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सुरक्षा को लगी तीसरी आंख हो गई खराब
ब्यूरो /पीलीभीत
Updated Thu, 03 Nov 2016 10:14 PM IST
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सुरक्षा को लगी तीसरी आंख हो गई खराब
- फोटो : पीलीभ्ाीत/उत्ततर प्रदेश्ा
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अपराधियों पर शिकंजा कसने और शहर की सड़कों की सुरक्षा को लेकर शहर के मुख्य चौराहों पर लगाई गई खाकी तीसरी आंख (सीसीटीवी कैमरे) पिछले कई सालों से खुद रोशन होने के लिए तरस रही है। अफसर गंभीर होकर कार्य करने के दावे तो कर रहे है, लेकिन हकीकत बयानों से मेल नहीं खाती। लगाए गए 15 कैमरों में से सिर्फ छह कैमरे ही काम कर रहे है। ऐसे में पुलिस को मजबूत और हाइटेक बनाने का शासन का अहम कदम जिला स्तर पर कामयाब नहीं हो सका है।
साल 2013 तत्कालीन एसपी अमित वर्मा ने सड़कों पर सुरक्षा व्यवस्था सख्त करने के लिए पुलिस महकमे की ओर से मुख्य चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए थे। जिसके बाद अफसरों ने अपराध पर सीधे नजर रखने और हुड़दंगियों पर शिकंजा कसने के तमाम दावे किए थे। खास बात रही कि कैमरे कब लगे और कब खराब हो गए। किसी को पता भी नहीं लग सका। इनका सुधार कराने के बजाए अफसर सीसीटीवी कैमरों को लेकर बचते रहे और साख बचाने के लिए हवाहवाई बयानबाजी करते रहे। दिनदहाड़े लूटपाट की घटनाएं अंजाम दी गई। सुरागरसी के लिए पुलिस ने जब तीसरी आंख की मदद लेनी चाही। तब जाकर कैमरों की हकीकत का पता अफसरों को लग सका। जिसके बाद अफसर बदलते गए और कवायदें भी बयानों में जारी रही। करीब शासन से कैमरों के लिए भेजा गया अठारह लाख रुपये का बजट समाप्त हो गया, लेकिन तस्वीर आज भी नहीं बदल सकी है। वर्तमान समय में मुख्य चौराहों पर लगाए गए 15 कैमरों में से नौ बंद पड़े हुए है। ऐसा नहंी कि अफसरों को इसकी जानकारी नहीं, सब जानकर अनदेखी जारी है।
सर्दी के मौसम में न बन जाए मुसीबत
सर्दी का मौसम दस्तक दे रहा है। ऐसे में खराब पड़े कैमरे कानून व्यवस्था के लिए मुसीबत न बन जाए। पिछले सालों हुई घटनाओं पर नजर डालें तो ये तीन महीने चोरों ने तावड़तोड़ वारदातों को अंजाम दिया। जेपी रोड, सुनहरी मस्जिद, ड्रमंडगंज और बरेली गेट के पास पिछले साल भी दुकानें काटकर चोरी हुई। उस वक्त भी कैमरों की खराबी के चलते पुलिस खुलासे में असफल रही और फाइनल रिपोर्ट लगाकर मुकदमों को समाप्त कर दिया गया।
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अभिलेखों में बदलती रही हकीकत
लगए गए कैमरों की क्वालिटी को खराब बताते हुए 2015 में तत्कालीन एसपी सोनिया सिंह ने सुधार के लिए कवायद शुरू की। जिसमें कैमरों को बदलवाकर नए चारों ओर घूमने वाले कैमरे लगवाए गए। कुछ दिन चलने के बाद से भी बंद पड़ गए। इसके बाद इसी साल जितेंद्र कुमार शाही ने भी ठेकेदार बदलकर काम कराया। फिर एसपी जवाहर ने भी खराबी सामने आने पर ठेकेदार को नोटिस भेजकर कैमरों की मरम्मत कराई। इसका कंट्रोल रूम कोतवाली थाने से हटाकर पुलिस लाइंस में कर दिया गया। सिग्रल की दिक्कत बताते हुए टावर की जगह बदली गई। लेकिन कोई चंद दिन चलने के बाद जब कैमरे खराब हुए तो किसी ने ध्यान नहीं दिया। सिर्फ अभिलेखों में सुधार और सीसीटीवी व्यवस्था को ओके दिखा दिया गया।
इन चौराहों पर लगे है सीसीटीवी कैमरे
वर्तमान समय में पुलिस महकमें के सीसीटीवी कैमरे छतरी चौराहा, सुनहरी मस्जिद, नौगवां चौराहा, बरेली गेट, एकता सरोवर, ड्रमंडगंज आदि पर लगे है। इनमें चारों ओर की सड़कों को कवर करने के लिए 16 कैमरे लगाए गए है। यह बात दीगर रही कि मुख्य -मुख्य स्थानों के भी नौ कैमरे काम नहीं कर रहे।
