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टीबी की रोकथाम के दावे हवा हवाई, पांच साल में बढ़ गए 89.1 फीसदी मरीज
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पीलीभीत। कहीं जागरूकता नहीं तो कहीं लापरवाही हो रही है। इस कारण जिले में क्षय रोग यानी टीबी की बीमारी तेजी से पैर पसार रही है। जिले में पिछले पांच साल के आंकड़े देखे जाएं तो टीबी के मरीजों में 89.10 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। वर्ष 2017 में मरीजों की संख्या जहां 2000 थी, पिछले साल बढ़कर 3782 हो गई। मरीजों की संख्या बढ़ने का मुख्य कारण चिकित्सकों ने जागरूकता की कमी और लापरवाही माना है।
जिले में पिछले पांच वर्षों में टीबी के कुल 15309 मरीज मिल चुके हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि ठीक होने वालों की संख्या 13473 रही है। 2017 से देखा जाए तो मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हुई है। इस दौरान मरीज ठीक जरूर हुए लेकिन टीबी पर रोकथाम लगाने को ठोस उपाए नहीं हुए हैं।
इस कारण मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा होता रहा। 2017 की तुलना में 2018 में 1797 मरीज ज्यादा मिले। अगले साल इनकी संख्या में और इजाफा हुआ और मरीजों की संख्या 145 तक बढ़ी। मौजूदा वक्त की बात करें तो मार्च तक जिले में 1470 टीबी के सक्रिय मरीज हैं। इसमें 207 बच्चे और 500 महिलाएं हैं, जबकि पुरुषों की संख्या 763 है।
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वर्ष - मरीज मिले- ठीक हुए
2017 - 2000 - 1677
2018- 3297- 2837
2019 - 3442 - 3028
2020- 2788- 2487
2021- 3782 - 3444
कुल मरीज मिले- 15309
ठीक हुए- 13473
हवा से फैलती है बीमारी... इसलिए रहें जागरूक - जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजेश भट्ट के अनुसार क्षय रोग माइक्रोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नाम के जीवाणु से होता है। टीबी का ये बैक्टीरिया हवा के जरिये एक इंसान से दूसरे में पहुंच जाता है। ये मर्ज आमतौर पर फेफड़ों से शुरू होती है।
यह रोग अमूमन फेफड़ों की टीबी है लेकिन यह ब्रेन, यूटरस, मुंह, लिवर, किडनी, गला, हड्डी आदि शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है। खांसने और छींकने के दौरान मुंह-नाक से निकलने वाली बारीक बूंदों से बैक्टीरिया फैलते हैं। हालांकि फेफड़ों के अलावा बाकी टीबी एक से दूसरे में फैलनेवाली नहीं होती। यह पीढ़ी दर पीढ़ी चलने वाली बीमारी भी नहीं है। लक्षण दिखने पर तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें।
टीबी के नुकसान - टीबी का बैक्टीरिया शरीर के जिस भी हिस्से में होता है उसके ऊतकों को पूरी तरह नष्ट कर देता है। वो हिस्सा काम करना बंद कर देता है। जैसे फेफड़ों में टीबी है तो फेफड़ों को धीरे-धीरे खराब हो जाते हैं। अगर यूटरस में है तो बांझपन की बड़ी वजह बन सकती है। अगर हड्डी में है तो हड्डी को गला देती है, ब्रेन में है तो मरीज को दौरे पड़ सकते हैं, लिवर में है तो पेट में पानी भर सकता है आदि।
ये हैं लक्षण - डॉ. राजेश भट्ट ने बताया कि अगर दो हफ्ते से ज्यादा लगातार खांसी, खांसी के साथ बलगम आ रहा है, कभी कभी खून भी आ जा रहा है टीबी के लक्षण हो सकते हैं। इसके अलावा भूख कम लगना, लगातार वजन कम होना, शाम या रात के वक्त बुखार आना, सर्दी में भी पसीना आना, सांस उखड़ना या सांस लेते हुए सीने में दर्द होना, इनमें से कोई भी लक्षण हो सकता है।
