजर ने उन्हें आग देख लेने के निर्देश दिए। इसके बाद ताराचंद्र आग देखने चले गए और महोफ रेंजर पीलीभीत आ गए।
शाम तक जब ताराचंद्र घर नहीं पहुंचे तो घरवालों ने वन विभाग को सूचना दी जिस पर वाचर की तलाश की गई। रात 10.30 बजे उनकी साइकिल वनकटी बीट की फर्स्ट रोड पर खड़ी मिली। इसके कुछ दूरी पर आग लगी होने के निशान थे। देर रात करीब दो बजे तक तलाशी के बाद भी वाचर का कहीं पता नहीं चल सका। सुबह चार बजे से फिर खोज शुरू की गई तो वाचर की साइकिल से करीब 20 मीटर दूरी पर ताराचंद्र के पैर मिले। पैर मिलने से उनकी मौत की पुष्टि तो हो गई लेकिन बाकी शव नहीं मिला।
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खबर फैलते ही सैकड़ों ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। पुलिस ताराचंद्र के दोनों पैरों को जंगल से बाहर लाई। जंगल के बाहर वन चौकी पर पहुंचते ही ग्रामीणों ने फारेस्टर प्रेमपाल पर घटना को छिपाने का आरोप लगाते हुए फिर हंगामा शुरू कर दिया। फारेस्टर के आवास में घुसने की कोशिश की। पुलिस की मदद वन कर्मियों ने भीड़ को हटाया। इसके बाद डीएफओ ने फारेस्टर के परिवार को वहां से सुरक्षित निकलवाया। डीएफओ कैलाश प्रकाश ने बताया कि घटनास्थल पर सबूतों को देखते हुए बाघ का हमला प्रतीत हो रहा है। वाचर के परिवार को मुआवजा दिलाने के लिए शासन को पत्र लिखा जाएगा।
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न्यूरिया थाना क्षेत्र के गांव अनवरगंज निवासी 45 वर्षीय ताराचंद्र टाइगर रिजर्व में संविदा वन वाचर के रूप में पिछले करीब ढाई साल से तैनात थे। सोमवार करीब चार बजे महोफ वन क्षेत्राधिकारी गिरराज सिंह पीलीभीत आ रहे थे। वनकटी बीट में उन्हें एक स्थान पर आग जलती दिखी। कुछ आगे बढ़ने पर उन्हें रास्ते में वन वाचर ताराचंद मिले। इस पर रेंजर ने उन्हें आग देख लेने के निर्देश दिए। इसके बाद ताराचंद्र आग देखने चले गए और महोफ रेंजर पीलीभीत आ गए।
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शाम तक जब ताराचंद्र घर नहीं पहुंचे तो घरवालों ने वन विभाग को सूचना दी जिस पर वाचर की तलाश की गई। रात 10.30 बजे उनकी साइकिल वनकटी बीट की फर्स्ट रोड पर खड़ी मिली। इसके कुछ दूरी पर आग लगी होने के निशान थे। देर रात करीब दो बजे तक तलाशी के बाद भी वाचर का कहीं पता नहीं चल सका। सुबह चार बजे से फिर खोज शुरू की गई तो वाचर की साइकिल से करीब 20 मीटर दूरी पर ताराचंद्र के पैर मिले। पैर मिलने से उनकी मौत की पुष्टि तो हो गई लेकिन बाकी शव नहीं मिला।
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खबर फैलते ही सैकड़ों ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। पुलिस ताराचंद्र के दोनों पैरों को जंगल से बाहर लाई। जंगल के बाहर वन चौकी पर पहुंचते ही ग्रामीणों ने फारेस्टर प्रेमपाल पर घटना को छिपाने का आरोप लगाते हुए फिर हंगामा शुरू कर दिया। फारेस्टर के आवास में घुसने की कोशिश की। पुलिस की मदद वन कर्मियों ने भीड़ को हटाया। इसके बाद डीएफओ ने फारेस्टर के परिवार को वहां से सुरक्षित निकलवाया। डीएफओ कैलाश प्रकाश ने बताया कि घटनास्थल पर सबूतों को देखते हुए बाघ का हमला प्रतीत हो रहा है। वाचर के परिवार को मुआवजा दिलाने के लिए शासन को पत्र लिखा जाएगा।