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फायरिंग में घायल युवक की बरेली में हुई मौत
ब्यूरो, अमर उजाला पीलीभीत
Updated Fri, 26 Dec 2014 11:54 PM IST
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बता दें कि गांव पिपरा नंबर दो में पूर्व प्रधान दलित जागन लाल जाटव का पड़ोस में रहने वाले एक व्यक्ति के बीच कई सालों से ग्राम समाज की जमीन पर कब्जे को लेकर वर्चस्व की लड़ाई चल रही थी। गुरुवार की देर शाम दोनों में मारपीट के बाद फायरिंग हो गई। फायरिंग के दौरान गोली लगने से जागन लाल, उनके दो पुत्र दिनेश व विजेंद्र घायल हो गए। हालत गंभीर होने पर जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने दोनों भाइयों को बरेली रेफर कर दिया था। घायल जागन लाल ने बताया कि पुत्र दिनेश की भोजीपुरा (बरेली) के एक अस्पताल में शुक्रवार की तड़के मौत हो गई, जबकि विजेंद्र की हालत गंभीर बनी है। उसे डॉक्टरों ने आईसीयू में रखा है।
प्रभारी निरीक्षक बृजेश सिंह ने दिनेश की मौत होने की पुष्टि की है। उनका कहना है कि घरवालों ने देर शाम तक पुलिस को घटना की तहरीर नहीं दी है। तहरीर मिलने पर हत्या की रिपोर्ट दर्ज की जाएगी।
पुलिस सतर्क होती तो नहीं जाती दिनेश की जान
पीलीभीत। गांव पिपरा नंबर दो में फायरिंग की घटना में पुलिस और राजस्व अधिकारियों की लापरवाही उजागर हुई है। ग्राम पंचायत की जमीन पर कब्जे को लेकर वर्चस्व की आग कई वर्षों से धधक रही थी। यह मामला कई बार पुलिस और राजस्व अधिकारियों के सामने भी पहुंचा, लेकिन अधिकारियों ने खानापूर्ति कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली। नतीजतन गुरुवार को चली गोली दिनेश की जान ले गई। यदि पुलिस और राजस्व अमला इस पर गंभीर होता तो शायद घटना घटित नहीं होती।
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जिले के नोडल अधिकारी परिवहन आयुक्त के रविंद्र नायक एक माह पूर्व जिले के दौरे पर आए थे। उन्होंने डीएम व एसपी को खासतौर पर जमीनी विवादों को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए थे। उनका कहना था कि अधिकतर जातीय संघर्ष, हत्या जैसी घटनाएं भूमि विवादों के चलते होती हैं, लेकिन इसके बाद भी पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने करीब 20 सालों से गांव पिपरा नंबर दो में ग्राम पंचायत की जमीन को लेकर धधक रही आग मामले में लापरवाही दिखाई। गांव निवासी घायल जागनलाल की मानें तो उसने तीन जून 14 को विवाद होने पर सुनगढ़ी पुलिस को तहरीर दी थी। तीन दिन पहले भी थाने गए और तहरीर दी थी, लेकिन पुलिस ने मामले को बेहद हल्के में लिया। दोनों पक्षों के खिलाफ पाबंद की भी कार्रवाई नहीं की। प्रभारी निरीक्षक बृजेश सिंह ने बताया कि दोनों पक्षों के खिलाफ पाबंद करने की कार्रवाई चल रही थी। इसी बीच घटना घटित हो गई।
निरस्त होंगे लाइसेंस
प्रभारी निरीक्षक बृजेश सिंह ने बताया कि दोंनों पक्षों के पास लाइसेंसी एक नाली बंदूकें हैं। जो पुलिस के मय कारतूसों के साथ कब्जे में हैं। मौके से दो कारतूस के खोखे भी बरामद हुए। डीएम को लाइसेंस निरस्त करने की रिपोर्ट भेजी जाएगी।
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प्रभारी निरीक्षक बृजेश सिंह ने दिनेश की मौत होने की पुष्टि की है। उनका कहना है कि घरवालों ने देर शाम तक पुलिस को घटना की तहरीर नहीं दी है। तहरीर मिलने पर हत्या की रिपोर्ट दर्ज की जाएगी।
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पुलिस सतर्क होती तो नहीं जाती दिनेश की जान
पीलीभीत। गांव पिपरा नंबर दो में फायरिंग की घटना में पुलिस और राजस्व अधिकारियों की लापरवाही उजागर हुई है। ग्राम पंचायत की जमीन पर कब्जे को लेकर वर्चस्व की आग कई वर्षों से धधक रही थी। यह मामला कई बार पुलिस और राजस्व अधिकारियों के सामने भी पहुंचा, लेकिन अधिकारियों ने खानापूर्ति कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली। नतीजतन गुरुवार को चली गोली दिनेश की जान ले गई। यदि पुलिस और राजस्व अमला इस पर गंभीर होता तो शायद घटना घटित नहीं होती।
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जिले के नोडल अधिकारी परिवहन आयुक्त के रविंद्र नायक एक माह पूर्व जिले के दौरे पर आए थे। उन्होंने डीएम व एसपी को खासतौर पर जमीनी विवादों को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए थे। उनका कहना था कि अधिकतर जातीय संघर्ष, हत्या जैसी घटनाएं भूमि विवादों के चलते होती हैं, लेकिन इसके बाद भी पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने करीब 20 सालों से गांव पिपरा नंबर दो में ग्राम पंचायत की जमीन को लेकर धधक रही आग मामले में लापरवाही दिखाई। गांव निवासी घायल जागनलाल की मानें तो उसने तीन जून 14 को विवाद होने पर सुनगढ़ी पुलिस को तहरीर दी थी। तीन दिन पहले भी थाने गए और तहरीर दी थी, लेकिन पुलिस ने मामले को बेहद हल्के में लिया। दोनों पक्षों के खिलाफ पाबंद की भी कार्रवाई नहीं की। प्रभारी निरीक्षक बृजेश सिंह ने बताया कि दोनों पक्षों के खिलाफ पाबंद करने की कार्रवाई चल रही थी। इसी बीच घटना घटित हो गई।
निरस्त होंगे लाइसेंस
प्रभारी निरीक्षक बृजेश सिंह ने बताया कि दोंनों पक्षों के पास लाइसेंसी एक नाली बंदूकें हैं। जो पुलिस के मय कारतूसों के साथ कब्जे में हैं। मौके से दो कारतूस के खोखे भी बरामद हुए। डीएम को लाइसेंस निरस्त करने की रिपोर्ट भेजी जाएगी।