बरतें सावधानी - अगर कोई टीबी मरीज है तो उसे अलग रखें। मुंह ढककर रहें। इसके अलावा अच्छा खानपान रखें। कई बार खानपान अच्छा न होने के कारण भी टीबी हो सकती है। अंधेरी और सीलन भरी जगहों पर भी टीबी ज्यादा होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि टीबी का बैक्टीरिया अंधेरे में पनपता है। धूम्रपान करने वाले को टीबी का खतरा ज्यादा होता है। डायबिटीज के मरीजों, स्टेरॉयड लेने वालों और एचआईवी मरीजों को भी खतरा रहता है।
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जिले में पिछले पांच वर्षों में टीबी के कुल 15309 मरीज मिल चुके हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि ठीक होने वालों की संख्या 13473 रही है। 2017 से देखा जाए तो मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हुई है। इस दौरान मरीज ठीक जरूर हुए लेकिन टीबी पर रोकथाम लगाने को ठोस उपाए नहीं हुए हैं।
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इस कारण मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा होता रहा। 2017 की तुलना में 2018 में 1797 मरीज ज्यादा मिले। अगले साल इनकी संख्या में और इजाफा हुआ और मरीजों की संख्या 145 तक बढ़ी। मौजूदा वक्त की बात करें तो मार्च तक जिले में 1470 टीबी के सक्रिय मरीज हैं। इसमें 207 बच्चे और 500 महिलाएं हैं, जबकि पुरुषों की संख्या 763 है।
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वर्ष - मरीज मिले- ठीक हुए
2017 - 2000 - 1677
2018- 3297- 2837
2019 - 3442 - 3028
2020- 2788- 2487
2021- 3782 - 3444
कुल मरीज मिले- 15309
ठीक हुए- 13473
हवा से फैलती है बीमारी... इसलिए रहें जागरूक - जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजेश भट्ट के अनुसार क्षय रोग माइक्रोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नाम के जीवाणु से होता है। टीबी का ये बैक्टीरिया हवा के जरिये एक इंसान से दूसरे में पहुंच जाता है। ये मर्ज आमतौर पर फेफड़ों से शुरू होती है।
यह रोग अमूमन फेफड़ों की टीबी है लेकिन यह ब्रेन, यूटरस, मुंह, लिवर, किडनी, गला, हड्डी आदि शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है। खांसने और छींकने के दौरान मुंह-नाक से निकलने वाली बारीक बूंदों से बैक्टीरिया फैलते हैं। हालांकि फेफड़ों के अलावा बाकी टीबी एक से दूसरे में फैलनेवाली नहीं होती। यह पीढ़ी दर पीढ़ी चलने वाली बीमारी भी नहीं है। लक्षण दिखने पर तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें।
टीबी के नुकसान - टीबी का बैक्टीरिया शरीर के जिस भी हिस्से में होता है उसके ऊतकों को पूरी तरह नष्ट कर देता है। वो हिस्सा काम करना बंद कर देता है। जैसे फेफड़ों में टीबी है तो फेफड़ों को धीरे-धीरे खराब हो जाते हैं। अगर यूटरस में है तो बांझपन की बड़ी वजह बन सकती है। अगर हड्डी में है तो हड्डी को गला देती है, ब्रेन में है तो मरीज को दौरे पड़ सकते हैं, लिवर में है तो पेट में पानी भर सकता है आदि।
ये हैं लक्षण - डॉ. राजेश भट्ट ने बताया कि अगर दो हफ्ते से ज्यादा लगातार खांसी, खांसी के साथ बलगम आ रहा है, कभी कभी खून भी आ जा रहा है टीबी के लक्षण हो सकते हैं। इसके अलावा भूख कम लगना, लगातार वजन कम होना, शाम या रात के वक्त बुखार आना, सर्दी में भी पसीना आना, सांस उखड़ना या सांस लेते हुए सीने में दर्द होना, इनमें से कोई भी लक्षण हो सकता है।
बरतें सावधानी - अगर कोई टीबी मरीज है तो उसे अलग रखें। मुंह ढककर रहें। इसके अलावा अच्छा खानपान रखें। कई बार खानपान अच्छा न होने के कारण भी टीबी हो सकती है। अंधेरी और सीलन भरी जगहों पर भी टीबी ज्यादा होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि टीबी का बैक्टीरिया अंधेरे में पनपता है। धूम्रपान करने वाले को टीबी का खतरा ज्यादा होता है। डायबिटीज के मरीजों, स्टेरॉयड लेने वालों और एचआईवी मरीजों को भी खतरा रहता है।