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ऐसे तो नहीं मिलेगी लावारिस लाशों को अपनी पहचान
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
Updated Wed, 22 Jun 2016 11:48 PM IST
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अज्ञात शव की शिनाख्त को लेकर पुलिस अफसर बड़े- बड़े दावे करते हैं। इसको लेकर किए गए प्रयासों को बेहतर बताया जाता है, लेकिन हकीकत बयानों से मेल नहीं खाती। सत्रह दिन के भीतर मिले तीन अज्ञात शव अपनी ही पहचान पाने को मोहताज हैं। ऐसा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है जिससे गुत्थी को सुलझाया जा सके, जबकि खुद डीआईजी ने शवों की शिनाख्त को लेकर पीलीभीत पुलिस को पत्र भेजकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए थे।
घटना एक :
आठ मई को बीसलपुर रोड पर 132 केवीए के पास आसाम चौकी क्षेत्र के एक बाग में 32 वर्षीय अज्ञात युवक का शव पेड़ से लटका मिला। शिनाख्त कराने के लिए दावे तो काफी बड़े किए गए, लेकिन कार्रवाई सिर्फ कागजों में सिमट कर रह गई है। इसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आत्महत्या की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने राहत महसूस की।
घटना दो :
ठीक आठ दिन बाद सोलह मई को कोतवाली क्षेत्र के देवहा नदी के किनारे एक पैंसठ वर्षीय महिला का शव कूड़े के ढेर में पड़ा मिला। उसकी भी आज तक शिनाख्त नहीं हो सकी है, जबकि महिला की गला दबाकर हत्या की गई, उसके बाद शव यहां लाकर फेंक दिया गया।
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घटना तीन :
गजरौला क्षेत्र में पूरनपुर रोड पर सराय गांव के पास 24 मई को गन्ने के खेत में चौबीस वर्षीय अज्ञात युवक का अधजला शव मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या करने और बाद में शव जलाने की पुष्टि हुई। हत्या के इस गंभीर मामले में पुलिस बेहद लापरवाह बनी हुई है। शव का अंतिम संस्कार होने तक पुलिस अंधेरे में तीर चलाती रही और अब मामला अभिलेखों में सीमित रह गया है।
लापरवाही से हत्यारों को मिला अभयदान
खाकी की ओर से बरती जा रही लापरवाही कहीं न कहीं अपराधियों के लिए अभयदान साबित हो रही है। तीन में से दो शव हत्या कर फेंके गए थे। शिनाख्त के अभाव में केस पर प्रगति शून्य है। जिससे अपराधी लंबा समय बीतने के बाद भी कानूनी शिकंजे से बाहर हैं। यहीं नहीं वर्तमान स्थिति को देखते हुए इनका अंत फाइनल रिपोर्ट है, कहना गलत नहीं होगा।
थाने में बैठकर भरे जा रहे अभिलेख
हर बार पुलिस ने इनके फोटो आसपास के थाना क्षेत्रों में भिजवाने का दावा किया। यह भी कहा कि टीमें गैर जनपद जाकर गुमशुदा हुए लोगों की सूची चेक करेंगी, जिससे मिलान कर अज्ञात शव की शिनाख्त हो सके, लेकिन यह प्रयास भी लापरवाही की भेंट चढ़ गया। किसी तरह की गंभीरता नहीं बरती गई। सिर्फ अफसरों की डांट-डपट से बचने को अभिलेख मेनटेन किए जा रहे है। यही नहीं नियमानुसार हत्या का केस दर्ज करने से भी पुलिस शुरूआत में बचती रही। इसके लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट को कई दिनों तक गोल रखा गया।
अज्ञात शव की शिनाख्त को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे है। कई लोगों से संपर्क कर पता लगाने की कोशिश की गई, लेकिन अभी कुछ निकलकर सामने नहीं आ सका है। शिनाख्त के बाद ही हत्या की दिशा में कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा सकेगा।
- निर्मल कुमार विष्ट, सीओ सिटी -
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घटना एक :
आठ मई को बीसलपुर रोड पर 132 केवीए के पास आसाम चौकी क्षेत्र के एक बाग में 32 वर्षीय अज्ञात युवक का शव पेड़ से लटका मिला। शिनाख्त कराने के लिए दावे तो काफी बड़े किए गए, लेकिन कार्रवाई सिर्फ कागजों में सिमट कर रह गई है। इसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आत्महत्या की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने राहत महसूस की।
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घटना दो :
ठीक आठ दिन बाद सोलह मई को कोतवाली क्षेत्र के देवहा नदी के किनारे एक पैंसठ वर्षीय महिला का शव कूड़े के ढेर में पड़ा मिला। उसकी भी आज तक शिनाख्त नहीं हो सकी है, जबकि महिला की गला दबाकर हत्या की गई, उसके बाद शव यहां लाकर फेंक दिया गया।
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घटना तीन :
गजरौला क्षेत्र में पूरनपुर रोड पर सराय गांव के पास 24 मई को गन्ने के खेत में चौबीस वर्षीय अज्ञात युवक का अधजला शव मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या करने और बाद में शव जलाने की पुष्टि हुई। हत्या के इस गंभीर मामले में पुलिस बेहद लापरवाह बनी हुई है। शव का अंतिम संस्कार होने तक पुलिस अंधेरे में तीर चलाती रही और अब मामला अभिलेखों में सीमित रह गया है।
लापरवाही से हत्यारों को मिला अभयदान
खाकी की ओर से बरती जा रही लापरवाही कहीं न कहीं अपराधियों के लिए अभयदान साबित हो रही है। तीन में से दो शव हत्या कर फेंके गए थे। शिनाख्त के अभाव में केस पर प्रगति शून्य है। जिससे अपराधी लंबा समय बीतने के बाद भी कानूनी शिकंजे से बाहर हैं। यहीं नहीं वर्तमान स्थिति को देखते हुए इनका अंत फाइनल रिपोर्ट है, कहना गलत नहीं होगा।
थाने में बैठकर भरे जा रहे अभिलेख
हर बार पुलिस ने इनके फोटो आसपास के थाना क्षेत्रों में भिजवाने का दावा किया। यह भी कहा कि टीमें गैर जनपद जाकर गुमशुदा हुए लोगों की सूची चेक करेंगी, जिससे मिलान कर अज्ञात शव की शिनाख्त हो सके, लेकिन यह प्रयास भी लापरवाही की भेंट चढ़ गया। किसी तरह की गंभीरता नहीं बरती गई। सिर्फ अफसरों की डांट-डपट से बचने को अभिलेख मेनटेन किए जा रहे है। यही नहीं नियमानुसार हत्या का केस दर्ज करने से भी पुलिस शुरूआत में बचती रही। इसके लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट को कई दिनों तक गोल रखा गया।
अज्ञात शव की शिनाख्त को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे है। कई लोगों से संपर्क कर पता लगाने की कोशिश की गई, लेकिन अभी कुछ निकलकर सामने नहीं आ सका है। शिनाख्त के बाद ही हत्या की दिशा में कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा सकेगा।
- निर्मल कुमार विष्ट, सीओ सिटी -