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चंदिया हजारा गांव वाले अब घर के बाहर लगवाएंगे फ्लैक्सी
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ग्राम पंचायत चंदिया हजारा के समीप बहती शारदा नदी।
- फोटो : PILIBHIT
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पूरनपुर। भाजपा के नेता और विधायक साढ़े चार साल पूरे होने पर प्रेसवार्ता कर जगह-जगह कराए गए कामों को गिना रहे हैं। मगर शारदा नदी किनारे बसे चंदिया हजारा गांव के लोग जनप्रतिनिधियों से विकास को लेकर सवाल पूछ रहे हैं। गांव वालों ने यात्री प्रतीक्षालय की दीवार पर समस्या पट लगवा कर सवाल पूछे थे। जब इसे ग्राम पंचायत अधिकारी ने ढकवा दिया गया तो गांव वालों अपने घर के बाहर फ्लैक्सी लगाने का निर्णय लिया है।
चंदिया हजारा में कुछ दिन पहले गांव के सामुदायिक यात्री प्रतीक्षालय की दीवार पर गांव की समस्याओं की बाल पेंटिंग कराकर सामूहिक रूप से समस्याएं उठाई थी। इससे सरकारी तंत्र और नेताओं में खलबली मच गई। प्रधान का कहना है कि अफसरों और नेताओं ने समस्याओं का समाधान कराने के स्थान पर समस्याओं के पट को ढकवा दिया। प्रधान ने बताया कि ग्राम पंचायत सचिव ने समस्याओं को सार्वजनिक रूप से न लिखने की बात कही। इस पर समस्या पट को ढकवा दिया गया। प्रधान ने बताया कि एक जनप्रतिनिधि के पुत्र ने गांव पहुंचकर समस्या पट को लेकर नाराजगी व्यक्त की। कहा कि समस्याएं 50 साल की है। मगर अब इनको क्यों उठाया जा रहा है। प्रधान ने बताया कि समस्या उनकी निजी नहीं। पूरे इलाकेे की है। ग्राम पंचायत सदस्यों और अन्य लोगों की राय से ही समस्या पट पर समस्याओं को लिखवाया गया था। समस्या पट ढकवाने पर अब घर-घर में समस्या पट के होर्डिंग लगाए जाएंगे। जिनको बनने का आर्डर दे दिया गया है। गांव पहुंचने वाले जनप्रतिनिधियों से समस्याओं को लेकर सवाल पूछे ही जाएंगे।
शारदा की बाढ़ की समस्या सबसे बड़ी
शारदा नदी किनारे बसे गांव के लोग करीब हर साल बाढ़ में अपनी तबाही का मंजर देखते हैं। नदी के रुख बदलने की वजह से नदी की अगले साल धार किस गांव की ओर होगी को लेकर असमंजस बना रहता है। करीब पांच किलोमीटर की चौड़ाई में नदी का पानी परेशानी पैदा करता है। इससे बचाव का उपाय निकाला जाना है।
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यह है गांव की मुख्य समस्याएं
-शारदा नदी से खेती की भूमि का कटान
शारदा नदी की खुदाई कर पुराने बहाव में लाने का कार्य अधूरा
विस्थापित परिवारों को जमीन पर मालिकाना नहीं मिला
-चंदिया हजारा में एक हाईस्कूल व इंटर कॉलेज नहीं बन सका
-चंदिया हजारा में उप स्वास्थ्य केंद्र न होने से होते हैं मरीज परेशान
तमाम बार समस्याओं का समाधान कराने की मांग की गई। मगर जनप्रतिनिधियों और सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया। अब जब समस्या को एकजुट होकर उठाया गया। तब अफसर, जनप्रतिनिधि दबाव बना रहे हैं
और कहते हैं कि अपनी समस्या को सार्वजनिक क्यों कर रहे हो।
- परमानंद, राहुलनगर
बाढ़ आने पर अफसर पिकनिक मनाने को फोटो खिंचवाने को क्षेत्र में आते हैं। हर बार समस्याओं का समाधान कराने का आश्वासन दिया जाता है। मगर समस्याओं का समाधान कराने की जहमत नहीं उठाई गई समस्याओं को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
- अरुण ढाली, चंदिया हजारा
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चंदिया हजारा में कुछ दिन पहले गांव के सामुदायिक यात्री प्रतीक्षालय की दीवार पर गांव की समस्याओं की बाल पेंटिंग कराकर सामूहिक रूप से समस्याएं उठाई थी। इससे सरकारी तंत्र और नेताओं में खलबली मच गई। प्रधान का कहना है कि अफसरों और नेताओं ने समस्याओं का समाधान कराने के स्थान पर समस्याओं के पट को ढकवा दिया। प्रधान ने बताया कि ग्राम पंचायत सचिव ने समस्याओं को सार्वजनिक रूप से न लिखने की बात कही। इस पर समस्या पट को ढकवा दिया गया। प्रधान ने बताया कि एक जनप्रतिनिधि के पुत्र ने गांव पहुंचकर समस्या पट को लेकर नाराजगी व्यक्त की। कहा कि समस्याएं 50 साल की है। मगर अब इनको क्यों उठाया जा रहा है। प्रधान ने बताया कि समस्या उनकी निजी नहीं। पूरे इलाकेे की है। ग्राम पंचायत सदस्यों और अन्य लोगों की राय से ही समस्या पट पर समस्याओं को लिखवाया गया था। समस्या पट ढकवाने पर अब घर-घर में समस्या पट के होर्डिंग लगाए जाएंगे। जिनको बनने का आर्डर दे दिया गया है। गांव पहुंचने वाले जनप्रतिनिधियों से समस्याओं को लेकर सवाल पूछे ही जाएंगे।
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शारदा की बाढ़ की समस्या सबसे बड़ी
शारदा नदी किनारे बसे गांव के लोग करीब हर साल बाढ़ में अपनी तबाही का मंजर देखते हैं। नदी के रुख बदलने की वजह से नदी की अगले साल धार किस गांव की ओर होगी को लेकर असमंजस बना रहता है। करीब पांच किलोमीटर की चौड़ाई में नदी का पानी परेशानी पैदा करता है। इससे बचाव का उपाय निकाला जाना है।
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यह है गांव की मुख्य समस्याएं
-शारदा नदी से खेती की भूमि का कटान
शारदा नदी की खुदाई कर पुराने बहाव में लाने का कार्य अधूरा
विस्थापित परिवारों को जमीन पर मालिकाना नहीं मिला
-चंदिया हजारा में एक हाईस्कूल व इंटर कॉलेज नहीं बन सका
-चंदिया हजारा में उप स्वास्थ्य केंद्र न होने से होते हैं मरीज परेशान
तमाम बार समस्याओं का समाधान कराने की मांग की गई। मगर जनप्रतिनिधियों और सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया। अब जब समस्या को एकजुट होकर उठाया गया। तब अफसर, जनप्रतिनिधि दबाव बना रहे हैं
और कहते हैं कि अपनी समस्या को सार्वजनिक क्यों कर रहे हो।
- परमानंद, राहुलनगर
बाढ़ आने पर अफसर पिकनिक मनाने को फोटो खिंचवाने को क्षेत्र में आते हैं। हर बार समस्याओं का समाधान कराने का आश्वासन दिया जाता है। मगर समस्याओं का समाधान कराने की जहमत नहीं उठाई गई समस्याओं को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
- अरुण ढाली, चंदिया हजारा