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अवैध शराब के धंधेबाजों पर नहीं लग पा रहा अंकुश
पीलीभीत, ब्यूरो
Updated Sat, 27 Aug 2016 11:36 PM IST
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अवैध कच्ची शराब का कारोबार रोकने को सालों से अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन इस अवैध कारोबार पर आज तक अंकुश नहीं लग सका। जहरीली शराब के सेवन से होने वाली मौत की घटनाएं बढ़ती है तो सख्त कार्रवाई का दिखावा भर कर दिया जाता है। जनपद में तैनाती के बाद एसपी मुनिराज ने सख्ती दिखाई, लेकिन यह भी बेकार साबित हो रही है। इस अवैध धंधे की जड़ें अब सीमांत क्षेत्रों तक जा पहुंच गईं हैं।
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इन इलाकों में बदस्तूर जारी है अवैध कारोबार
माधोटांडा थाना क्षेत्र के कलीनगर, जमुनिया, सपहा, बंगला उर्फ मित्रसेन, लोहरपुरी, फुल्हर, हरीपुर, दोदपुर, नरायनपुर बुजुर्ग, कटकवारा, गभिया सहराई इलाके में रमनगरा व शारदा नदी से सटे इलाके में अवैध शराब का धंधा सालों से बदस्तूर चल रहा है। जंगल से सटे इलाकों में यह धंधा चरम पर इसलिए है कि इसके धंधेबाजों को बड़ी-बड़ी भट्ठियां जलाने को आसानी से लकड़ी मिल जाती है।
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शीरे की बेहिसाब बिक्री धंधे की असली जड़
माधोटांडा व पूरनपुर क्षेत्र में शराब बनाने को शीरे का धंधा चरम पर है। लोगों का कहना है कि यदि शीरे की बिक्री पर प्रतिबंध लग जाए तो अवैध शराब का धंधा तो खुद ही बंद हो जाएगा। चर्चा तो यह भी है कि शराब बनाने को शीरे व उसके मसाले की डिलीवरी सीधे धंधबाजों तक की जाती है, लेकिन आबकारी व पुलिस महकमा शीरा बेचने वालों पर मेहरबान बना हुआ है। पूरनपुर के तत्कालीन कोतवाल वीरेंद्र सिंह यादव ने पूर्व में सभी शीरा बेचने वालों से बिक्री संबंधी अभिलेख तलब किए थे तो उनमें हड़कंप मच गया। उन्होंने इसकी सूची डीएम व एसपी को भी कार्रवाई के लिए भेजी थी, लेकिन मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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अवैध कारोबार ने नेपाल तक बनाई पकड़
अवैध शराब न केवल माधोटांडा या पूरनपुर में बिक्री की जा रही है बल्कि यह अवैध कारोबार नेपाल तक पकड़ बना चुका है। सीमा से सटे नेपाल के इलाके से भारतीय गांवों के ग्रामीणों को शराब मिलने का गढ़ बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय सीमा पिलर नंबर 21 के निकट तो नेपाल में बाकायदा एक शराब की दुकान नोमेंस लैंड से मात्र दस मीटर दूरी पर खुल चुकी है।
समय-समय पर की जाती है कार्रवाई
मामले में आबकारी विभाग के इस्पेक्टर हरीओम सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। आबकारी निरीक्षक ओमकार सिंह ने बताया कि शीरा भी आबकारी की श्रेणी में आता है। समय-समय पर शीरे की दुकानों पर छापामार कार्रवाई करने के साथ सैंपल भरने की भी कार्रवाई की जाती है।
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इन इलाकों में बदस्तूर जारी है अवैध कारोबार
माधोटांडा थाना क्षेत्र के कलीनगर, जमुनिया, सपहा, बंगला उर्फ मित्रसेन, लोहरपुरी, फुल्हर, हरीपुर, दोदपुर, नरायनपुर बुजुर्ग, कटकवारा, गभिया सहराई इलाके में रमनगरा व शारदा नदी से सटे इलाके में अवैध शराब का धंधा सालों से बदस्तूर चल रहा है। जंगल से सटे इलाकों में यह धंधा चरम पर इसलिए है कि इसके धंधेबाजों को बड़ी-बड़ी भट्ठियां जलाने को आसानी से लकड़ी मिल जाती है।
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शीरे की बेहिसाब बिक्री धंधे की असली जड़
माधोटांडा व पूरनपुर क्षेत्र में शराब बनाने को शीरे का धंधा चरम पर है। लोगों का कहना है कि यदि शीरे की बिक्री पर प्रतिबंध लग जाए तो अवैध शराब का धंधा तो खुद ही बंद हो जाएगा। चर्चा तो यह भी है कि शराब बनाने को शीरे व उसके मसाले की डिलीवरी सीधे धंधबाजों तक की जाती है, लेकिन आबकारी व पुलिस महकमा शीरा बेचने वालों पर मेहरबान बना हुआ है। पूरनपुर के तत्कालीन कोतवाल वीरेंद्र सिंह यादव ने पूर्व में सभी शीरा बेचने वालों से बिक्री संबंधी अभिलेख तलब किए थे तो उनमें हड़कंप मच गया। उन्होंने इसकी सूची डीएम व एसपी को भी कार्रवाई के लिए भेजी थी, लेकिन मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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अवैध कारोबार ने नेपाल तक बनाई पकड़
अवैध शराब न केवल माधोटांडा या पूरनपुर में बिक्री की जा रही है बल्कि यह अवैध कारोबार नेपाल तक पकड़ बना चुका है। सीमा से सटे नेपाल के इलाके से भारतीय गांवों के ग्रामीणों को शराब मिलने का गढ़ बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय सीमा पिलर नंबर 21 के निकट तो नेपाल में बाकायदा एक शराब की दुकान नोमेंस लैंड से मात्र दस मीटर दूरी पर खुल चुकी है।
समय-समय पर की जाती है कार्रवाई
मामले में आबकारी विभाग के इस्पेक्टर हरीओम सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। आबकारी निरीक्षक ओमकार सिंह ने बताया कि शीरा भी आबकारी की श्रेणी में आता है। समय-समय पर शीरे की दुकानों पर छापामार कार्रवाई करने के साथ सैंपल भरने की भी कार्रवाई की जाती है।