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समय से इलाज मिलता तो बच सकती थी शिक्षक की जान
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पीलीभीत। पंचायत चुनाव के दौरान कोरोना संक्रमण के चलते बेसिक शिक्षा विभाग के कई शिक्षकों को अपनी जान गंवानी पड़ी। उच्च प्राथमिक विद्यालय सिमरा ताल्लुके महाराजपुर के शिक्षक बसंत पाल सिंह (60) की कोरोना संक्रमण के चलते 16 मई को बरेली के एक कोविड अस्पताल में मौत हो गई। शिक्षक की मौत के बाद उनका परिवार पूरी तरह से टूट चुका है। जिस घर में कभी खुशियां बिखरती थी, आज वहां सन्नाटा पसरा हुआ है।
ललौरीखेड़ा ब्लाक के गांव जतीपुर निवासी बसंतपाल सिंह की 1997 में बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक पद पर नियुक्ति हुई थी। वर्तमान में वह उच्च प्राथमिक विद्यालय सिमरा ताल्लुके महाराजपुर में शिक्षक के पद पर तैनात थे। शिक्षक के पुत्र अनिल कुमार ने बताया कि पिता ने 16 अप्रैल को पंचायत चुनाव का प्रशिक्षण लिया था। 26 अप्रैल को मरौरी ब्लॉक के एक मतदान केंद्र पर ड्यूटी की थी। इसके दो-तीन बाद उनकी तबीयत खराब हुई थी तो वह खुद ही किसी डॉक्टर से दवा ले आए थे। इसी बीच एंटीजन टेस्ट भी कराया, जिसमें वह निगेटिव पाए गए। 14 मई को तबीयत फिर से बिगड़ने लगी। सांस लेने में दिक्कत होने पर उन्हें शहर के एक प्राइवेट अस्पताल में लेकर आए, मगर अस्पताल वालों ने बेड और ऑक्सीजन न होने की बात कहकर भर्ती करने से मना कर दिया। काफी मिन्नतें भी कीं, मगर किसी ने नहीं सुनी। इस पर पिता को लेकर रात में ही बरेली पहुंचे, जहां उन्हें कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां कोरोना की जांच की गई। जांच रिपोर्ट में पिता कोरोना संक्रमित पाए गए। 15 मई को तबीयत ज्यादा बिगड़ने लगी तो उन्हें वेंटिलेटर पर लिया गया, मगर कोई सुधार नहीं हुआ। 16 मई को पिता का निधन हो गया।
किसी अस्पताल में नहीं किया गया भर्ती
शिक्षक बसंत पाल सिंह सिंह की तीन संतान हैं। इनमें पुत्री मनीषा गंगवार विवाहित हैं, जबकि पुत्री मंजू गंगवार अविवाहित है और स्टाफ नर्स की जॉब करती हैं। पुत्र अनिल कुमार अनुदेशक हैं। पति की मौत के बाद उनकी पत्नी रामगीता (55) गुमसुम हैं। शिक्षक के पुत्र अनिल कुमार ने बताया कि पंचायत चुनाव के बाद से ही पिता की हालत बिगड़ने लगी थी। जिले में ही समय रहते उनके पिता को इलाज नहीं मिला। यदि अपने जिले के किसी अस्पताल में भर्ती कर लिया जाता तो पिता की जान बच सकती थी।
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ललौरीखेड़ा ब्लाक के गांव जतीपुर निवासी बसंतपाल सिंह की 1997 में बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक पद पर नियुक्ति हुई थी। वर्तमान में वह उच्च प्राथमिक विद्यालय सिमरा ताल्लुके महाराजपुर में शिक्षक के पद पर तैनात थे। शिक्षक के पुत्र अनिल कुमार ने बताया कि पिता ने 16 अप्रैल को पंचायत चुनाव का प्रशिक्षण लिया था। 26 अप्रैल को मरौरी ब्लॉक के एक मतदान केंद्र पर ड्यूटी की थी। इसके दो-तीन बाद उनकी तबीयत खराब हुई थी तो वह खुद ही किसी डॉक्टर से दवा ले आए थे। इसी बीच एंटीजन टेस्ट भी कराया, जिसमें वह निगेटिव पाए गए। 14 मई को तबीयत फिर से बिगड़ने लगी। सांस लेने में दिक्कत होने पर उन्हें शहर के एक प्राइवेट अस्पताल में लेकर आए, मगर अस्पताल वालों ने बेड और ऑक्सीजन न होने की बात कहकर भर्ती करने से मना कर दिया। काफी मिन्नतें भी कीं, मगर किसी ने नहीं सुनी। इस पर पिता को लेकर रात में ही बरेली पहुंचे, जहां उन्हें कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां कोरोना की जांच की गई। जांच रिपोर्ट में पिता कोरोना संक्रमित पाए गए। 15 मई को तबीयत ज्यादा बिगड़ने लगी तो उन्हें वेंटिलेटर पर लिया गया, मगर कोई सुधार नहीं हुआ। 16 मई को पिता का निधन हो गया।
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किसी अस्पताल में नहीं किया गया भर्ती
शिक्षक बसंत पाल सिंह सिंह की तीन संतान हैं। इनमें पुत्री मनीषा गंगवार विवाहित हैं, जबकि पुत्री मंजू गंगवार अविवाहित है और स्टाफ नर्स की जॉब करती हैं। पुत्र अनिल कुमार अनुदेशक हैं। पति की मौत के बाद उनकी पत्नी रामगीता (55) गुमसुम हैं। शिक्षक के पुत्र अनिल कुमार ने बताया कि पंचायत चुनाव के बाद से ही पिता की हालत बिगड़ने लगी थी। जिले में ही समय रहते उनके पिता को इलाज नहीं मिला। यदि अपने जिले के किसी अस्पताल में भर्ती कर लिया जाता तो पिता की जान बच सकती थी।
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