{"_id":"59ad509c4f1c1be9278b5164","slug":"151504530588-pilibhit-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दहशत में गुजर गए 25 दिन, नहीं मिला खूनी बाघ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
दहशत में गुजर गए 25 दिन, नहीं मिला खूनी बाघ
Updated Mon, 04 Sep 2017 06:39 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पीलीभीत। हिमकरनपुर और बेहरी गांव सहित आसपास के गई गांव पिछले 25 दिनों से बाघ की दहशत में जी रहे हैं लेकिन उन्हें इससे निजात नहीं मिली है। सुबह से शाम तक वन विभाग की टीमें खेतों व झाड़ियों की खाक छान रही हैं लेकिन बाघ हत्थे नहीं चढ़ रहा है।
अमरिया के हिमकरनपुर और बेहरी गांव के आसपास घूम रहे खूनी बाघ ने तीन लोगों की जान ले ली थी। इसके बाद से ही इसे ट्रैक्यूलाइज कर पकड़ने के आदेश दिए गए थे। इसके लिए चार हाथियों के साथ विशेषज्ञों एवं वनकर्मियों की टीम लगाई गई है। दो स्थानों पर मचान भी बने है और पड्डे भी बांधे जा रहे हैं। 25 दिन से चल रहे इस अभियान के दौरान किसानों से गांव से बाहर अकेेले न आने की अपील भी लगातार की जा रही है। आए दिन टीमें खेतों की ओर आने वाले किसानों को भी रोकने का प्रयास करती हैं। इस सबके बावजूद बाघ अभी तक पकड़ में नहीं आया है। इसके चलते क्षेत्र में दहशत का माहौल अभी भी कायम है। आलम यह है कि दिन में भले ही कुछ लोग खेतों की ओर पहुंच रहे हैं लेकिन शाम होते ही घरों में दुबक जाते हैं। बाघ के न पकड़े जाने से क्षेत्रों की दिनचर्या ही प्रभावित हो रही है। बच्चे स्कूल जाने से डर रहे हैं। वहीं पालतू पशुओं को खुला छोड़ने से भी ग्रामीण आशंकित हैं।
000000000
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने की बैठक
बाघ की दहशत से परेशान लोगों की समस्याएं जानने एवं उनको जागरूक करने के उद्देश्य से डब्ल्यूडब्ल्यूएफ व वन विभाग की ओर से हिमकरनपुर सहित आसपास के कई गांव में बैठकों का आयोजन किया गया। डीएफओ आदर्श कुमार व डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजना अधिकारी नरेश कुमार ने बाघ को पकड़ने के लिए अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी दी। साथ ही ग्रामीणों से धैर्य बनाए रखने, खेतों पर अकेले न जाने, फसल संबंधी जरूरी कार्यों को सामूहिक रूप से सतर्कता के साथ करने की अपील की। साथ ही यह भी आश्वासन दिया कि यदि कहीं भी वन विभाग के सहयोग की जरूरत होगी वह की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
अमरिया के हिमकरनपुर और बेहरी गांव के आसपास घूम रहे खूनी बाघ ने तीन लोगों की जान ले ली थी। इसके बाद से ही इसे ट्रैक्यूलाइज कर पकड़ने के आदेश दिए गए थे। इसके लिए चार हाथियों के साथ विशेषज्ञों एवं वनकर्मियों की टीम लगाई गई है। दो स्थानों पर मचान भी बने है और पड्डे भी बांधे जा रहे हैं। 25 दिन से चल रहे इस अभियान के दौरान किसानों से गांव से बाहर अकेेले न आने की अपील भी लगातार की जा रही है। आए दिन टीमें खेतों की ओर आने वाले किसानों को भी रोकने का प्रयास करती हैं। इस सबके बावजूद बाघ अभी तक पकड़ में नहीं आया है। इसके चलते क्षेत्र में दहशत का माहौल अभी भी कायम है। आलम यह है कि दिन में भले ही कुछ लोग खेतों की ओर पहुंच रहे हैं लेकिन शाम होते ही घरों में दुबक जाते हैं। बाघ के न पकड़े जाने से क्षेत्रों की दिनचर्या ही प्रभावित हो रही है। बच्चे स्कूल जाने से डर रहे हैं। वहीं पालतू पशुओं को खुला छोड़ने से भी ग्रामीण आशंकित हैं।
विज्ञापन
000000000
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने की बैठक
बाघ की दहशत से परेशान लोगों की समस्याएं जानने एवं उनको जागरूक करने के उद्देश्य से डब्ल्यूडब्ल्यूएफ व वन विभाग की ओर से हिमकरनपुर सहित आसपास के कई गांव में बैठकों का आयोजन किया गया। डीएफओ आदर्श कुमार व डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजना अधिकारी नरेश कुमार ने बाघ को पकड़ने के लिए अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी दी। साथ ही ग्रामीणों से धैर्य बनाए रखने, खेतों पर अकेले न जाने, फसल संबंधी जरूरी कार्यों को सामूहिक रूप से सतर्कता के साथ करने की अपील की। साथ ही यह भी आश्वासन दिया कि यदि कहीं भी वन विभाग के सहयोग की जरूरत होगी वह की जाएगी।
विज्ञापन