प्राइवेट स्थानों पर लगे कैमरे भी नहीं दे सके मद्द
खुद के कैमरे खराब होने पर पुलिस निजी प्रतिष्ठानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों का सहारा लेती है। कई घटनाओं में अपराधियों की तस्वीर उनमें कैद भी मिली, लेकिन क्वालिटी ठीक न होने के कारण खाकी को मदद नहीं मिल सकी।
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साल 2013 तत्कालीन एसपी अमित वर्मा ने सड़कों पर सुरक्षा व्यवस्था सख्त करने के लिए पुलिस महकमे की ओर से मुख्य चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए थे। जिसके बाद अफसरों ने अपराध पर सीधे नजर रखने और हुड़दंगियों पर शिकंजा कसने के तमाम दावे किए थे। खास बात रही कि कैमरे कब लगे और कब खराब हो गए। किसी को पता भी नहीं लग सका। इनका सुधार कराने के बजाए अफसर सीसीटीवी कैमरों को लेकर बचते रहे और साख बचाने के लिए हवाहवाई बयानबाजी करते रहे। दिनदहाड़े लूटपाट की घटनाएं अंजाम दी गई। सुरागरसी के लिए पुलिस ने जब तीसरी आंख की मदद लेनी चाही। तब जाकर कैमरों की हकीकत का पता अफसरों को लग सका। जिसके बाद अफसर बदलते गए और कवायदें भी बयानों में जारी रही। करीब शासन से कैमरों के लिए भेजा गया अठारह लाख रुपये का बजट समाप्त हो गया, लेकिन तस्वीर आज भी नहीं बदल सकी है। वर्तमान समय में मुख्य चौराहों पर लगाए गए 15 कैमरों में से नौ बंद पड़े हुए है। ऐसा नहंी कि अफसरों को इसकी जानकारी नहीं, सब जानकर अनदेखी जारी है।
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सर्दी के मौसम में न बन जाए मुसीबत
सर्दी का मौसम दस्तक दे रहा है। ऐसे में खराब पड़े कैमरे कानून व्यवस्था के लिए मुसीबत न बन जाए। पिछले सालों हुई घटनाओं पर नजर डालें तो ये तीन महीने चोरों ने तावड़तोड़ वारदातों को अंजाम दिया। जेपी रोड, सुनहरी मस्जिद, ड्रमंडगंज और बरेली गेट के पास पिछले साल भी दुकानें काटकर चोरी हुई। उस वक्त भी कैमरों की खराबी के चलते पुलिस खुलासे में असफल रही और फाइनल रिपोर्ट लगाकर मुकदमों को समाप्त कर दिया गया।
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अभिलेखों में बदलती रही हकीकत
लगए गए कैमरों की क्वालिटी को खराब बताते हुए 2015 में तत्कालीन एसपी सोनिया सिंह ने सुधार के लिए कवायद शुरू की। जिसमें कैमरों को बदलवाकर नए चारों ओर घूमने वाले कैमरे लगवाए गए। कुछ दिन चलने के बाद से भी बंद पड़ गए। इसके बाद इसी साल जितेंद्र कुमार शाही ने भी ठेकेदार बदलकर काम कराया। फिर एसपी जवाहर ने भी खराबी सामने आने पर ठेकेदार को नोटिस भेजकर कैमरों की मरम्मत कराई। इसका कंट्रोल रूम कोतवाली थाने से हटाकर पुलिस लाइंस में कर दिया गया। सिग्रल की दिक्कत बताते हुए टावर की जगह बदली गई। लेकिन कोई चंद दिन चलने के बाद जब कैमरे खराब हुए तो किसी ने ध्यान नहीं दिया। सिर्फ अभिलेखों में सुधार और सीसीटीवी व्यवस्था को ओके दिखा दिया गया।
इन चौराहों पर लगे है सीसीटीवी कैमरे
वर्तमान समय में पुलिस महकमें के सीसीटीवी कैमरे छतरी चौराहा, सुनहरी मस्जिद, नौगवां चौराहा, बरेली गेट, एकता सरोवर, ड्रमंडगंज आदि पर लगे है। इनमें चारों ओर की सड़कों को कवर करने के लिए 16 कैमरे लगाए गए है। यह बात दीगर रही कि मुख्य -मुख्य स्थानों के भी नौ कैमरे काम नहीं कर रहे।
प्राइवेट स्थानों पर लगे कैमरे भी नहीं दे सके मद्द
खुद के कैमरे खराब होने पर पुलिस निजी प्रतिष्ठानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों का सहारा लेती है। कई घटनाओं में अपराधियों की तस्वीर उनमें कैद भी मिली, लेकिन क्वालिटी ठीक न होने के कारण खाकी को मदद नहीं मिल सकी।